मोदी से एक अदद मुलाक़ात को तरसते इमरान की हालत लोमड़ी जैसी, ‘अंगूर खट्टे हैं’ !

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* पाकिस्तान ने वह वार्ता बंद की, जो भारत 3 साल से बंद किए बैठा है

* व्यापार संबंध तोड़ कर इमरान ने डूबती नाव में कर दिया बड़ा छेद

* खुद तबाह हो जाएगा पाकिस्तान, टमाटर जैसी लाल-सुर्ख़ हो जाएगी महंगाई

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 8 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। भारत में एक खरगोश और लोमड़ी की कहानी मशहूर है। एक जंगल में भूख से परेशान लोमड़ी को जब पेड़ पर लटकते अंगूर दिखाई दिए। लोमड़ी के मुँह में पानी आ गया। उसने सोचा कि आज अंगूर खाकर भूख मिटाई जाए। अंगूर को तोड़ने के लिए लोमड़ी कई बार उछली, परंतु वह उन तक पहुँचने में असफल रही। अंगूर बहुत ऊँचाई पर लगे हुए थे। एक बार उछलते-उछलते लोमड़ी धड़ाम से भूमि पर गिर पड़ी, जिससे उसके शरीर में चोट भी लग गई। जब लोमड़ी को अनुभूति हो गई कि वह अंगूर नहीं तोड़ पाएगी, तो वह वहाँ से चुपचाप चल दी। एक खरगोश यह सब खेल देख रहा था। वह लोमड़ी के सम्मुख आकर बोला, ‘लोमड़ी मौसी, अंगूर को खाये बिना ही चल दीं ? अंगूर नहीं खाओगी ?’ लोमड़ी बोली, ‘नहीं, अंगूर खट्टे है। यदि मैं इन्हें खाऊँगी, तो बीमार पड़ जाऊँगी। खरगोश बोला, ‘अंगूर तोड़ नही पाईं, तो कह रही हैं अंगूर खट्टे हैं ?’

यह कहानी इसलिए सुनाई, क्योंकि पाकिस्तान के प्रधानमंत्री इमरान खान की हालत लोमड़ी जैसी हो गई है। भारत ने जम्मू-कश्मीर से धारा 370 क्या हटाई, पाकिस्तान इस क़दर बौखला गया, मानो भारत ने उसका कुछ लूट लिया हो। आनन-फानन में संसद का संयुक्त सत्र बुलाया गया और वहाँ प्रधानमंत्री इमरान खान ने जो घोषणा की, उस घोषणा में इमरान खान के भीतर छिपी वह लोमड़ी की झलक नज़र आई, जिसे अंगूर खट्टे लगे थे।

इमरान खान को प्रधानमंत्री बने अभी एक साल भी पूरा नहीं हुआ है। गत 18 अगस्त, 2018 को पाकिस्तान के प्रधानमंत्री बने इमरान खान ने गद्दी तो न्यू पाकिस्तान के नारे के साथ संभाली, परंतु अपने पहले भाषण में अपने पूर्वजों की तर्ज पर तमाम बातें करने के साथ-साथ वे कश्मीर और भारत का जिक्र करना नहीं भूले। उन्होंने अपने पहले ही भाषण में भारत से बातचीत की पेशकश की। इमरान की इस पेशकश के पीछे भारत के विश्व स्तरीय नेता प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी से मुलाक़ात की मंशा साफ झलक रही थी। इसके बाद भी इमरान खान ने मोदी से एक अदद मुलाक़ात के लिए अप्रत्यक्ष रूप से हर संभव प्रयास किए। इमरान को अपनी मनोकामना उस समय पूरी होती लगी, जब लोकसभा चुनाव 2019 में नरेन्द्र मोदी को पुन: बहुमत मिला। मोदी 30 मई, 2019 को शपथ लेने वाले थे। इमरान को लगा कि कदाचित मोदी 2014 की तरह दक्षिण एशिया क्षेत्रीय सहयोग संगठन (दक्षेश-SAARC) के राष्ट्राध्यक्षों को अपने शपथ ग्रहण समारोह में बुलाएँगे और उनका नंबर आ जाएगा, परंतु लीक से हट कर काम करने के आदी मोदी ने ऐसा नहीं करके इमरान के अरमानों पर पानी फेर दिया।

इमरान खान ने सोचा भी नहीं होगा कि जिस मोदी से एक अदद मुलाक़ात के लिए वे तड़प रहे हैं, उनसे भविष्य में होने वाली संभावित किसी भी मुलाक़ात के दरवाजे बंद करने के लिए मोदी ही उन्हें मजबूर कर देंगे। 11 महीने और 20 दिनों तक मोदी से मिलने की आस संजोए इमरान खान ने आख़िरकार बुधवार को भारत के साथ द्विपक्षीय बातचीत, व्यापारिक और राजनयिक संबंध समाप्त करने की घोषणा की। इमरान की इस घोषणा उन्हें वही लोमड़ी साबित कर दिया, जो अंगूर नहीं तोड़ पाने के बाद ‘अंगूर खट्टे हैं’ कह कर चुपचाल चल दी थी।

