मोदी के शिकंजे से ब्लैक मनी के लिए कुख्यात इस बैंक का धंधा हुआ मंदा

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 7 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। मोदी सरकार ने दूसरी बार सत्ता में आने के बाद एक तरफ इनकम टैक्स डिपार्टमेंट सहित विभिन्न सरकारी महकमों में सफेद हाथी की तरह पल रहे और भ्रष्टाचार के मामलों में लिप्त उच्च अधिकारियों पर चाबुक चलाया। इसके साथ ही कुछ राजनीतिक दिग्गजों पर भी शिकंजा कसा। अब स्विस बैंक में अकाउंट रखने वालों का भी ब्यौरा सरकार को मिल गया है। इसका सीधा अर्थ है कि अब मोदी सरकार का डंडा काला धन जुटाने वालों पर भी चलने वाला है।

उल्लेखनीय है कि स्विटजरलैंड के संघीय कर प्रशासन यानी फेडरल टैक्स एडमिनिस्ट्रेशन (FTA) ने 75 देशों को उनके नागरिकों के स्विटजरलैंड में उपलब्ध लगभग 3.1 मिलियन यानी लगभग 31 लाख खातों का ब्यौरा उपलब्ध कराया है। इनमें भारत भी शामिल है। एफटीए ने एईओआई व्यवस्था के तहत इन देशों को यह ब्यौरा उपलब्ध कराया है। इसलिये यह देश इन खातों के नाम, पते, उनके पैन नंबर, उनके वित्तीय संस्थान, खाते में उपलब्ध राशि और पूँजीगत आय आदि का खुलासा नहीं कर सकते हैं। एफटीए ने स्विटजरलैंड में विविध बैंकों, ट्रस्टों और बीमा कंपनियों सहित लगभग 7,500 संस्थानों से इन 75 देशों के नागरिकों के खातों का ब्यौरा जुटाया है और इन देशों को एईओआई व्यवस्था के तहत वैश्विक मानदंडों के अंतर्गत यह ब्यौरा उपलब्ध कराया है। यह वो देश हैं जिन्होंने गोपनीयता और डेटा सुरक्षा संबंधी अंतर्राष्ट्रीय अनिवार्यताओं को पूरा किया है। एफटीए ने यह भी खुलासा नहीं किया है कि भारत को दी गई पहली खेप में कितने अकाउंट्स का ब्यौरा दिया गया है। एफटीए के अनुसार दूसरी खेप सितंबर-2020 में उपलब्ध कराई जाएगी।

काले धन के कुबेरों पर चलेगा मोदी सरकार का डंडा

बताया जाता है कि यह ब्यौरा प्राप्त होने के बाद अब सरकार इस बात की तस्दीक करेगी कि इन अकाउंट्स और उनमें उपलब्ध राशि के बारे में इन खातेदारों ने अपने रिटर्न में सही जानकारी दी है या नहीं ? जिन खातेदारों ने यह जानकारी नहीं दी होगी, उनके विरुद्ध बेहिसाबी धन रखने का मामला दर्ज करके कानूनी कार्यवाही की जाएगी। कई अधिकारियों ने नाम जाहिर नहीं करने की शर्त पर सिर्फ इतना खुलासा किया है कि इन खातेदारों में अधिकांशतः उद्योगपति हैं। इसके अलावा कुछ प्रवासी भारतीय (NRI) भी शामिल हैं, जो दक्षिण-पूर्व एशियाई देशों अमेरिका और ब्रिटेन के साथ-साथ कुछ अफ्रीकी और दक्षिण अमेरिकी देशों में बस चुके हैं।

12 देशों को नहीं दी गई खातेदारों की जानकारी

स्विटजरलैंड में सूचना के स्वतः या स्वचालित आदान-प्रदान (एईओआई) की बहुपक्षीय व्यवस्था सर्वप्रथम जनवरी 2017 में की गई है। आर्थिक सहयोग एवं विकास संगठन का वैश्विक मंच इस एईओआई के क्रियान्वयन की समीक्षा करता है। इस व्यवस्था के तहत स्विटजरलैंड ने सितंबर-2018 में 36 देशों को पहली बार सूचना का आदान-प्रदान किया था। अब यह दूसरी बार है, जब एफटीए ने एईओआई व्यवस्था के तहत के 75 देशों के साथ सूचना का आदान-प्रदान किया है, परंतु इनमें से 63 देशों के साथ आदान-प्रदान किया गया है, जबकि 12 देशों से स्विटजरलैंड को सूचना देने के लिये तो कहा गया है, परंतु उन्हें सूचना इसलिये नहीं भेजी गई है, क्योंकि वे एईओआई व्यवस्था के तहत गोपनीयता और डेटा सुरक्षा सम्बंधी अंतर्राष्ट्रीय अनिवार्यताओं को पूरा करने में विफल रहे हैं। यह देश हैं बेलीज, बुल्गारिया, कोस्टा रिका, कुरासाओ, मोंटेसेराट, रोमानिया, सेंट विंसेंट, ग्रेनेडाइंस और साइप्रस। इसके अलावा बरमूडा, ब्रिटिश वर्जिन आइलैंड, केमैन आईलैंड, तुर्क्स एंड कैकोज आईलैंड ऐसे देश हैं, जिन्होंने सूचना नहीं माँगी है। इसलिये उन्हें कोई सूचना नहीं भेजी गई है। अब अगले साल सितंबर 2020 में एफटीए की ओर से 90 देशों के साथ सूचना साझा की जाएगी।

इस प्रकार प्राप्त ब्यौरे के आधार पर अब मोदी सरकार स्विटजरलैंड के विविध बैंकों, ट्रस्टों और बीमा कंपनियों सहित विभिन्न वित्तीय संस्थानों में खाता रखने वाले भारतीय नागरिकों के रिटर्न में दी गई जानकारियों को खँगालेगी और जिन लोगों ने स्विस अकाउंट्स की सही जानकारी उपलब्ध नहीं कराई होगी, ऐसे काला धन एकत्र करने वालों पर आगामी दिनों में मोदी सरकार का डंडा बरसने वाला है। एक अनुमान के तहत 2020 में ऐसे लोगों के विरुद्ध कार्यवाही की जा सकती है।

मोदी सरकार आने के बाद स्विस बैंकों का धंधा हुआ मंदा

सूचना यह भी है कि 2014 में केन्द्र में मोदी सरकार बनने से पहले तक स्विस बैंकों में भारतीयों का जमा काला धन खरबों डॉलर था, जिसमें मोदी सरकार के गठन के बाद निरंतर कमी आई है। यह दर्शाता है कि काला धन जुटाने वालों में मोदी सरकार का कितना खौफ है। दूसरी नज़र से देखें तो स्विस बैंकों का धंधा भी मंदा हो गया है। गत जून में आई जानकारी के अनुसार 2018 में स्विस बैंकों में जमा भारतीयों का पैसा लगभग 6 प्रतिशत घट कर 95.5 करोड़ स्विस फ्रैंक यानी लगभग 6,757 करोड़ रुपये रह गया है। इससे पहले 1995 में यह आँकड़ा लगभग 72.3 करोड़ स्विस फ्रैंक था। स्विटजरलैंड ने 1987 से आँकड़ों को सार्वजनिक करने की शुरुआत की है। 2016 में यह आँकड़ा सबसे निचले स्तर पर 67.5 करोड़ स्विस फ्रैंक था। हालाँकि यह सारा पैसा काला धन है, ऐसा नहीं कहा जा सकता। इसमें से काला धन कितना है, इसकी कोई जानकारी नहीं दी गई है।

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