भारत वर्ष 2070 तक शून्‍य कार्बन उत्‍सर्जन का लक्ष्‍य हासिल कर लेगा

Written by

भारत वर्ष 2070 तक शून्य Carbon उत्सर्जन का लक्ष्य हासिल कर लेगा। वर्ष 2030 तक कुल अनुमानित carbon Emission में से 1 billion tons की कमी की जायेगी। वर्ष 2030 तक अर्थव्यवस्था की आर्थिक गतिविधियों से कार्बन उत्सर्जन में 45 प्रतिशत से अधिक की कमी लाने का लक्ष्य है। Britain के ग्लास्गो में कॉप-26 शिखर सम्मेलन में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने राष्ट्रीय वक्तव्य प्रस्तुत करते हुए कहा कि भारत वर्ष 2030 तक गैर जीवाश्म ऊर्जा क्षमता पांच सौ गीगा वॉट कर देगा और अपनी 50 प्रतिशत ऊर्जा आवश्यकताओं की पूर्ति नवीकरणीय ऊर्जा से करेगा।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा कि विश्व की कुल जनसंख्या का 17 प्रतिशत भारत में है और भारत का कार्बन उत्सर्जन केवल पांच प्रतिशत है। आज पूरा विश्व स्वीकार करता है कि केवल भारत ऐसी प्रमुख अर्थव्यवस्था है जिसने पेरिस जलवायु समझौते की मूल भावना का अनुपालन किया है। प्रधानमंत्री ने कहा कि ऐसे में जब भारत ने नई प्रतिबद्धता और ऊर्जा के साथ आगे बढ़ने का संकल्प लिया है, जलवायु वित्त और कम लागत की प्रौद्योगिकी का हस्तांतरण आज पहले से कहीं अधिक महत्वपूर्ण हो गया है। उन्होंने कहा कि भारत केवल कुल कार्बन उत्सर्जन के पांच प्रतिशत उत्सर्जन के लिए उत्तरदायी है और उसने जलवायु परिवर्तन को अपनी नीतियों के केन्द्र बिन्दु में रखा है।

जलवायु वित्त की चर्चा करते हुए प्रधानमंत्री ने उन देशों पर दबाव बनाने की जरूरत बतायी, जो जलवायु वित्त की अपनी प्रतिबद्धता पूरी करने में विफल रहे हैं। उन्होंने कहा कि विकसित देशों को जितनी जल्दी संभव हो सके दस खरब डॉलर का जलवायु वित्त सुनिश्चित करना होगा। उन्होंने जलवायु परिवर्तन की रोकथाम के लिए इस वित्तीय प्रतिबद्धता पर लगातार नजर रखने पर भी जोर दिया।

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विवेकपूर्ण उपभोग को समय की जरूरत बताया। उन्होंने कहा कि इससे Agriculture, Fisheries, Housing, Hospitality, Tourism, Water Management और Energy management में क्रांतिकारी बदलाव संभव होगा। उन्होंने पर्यावरण अनुकूल जीवनशैली को वैश्विक मिशन बनाने का आह्वान किया।

प्रधानमंत्री मोदी ने कॉप26 शिखर सम्मेलन से अलग ब्रिटेन के Prime Minister Boris Johnson से बातचीत की। दोनों नेताओं ने 2030 की जलवायु कार्य योजना के क्रियान्वयन की समीक्षा की। दोनों नेताओं ने व्यापार साझेदारी की प्रगति पर संतोष व्यक्त किया।

Foreign Secretary Harsh Vardhan श्रृंगला ने ग्लास्गो में संवाददातों को बताया कि दोनों नेताओं ने अफगानिस्तान, आतंकवाद से निपटने, हिंद- प्रशांत क्षेत्र, आपूर्ति श्रृंखला समायोजन और कोविड महामारी के बाद वैश्विक अर्थव्यवस्था को पटरी पर लाने सहित विभिन्न क्षेत्रीय और वैश्विक चुनौतियों पर भी विचार-विमर्श किया। विदेश सचिव ने बताया कि प्रधानमंत्री मोदी ने Climate finance, technology, innovation and green hydrogen पर ब्रिटेन के साथ मिलकर काम करने की प्रतिबद्धता दोहराई। ब्रिटेन के प्रधानमंत्री ने भारत आने का प्रधानमंत्री मोदी का निमंत्रण स्वीकार कर लिया। उन्होंने कहा कि परिस्थितियों के अनुकूल होते ही वे भारत यात्रा की योजना बनाएंगे।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares