‘करतारपुर’ को क्यों नहीं छू रहा था पकिस्तान? भारत ने रोकी वार्ता

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विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 10 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू कश्मीर से धारा 370 खत्म किये जाने से बौखलाया पाकिस्तान भारत को दुनिया में नीचा दिखाने के प्रयासों में जुटा है। दुनिया को दिखाने के लिये ही उसने पहले भारत के साथ द्विपक्षीय व्यापारिक रिश्ते खत्म किये और कूटनीतिक स्तर पर राजनयिक सम्बंधों में कटौती करने का निर्णय किया। फिर भारत और पाकिस्तान के बीच दौड़ने वाली समझौता एक्सप्रेस और थार एक्सप्रेस ट्रेन तथा दिल्ली-लाहौर बस सेवा रोकी। उसने भारत को संयुक्त राष्ट्र की सुरक्षा परिषद में ले जाने की भी धमकी दी है। हालाँकि उसके इन सब कदमों का भारत पर कोई असर नहीं पड़ रहा है। अब भारत ने भी करारा जवाब देने के लिये पाकिस्तान पर पलट वार कर दिया है और करतारपुर कोरिडोर की तकनीकी वार्ता रोक दी है।

करतारपुर कोरिडोर को लेकर पाक नहीं पाकिस्तान की मंशा

जम्मू कश्मीर का विशेष राज्य का दर्जा छीन लिये जाने से पाकिस्तान में हड़कंप मचा हुआ है और वह भारत के विरुद्ध एक के बाद एक हथकंडे अपना रहा है। हालाँकि दोनों देशों के बीच तनावपूर्ण स्थिति होने के बावजूद पाकिस्तान ने करतारपुर कोरिडोर परियोजना रोकने की घोषणा नहीं की, बल्कि गुरुवार को पाकिस्तानी विदेश मंत्रालय के प्रवक्ता मोहम्मद फैसल ने यह परियोजना जारी रखने की घोषणा की और कहा कि पाकिस्तान सभी धर्मों का आदर करता है और वह इस परियोजना पर आगे बढ़ेगा। पाकिस्तान के करतारपुर-नरोवल में सिख तीर्थ यात्रियों का गुरुद्वारा दरबार साहिब स्थित है। इस तीर्थ से भारतीय सिख समुदाय के लोगों की विशेष भावनाएँ जुड़ी हैं, क्योंकि यह गुरुद्वारा उसी जगह पर बना है, जहाँ गुरु नानक देव ने 22 सितंबर 1539 में अंतिम साँस ली थी। इस तीर्थ स्थल तक आसानी से पहुँच सकें, इसके लिये भारत और पाकिस्तान ने मिलकर रास्ता उपलब्ध कराने के लिये कोरिडोर पर साझा सहमति बनाई थी। पिछले साल 28 नवंबर को पाकिस्तान के पीएम इमरान खान ने पाकिस्तान के हिस्से में इस कोरिडोर के निर्माण के लिये नींव रखी थी। इस कोरिडोर को गुरु नानक देव की 550वीं जयंती पर नवंबर में खोला जाना है, ताकि भारत के सिख श्रद्धालु इस खास मौके पर इस पवित्र स्थल के दर्शन कर सकें।

हालाँकि इस कोरिडोर को लेकर पाकिस्तान की मंशा पाक-साफ नहीं है। माना जा रहा है कि इस कोरिडोर के रास्ते वह एक बार फिर पंजाब में खालिस्तानी आतंकवाद की घुसपैठ कराने की मंशा रखता है। क्योंकि पूर्व में इस कोरिडोर पर दोनों देशों के बीच वार्ता के लिये जो प्रतिनिधि मंडल गठित किया गया था। उसमें पाकिस्तान की ओर से गठित 10 सदस्यीय पाकिस्तान सिख गुरुद्वारा प्रबंधक कमेटी (PSGPC) में एक खालिस्तान समर्थक गोपाल सिंह चावला को जगह दी गई थी। इस पर भारत की ओर से आपत्ति जताने के बाद पाकिस्तान ने गोपाल सिंह चावला को कमेटी से हटा दिया था और भारत को आश्वासन दिया था कि पाकिस्तान की ओर से भारत विरोधी किसी भी गतिविधि की अनुमति नहीं दी जाएगी। हालाँकि भारत के मामले में पाकिस्तान अपने वादों पर कितना पालन करता है, यह जग जाहिर है। वह भारत से किये गये वादों से हमेशा मुकरता आया है। इतना ही नहीं, पाकिस्तान भारत के भरोसे को भी तोड़ता आया है। यही कारण है कि भारत भी पाकिस्तान को लेकर किसी भी मामले में पूरी सतर्कता बरतता है। भारत ने पाकिस्तान के मंसूबों को नाकाम करने के लिये उसे चोट दे दी है और करतारपुर कोरिडोर पर इसी सप्ताह होने वाली तकनीकी वार्ता को रोक दिया है। अब यह देखना दिलचस्प होगा कि पाकिस्तान की ओर से इस पर क्या प्रतिक्रिया आती है ?

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