देश में 23 मई से पहले प्रतीक्षा है 19 मई की, जब आएँगे EXIT POLLS : जानिए कैसे निकलते हैं आँकड़े ?

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अहमदाबाद, 14 मई, 2019। लोकसभा चुनाव 2019 अब अपने अंतिम पड़ाव पर है। गत 11 अप्रैल को प्रथम चरण के मतदान से आरंभ हुआ यह चुनाव आगामी 19 मई को सातवें चरण के मतदान के साथ सम्पन्न हो जाएगा। इसके साथ ही चुनाव आयोग (EC) की ओर से देश में 6 मार्च को लोकसभा चुनावों की घोषणा किए जाने के साथ लागू आदर्श चुनाव आचार संहिता भी लगभग ढाई महीने बाद समाप्त हो जाएगी। 19 मई को अंतिम चरण के मतदान के साथ ही पूरे देश और सभी राजनीतिक दलों की निगाहें जहाँ 23 मई पर टिक जाएँगी, वहीं देशवासियों की उत्सुकता चुनाव परिणामों से पहले आने वाले एग्ज़िट पोल को लेकर भी है।

आदर्श चुनाव आचार संहिता लागू होने के बाद किसी भी प्रकार के चुनावी सर्वेक्षण के प्रचार-प्रसार पर रोक लग जाती है, परंतु 19 मई को शाम छह बजे जैसे ही अंतिम चरण का मतदान समाप्त होगा, वैसे ही आचार संहिता भी ख़त्म हो जाएगी और पिछले सवा महीने से मतदान पश्चात सर्वेक्षण (EXIT POLL) कर रहीं सर्वेक्षण एजेंसियां विभिन्न मीडिया के माध्यम से जनता का मूड का आइना दिखाने की कोशिश करेंगी। इसीलिए 23 मई को घोषित होने वाले चुनाव परिणामों से पहले 19 मई को आने वाले एग्ज़िट पोल को लेकर लोगों में काफी उत्सुकता और जिज्ञासा देखी जा रही है। लोकसभा चुनाव 2014 में भी सारे एग्ज़िट पोल के निष्कर्ष लगभग सटीक रहे थे और परिणामों के बाद नरेन्द्र मोदी ही प्रधानमंत्री बने थे।

अत्यंत सूक्ष्म प्रक्रिया से तैयार होता है एग्ज़िट पोल

ओपीनियन और एग्ज़िट पोल दोनों ही चुनावी सर्वेक्षण हैं, परंतु चुनाव की घोषणा के साथ जहाँ ओपीनियन पोल यानी चुनाव पूर्व सर्वेक्षण पर प्रतिबंध के प्रचार-प्रसार पर रोक लग जाती है, वहीं चरणबद्ध ढंग से होने वाले मतदान के दौरान आखिरी चरण के मतदान तक एग्ज़िट पोल यानी मतदान पश्चात सर्वेक्षण पर भी रोक लगी रहती है। इस लिहाज़ से सर्वेक्षण एजेंसियों ने एग्ज़िट पोल के लिए सर्वेक्षण का काम तो 11 अप्रैल को प्रथम चरण के मतदान से ही आरंभ कर दिया, परंतु उसका प्रचार-प्रसार अंतिम चरण के मतदान सम्पन्न होने यानी 19 मई की शाम को ही हो सकेगा। जहाँ तक एग्ज़िट पोल का सवाल है, तो यह चुनाव के दौरान निर्वाचकों, मतदाताओं से की गई बातचीत, अलग-अलग राजनीतिक दलों, प्रत्याशियों की हार-जीत के पूर्वानुमानों के आकलन पर तैयार किया जाता है। कोई भी सर्वेक्षण अलग-अलग तरह के होते हैं और इनका आधार भी अलग-अलग हो सकता है। एग्ज़िट पोल के तहत वोटिंग के बाद डाटा इकट्ठा किया जाता है। वोटिंग के दिन वोट डाल कर बाहर निकलने वाले मतदाता से पूछा जाता है कि उसने किसे वोट दिया। इसी आधार पर किए गए सर्वेक्षण से जो व्यापक निष्कर्ष निकलता है, उसे ही एग्ज़िट पोल कहते हैं।

मार्सेल वैन डैम हैं एग्ज़िट पोल के जनक

एग्ज़िट पोल शुरू करने का श्रेय नीदरलैण्ड के एक समाजशास्त्री और पूर्व राजनेता मार्सेल वैन डैम को जाता है। डैम ने 15 फरवरी, 1967 में पहली बार नीदरलैण्ड चुनाव में इसका प्रयोग किया और पहले ही प्रयोग में आए निष्कर्ष परिणामों से काफी हद तक मेल खाए। भारत में एग्ज़िट पोल का प्रारंभ इंडियन इंस्टीट्यूट ऑफ पब्लिक ओपीनियन (IIPO) के अध्यक्ष Eric P. W. da Costa को जाता है। भारत में चुनाव के दौरान इस विधा के जरिए जनता के मूड को परखने वाले कोस्टा प्रथम व्यक्ति थे।

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