इमरान की घोषणा भारत में हास्यास्पद

इमरान खान ने जो घोषणा की, उसमें द्विपक्षीय बातचीत नहीं करने का संकल्प भी शामिल है। अब भला इमरान खान को कौन बताए कि उन्होंने जो द्विपक्षीय बातचीत नहीं करने का निर्णय किया है, भारत उस निर्णय को अप्रत्यक्ष रूप से तीन वर्षों से लागू किए बैठा है। भारत ने पिछले तीन वर्षों से पाकिस्तान की अनेक पेशकशों के बावजूद कोई द्विपक्षीय बातचीत नहीं की है, क्योंकि पाकिस्तान बातचीत के मुद्दे में कश्मीर को शामिल करने की बात करता है, जबकि भारत कहता है कि पहले आतंकवाद का ख़ात्मा करो, फिर बातचीत होगी।

इमरान पूर्वाधिकारियों के ढर्रे पर, मोदी नहीं

इमरान खान अपने पूर्वाधिकारियों के ढर्रे पर पाकिस्तान में शासन कर रहे हैं, जिनका एकमात्र एजेंडा भारत और कश्मीर रहा है। न्यू पाकिस्तान की बात करने वाले इमरान मोदी की तरह लीक से हट कर सोचते, तो कदाचित उनका मोदी से मुलाक़ात का सपना पूरा हो जाता, परंतु शपथ के दिन ही इमरान ने कश्मीर राग आलापा। ऐसा नहीं है कि मोदी ने प्रधानमंत्री बनने के बाद पाकिस्तान के साथ संबंध सुधारने की पहलें नहीं कीं, परंतु मोदी की पहलें अपने पूर्वाधिकारियों की नकल नहीं थी। मोदी ने अपने पहले शपथ ग्रहण समारोह में सार्क राष्ट्राध्यक्षों को बुलाया, जिनमें तत्कालीन पाकिस्तानी प्रधानमंत्री नवाज़ शरीफ शामिल थे। मोदी ने इसके बाद अचानक लाहौर जाकर नवाज़ शरीफ को जन्म दिन की बधाई दी। मोदी का यह अपना तरीका था, परंतु पाकिस्तान के हुक़्मरानों के दिलोंदिमाग पर कश्मीर इस क़दर छाया हुआ है कि जो बातचीत के रास्ते खुलने ही नहीं दे सकता। इमरान ने भी वही ग़लती की। इसीलिए मोदी ने कभी भी इमरान से मुलाक़ात को तवज्जो नहीं दी। इतना ही नहीं, पठानकोट, उरी और पुलवामा हमलों ने मोदी को इस क़दर आहत किया कि वे पूर्ववर्ती सरकारों की तरह रोए-गिड़गिड़ाए नहीं, अपितु उन्होंने सर्जिकल स्ट्राइक और एयर स्ट्राइक करके इसका प्रतिशोध लिया। इमरान को समझना होगा कि भारत का वर्तमान नेतृत्व लकीर का फक़ीर नहीं है।

कंगाल पाकिस्तान की लुटिया डुबाने का काम

इमरान खान ने व्यापारिक संबंध तोड़ने का निर्णय कर कंगाल पाकिस्तान की लुटिया डुबोने का काम किया है। आर्थिक बदहाली के शिकार पाकिस्तान की डूबती नाव में इमरान खान ने एक बड़ा छेद कर दिया है। भारत ने पुलवामा आतंकी हमले के बाद पाकिस्तान से वर्षों पुराना मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) का दर्जा वापस लेकर पाकिस्तान को पहले ही गंभीर आर्थिक चोट पहुँचा दी थी। ऐसे में अब पाकिस्तान ने यदि द्विपक्षीय व्यापारिक संबंध पूरी तरह समाप्त करने की घोषणा की है, तो इसका बुरा प्रभाव उस पर ही पड़ेगा। वह दिन दूर नहीं, जब पाकिस्तान की महंगाई टमाटर की तरह लाल-सुर्ख हो जाएगी, क्योंकि पाकिस्तान के लोग टमाटर के लिए पूरी तरह भारत पर निर्भर हैं। इसके अलावा चीनी, चाय, ऑइल केक, पेट्रोलियम ऑइल, कच्चा कपास, सूती धागे, टायर, रबड़, डाई, रसायन सहित 14 प्रमुख वस्तुओं के लिए भी पाकिस्तान तरस जाएगा, जो भारत से भेजी जाती थीं। दूसरी तरफ भारत में पाकिस्तान से ताजे फल, सीमेंट, ड्राय फूड, बड़े पैमाने पर खनिज व अयस्क, तैयार चमड़ा, अकार्बनिक रसायन, कच्चा कपास, मसाले, ऊन, रबड़ उत्पाद, अल्कोहल पेय, मेडिकल उपकरण, समुद्री सामान, प्लास्टिक और खेल का सामान आता था। ताजे फलों में अमरूद, आम और अनानास पाकिस्तान से आते थे। भारत इतना बड़ा देश है कि इन चीज़ों की व्यवस्था वह अपने दम पर करने में सक्षम है।

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