भारत की ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत : मसूद के ताबूत में मोदी ने लगाई आख़िरी कील, जिनपिंग को टेकने पड़े घुटने

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मनमोहन एक कोशिश कर ‘मौन’ हो गए, पर मोदी ने नहीं मानी हार

पाकिस्तान में खुलेआम घूम रहा मौलाना मसूद अज़हर अब आम पाकिस्तानी नागरिक नहीं, अपितु वैश्विक आतंकवादी है। पूरी दुनिया ने अब जैश ए मोहम्मद (JEM) के मुखिया, 90 के दशक से आतंकवादी गतिविधियों में सक्रिय और भारत में संसद पर हमले से लेकर पुलवामा आतंकी हमले जैसे अनेक हमलों का मास्टरमाइंड मौलाना मसूद अज़हर को आतंकवादी मान लिया है। संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) ने आज यानी बुधवार को मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कर दिया। इसके साथ ही भारत को कूटनीति के मोर्चे पर ऐतिहासिक जीत हासिल हुई। पिछले दस वर्षों से मसूद को आतंकी घोषित कराने के भारत के प्रयासों के पूर्ण होने के साथ ही मसूद के ताबूत में आख़िरी कील लगाने का काम प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों सम्पन्न हुआ।

पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत ने मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने की अपनी मुहीम को जोरदार धार दी। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के यूएनएससी देशों के पाँच स्थायी सदस्यों में से चार सदस्य देशों के साथ मजबूत संबंध रंग लाए और एकमात्र विरोधी सदस्य चीन को घुटने टेकने पर मजबूर होना पड़ा। पुलवामा आतंकी हमले के बाद भारत के साथ-साथ कंधे से कंधा मिला कर चल रहे अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस ने नए सिरे से कोशिश की और बार-बार वीटो लगा रहे चीन पर ऐसा अंतरराष्ट्रीय दबाव बनाने में भारत और नरेन्द्र मोदी सफल रहे, जिसके चलते आज चीन मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित करने के लिए पाँचवीं बार पेश किए गए प्रस्ताव पर वीटो नहीं लगा सका। वह भारत और मोदी के प्रयासों से बने अंतरराष्ट्रीय दबाव के आगे घुटने टेकने पर विवश हो गया।

मौलाना मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के लिए पहली बार भारत ने 2009 में कोशिश की थी, परंतु चीन ने वीटो लगा दिया था। उस समय केन्द्र में डॉ. मनमोहन सिंह के नेतृत्व वाली कांग्रेस नीत यूपीए सरकार थी। इसके बाद मनमोहन सरकार पाँच वर्षों तक मौन रही, परंतु मोदी ने 2014 में सत्ता संभाली और 2016 में भारत ने अमेरिका, ब्रिटेन और फ्रांस के साथ मिल कर यूएनएससी की 1267 अलकायदा प्रतिबंध परिषद् के समक्ष दूसरी बार प्रस्ताव रखा। चीन ने फिर टांग अड़ाई और मसूद बच गया। 2017 में मोदी सरकार ने तीसरी बार प्रस्ताव रखा। चीन ने वीटो कर अपने मित्र पाकिस्तान को अंतरराष्ट्रीय किरकिरी से बचा लिया। इसके बाद पुलवामा आतंकी हमले के अगले महीने ही मार्च-2019 में अमेरिका, फ्रांस और ब्रिटेन ने मसूद पर प्रतिबंध लगाने का प्रस्ताव रखा। इस बार भी चीन ने वीटो लगा कर इसे नाकाम कर दिया।

मोदी सरकार ने तीन बार मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने में मिली विफलता के बावजूद हार नहीं मानी और चीन के अड़ंगे को दूर करने के लिए ऐसी कूटनीति अपनाई कि चीन चौतरफा चित्त हो गया। भारत में अनेक आतंकवादी हमलों के जिम्मेदार मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित कराने के लिए भारत ने एड़ी-चोटी का ज़ोर लगा दिया, परंतु चीन ने हर बार संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) में वीटो कर मसूद को बचा लिया। यहीं मोदी की कूटनीति रंग लाई और आज मसूद वैश्विक आतंकी घोषित हो गया। जो लोग मोदी के विदेशी दौरों की आलोचना करते हैं, उन्हें यह बात विशेष रूप से समझ में आ गई होगी कि मसूद पर आज यदि चीन का रुख बदला है, तो वह भारत की ओर से चीन पर लाए गए अंतरराष्ट्रीय दबाव के कारण बदला है। ये अंतरराष्ट्रीय दबाव यूँ ही नहीं आया। मोदी ने अंतरराष्ट्रीय बिरादरी में शक्तिशाली देशों के साथ ऐसे संबंध स्थापित किए, जिनके कारण पुलवामा आतंकी हमले के बाद फ्रांस, ब्रिटेन और अमेरिका जैसे देश मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने की ज़िद पर आ गए। इधर मोदी और उनकी सरकार ने चीन पर भी लगातार दबाव बनाया, जिसके चलते चीन को अपना रुख बदलना पड़ा। भारत ने चीन को अच्छी तरह समझा दिया कि यदि वह मसूद पर रुख नहीं बदलेगा, तो पूरी दुनिया में उसकी छवि आतंकवाद समर्थक देश के रूप में बनेगी। मोदी की इस कूटनीतिक चाल में चीन और राष्ट्रपति शी जिनपिंग को घबरा कर अपनी जिद छोड़नी पड़ी।

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