हिन्द महासागर में चीन की चौधराहट को इस तरह चित्त करेगा भारत

रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद 30 दिसंबर, 2019 युवाPRESS। पिछले कई दशक से चीन भारत की सीमा पर घुसपैठ करने की कोशिशें करता आ रहा है। इन दिनों हिन्द महासागर की ओर चीन के बढ़ते कदम भारत के लिए चुनौतिपूर्ण साबित हो सकते हैं। इन्हीं चुनौतियों से निपटने के लिए भारतीय नौसेना (Indian Navy) ने अपनी सीमाएँ सुरक्षा दुरुस्त करने की तैयीरियाँ शुरू कर दी है। दरअसल भारतीय नौसेना पानी के अंदर परमाणु हमले करने वाली पनडुब्बी का बेड़ा तैयार करने जा रही है।

इसी संबंध में रक्षा स्टैंडिंग कमेटी (Standing Committee on Defense) ने शीतकालीन सत्र में संसद में एक रिपोर्ट पेश की है, जिसके अनुसार 18 पारंपरिक और 6 परमाणु हमले में सक्षम एसएसएन पनडुब्बियों (Submarines) के निर्माण की तैयारी करने का प्रस्ताव रखा गया है। इसकी आवश्यकता इसलिए पड़ी, क्योंकि चीन भारत की जस सीमा पर एक परमाणु दागने वाली पनडुब्बी पहले ही भेज चुका है। ऐसे में भारतीय नौसेना ने अरिहंत क्लास एसएसबीएन (SSBN) के साथ मिलकर परमाणु हमला करने वाली 6 पनडुब्बी बनाने की योजना तैयार की है, ये सभी पनडुब्बियाँ परमाणु मिसाइलों से लैस होंगी।

वर्तमान में भारतीय नौसेना के पास रूसी मूल की किलो क्लास, जर्मन मूल की एचडीडब्‍लू क्लास और पारंपरिक डोमेन में नवीनतम फ्रेंच स्कॉर्पीन क्लास की पनडुब्बियां हैं, जबकि परमाणु सेक्शन में भारत ने रूस से एक आईएनएस चक्र (अकुला क्लास) लीज पर ले रखी है, परंतु ये सभी 6 पनडुब्बियाँ भारत में ही एक निजी क्षेत्र के सहयोग से बनाई जा रही हैं, जो पूरी तरह स्वदेशी होंगी।

स्टैंडिंग कमेटी की रिपोर्ट के अनुसार नौसेना में मौजूद अब तक की सभी पनडुब्बियाँ लगभग 17 से 31 वर्ष पुरानी हैं, जिसमें फ्लीट (Fleet) की 13 परंपरागत पनडुब्बियाँ हैं। इतना ही नहीं, पिछले 15 वर्षों में नौसेना में केवल 2 नई पारंपरिक पनडुब्बियाँ शामिल की गईं हैं, जिसमें एक स्कॉर्पीन श्रेणी का जहाज आईएनएस कलवरी और दूसरा आईएनएस खंडेरी है।

इसके अतिरिक्त भारतीय नौसेना अपने प्रोजेक्ट 75-इंडिया के तहत 6 नई पनडुब्बियों के निर्माण की योजना पर भी कार्य कर रही है, जिसका निर्माण विदेशी मूल की उपकरण निर्माताओं के साथ मिलकर किया जाएगा। इन सभी 6 पारंपरिक पनडुब्बी का निर्माण परियोजनाएँ, रणनीतिक साझेदारी नीति के तहत शुरू करने जा रहा है।

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