भारत अब पानी (समुद्र) के अंदर से भी कर सकता है परमाणु हमला

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 29 नवंबर, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी (PM NARENDRA MODI) के नेतृत्व वाली केन्द्र सरकार भारतीय सेना की तीनों शाखाओं थलसेना (INDIAN ARMY), वायुसेना (INDIAN AIR FORCE) और नौसेना (INDIAN NAVY) को अत्याधुनिक हथियारों व अन्य साजो-सामान से सुसज्ज बनाने में जुटी है। थलसेना के लिये रूस से एस-400 एयर डिफेंस मिसाइल सिस्टम (S-400 AIR DEFENSE MISSILE SYSTEM) खरीदा गया है, तो स्वीडिश बोफोर्स तोप (SWEDISH BOFORS CANNON) के समकक्ष स्वदेशी धनुष तोप (INDIGENOUS DHANUSH CANNON) को आर्टिलरी विंग (ARTILLERY WING) में शामिल किया गया है। इसी प्रकार वायुसेना के लिये फ्रांस के फाइटर जेट राफेल (FIGHTER JET RAFAEL) और अमेरिकी लड़ाकू हेलीकॉप्टर अपाचे (US FIGHTER HELICOPTER APACHE) खरीदे गये हैं। दूसरी ओर नौसेना को अत्याधुनिक बनाने के लिये भी कदम उठाये जा रहे हैं। इन्हीं कदमों के तहत इसी साल मई में स्कॉर्पिन सीरीज़ (SCORPENE CLASS SUBMARINE) की चौथी पनडुब्बी वेला (SUBMARINE VELA) लॉन्च की है, जो फ्रांस के साथ मिलकर बनाई गई है। इसके अलावा आईएनएस वागीर (INS WAGIR) और आईएनएस वागशीर (INS VAGASHIR) की मैन्युफैक्चरिंग का काम भी चल रहा है, जो शीघ्र ही नौसेना के बेड़े में शामिल होंगे। वेला के बाद आईएनएस खंडेरी (INS KHANDERI) और आईएनएस करंज (INS KARANJ) पनडुब्बियाँ नौसेना के बेड़े में शामिल हो चुकी हैं।

नौसेना की परमाणु हमले की ताकत बढ़ा रहा है भारत

जहाँ तक नेवी की परमाणु पनडुब्बी यानी न्यूक्लियर सबमरीन (NUCLEAR SUBMARINE) की बात है तो अब सरकार इस पर भी पूरी गंभीरता से काम कर रही है। इन्हीं प्रयासों का प्रतिफल है कि पिछले साल दिसंबर में आईएनएस अरिहंत (INS ARIHANT) के रूप में भारतीय नौसेना को पहली न्यूक्लियर सबमरीन प्राप्त हुई थी। इसे प्राप्त करते ही भारत अमेरिका, चीन, फ्रांस और रूस जैसे देशों के समकक्ष बन गया था। चीन जिस तरह से साउथ चाइना सी (SOUTH CHINA SEA) के बाद हिंद महासागर में अपनी ताकत बढ़ाने में जुटा है, उसे देखते हुए भारत को भी नेवी की ताकत में इजाफा करने की जरूरत पड़ रही है। इसी तैयारी के भागरूप अब भारत एक-दो दिन में पूर्वी तट पर बंगाल की खाड़ी में अपनी सबसे शक्तिशाली परमाणु प्रतिरोधक मिसाइल का परीक्षण करने जा रहा है। इस परीक्षण से भारत परमाणु हमले का पानी के अंदर से जवाब दे सकेगा।

K-4 परमाणु मिसाइल का परीक्षण, समुद्र में जारी हुआ अलर्ट

पनडुब्बी से लॉन्च होने वाली K-4 परमाणु मिसाइल का परीक्षण करने की तैयारी की जा रही है, जो 3,500 कि.मी. तक मार करने की क्षमता रखती है। यह मिसाइल आईएनएस अरिहंत पनडुब्बी श्रेणी के लिये डिजाइन की गई है। डिफेंस रिसर्च एंड डेवलपमेंट ऑर्गेनाइजेशन (DEFENSE RESEARCH AND DEVELOPMENT ORGANIZATION) के डेवलपमेंटल ट्रायल के तौर पर इस परमाणु मिसाइल का परीक्षण अंडर वॉटर पंटून (UNDER WATER PANTOON) से किया जाएगा। देश की दूसरी परमाणु पनडुब्बी आईएनएस अरिघात (INS ARIGHAT) का काम भी पूरा होने वाला है और यह भी शीघ्र ही भारतीय नौसेना का हिस्सा होगी। इस मिसाइल के ट्रायल की तैयारी के लिये समुद्री जहाजों को पहले से ही जानकारी दे दी गई है। इसके लिये एयरमैन (AIRMAN) को हिंद महा सागर तक फैले लगभग 3,000 कि.मी. लंबे उड़ान मार्ग को बंद करने का नोटिस दिया गया है। K-4 परमाणु मिसाइल की बात की जाए तो इसे गेम चेंजर के रूप में देखा जाता है, जो भारत को परमाणु हमला होने पर जवाबी हमले का विकल्प देती है।

K-5 परमाणु मिसाइल पर भी काम जारी

आईएनएस अरिहंत में एक ऑपरेशनल SLBM (K15) है, परंतु इसकी मारक क्षमता 750 कि.मी. तक ही है, जो जवाबी विकल्प को सीमित करती है, परंतु K-4 इस दायरे को बढ़ा कर 3.500 कि.मी. तक ले जाती है। भारत के पास ब्रह्मोस (BRAHMOS) मिसाइल की भी ताकत मौजूद है, जिन्हें भारत ने रूस के साथ मिलकर बनाया है, यह मिसाइल थलसेना और नौसेना दोनों के लिये काम करती है। भारतीय वायुसेना के पास मिराज-2000 लड़ाकू विमान हैं, जो परमाणु हथियारों को ले जाने में सक्षम हैं, परंतु पानी के नीचे से लॉन्च की जाने वाली परमाणु मिसाइल को जवाबी हमले का सबसे ताकतवर विकल्प माना जाता है। इसीलिये K-4 के बाद डीआरडीओ (DRDO) ने K-5 पर भी काम शुरू कर दिया है, जो 5,000 कि.मी. तक मार करने की क्षमता से लैस SLBM है। यह न्यूक्लियर मिसाइल पावर्ड पनडुब्बियों पर भी फिट की जाएगी। के-5 की सफलता के बाद भारत, जमीन, हवा और पानी तीनों स्थानों से जवाबी परमाणु हमले के लिये सक्षम हो जाएगा।

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