चीन-पाकिस्तान के ‘THUNDER’ को पल भर में ‘ठंडा’ कर देगा भारत का ‘तेजस’

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 19 सितंबर 2019 (युवाPRESS)। देश के रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने गुरुवार को संपूर्ण स्वदेशी लड़ाकू विमान तेजस में उड़ान भरने का लुत्फ उठाया और अपना अनुभव शेयर करते हुए कहा कि उन्हें तेजस में बैठने का अवसर मिला, जो उनके लिये अविस्मरणीय सिद्ध हुआ। उन्होंने 30 मिनट तक उड़ान भरने के दौरान पायलट से इसके बारे में जानकारी भी प्राप्त की। उन्होंने कहा कि तेजस भारत का ऐसा दमदार निर्माण है, जिससे पड़ोसी देश पाकिस्तान और चीन भी घबराते हैं।

कैसे बना ताकतवर तेजस ?

तेजस का निर्माण भारत की हिन्दुस्तान एयरोनॉटिक्स लिमिटेड (HAL) कंपनी ने किया है, जो भारत सरकार की सार्वजनिक कंपनी है और हवाई संयंत्र और रक्षा यानी सैन्य साजो-सामान बनाने का काम करती है। इसका मुख्यालय बेंगलुरु में है, जिसमें 2014 के अनुसार 32 हजार से अधिक कर्मचारी काम करते हैं। दिसंबर 1940 में तत्कालीन मैसूर राज्य के असाधारण दूरदृष्टा उद्यमी शेठ वालचंद हीराचंद ने इस कंपनी की स्थापना की थी।

इस कंपनी ने लाइट कॉम्बैट एयरक्राफ्ट (LCA) यानी हल्के युद्धक विमान प्रोजेक्ट के तहत हल्के और मल्टीरोल लड़ाकू विमान तेजस का निर्माण किया है। कंपनी ने 7 हजार करोड़ रुपये की लागत से तेजस का निर्माण किया है। इसके निर्माण में कंपनी ने 42 प्रतिशत कार्बन फाइबर, 43 प्रतिशत एल्युमीनियम एलॉय और टाइटेनियम का उपयोग किया है।

तेजस सिंगल सीटर पायलट वाला विमान है, परंतु इसका ट्रेनर वेरिएंट 2 सीटर है, जिसमें गुरुवार रक्षा मंत्री राजनाथ सिंह ने उड़ान भरी। इससे पहले फरवरी-2019 में बेंगलुरु में आयोजित हुए एयरो इंडिया-2019 में भारतीय सेना प्रमुख जनरल बिपिन रावत भी इसमें उड़ान का आनंद ले चुके हैं। इसके अलावा भारत सरकार के प्रधान वैज्ञानिक सलाहकार प्रो. पीएस राघवन भी तेजस एयरक्राफ्ट में उड़ान भर चुके हैं।

1980 में तेजस के निर्माण की तैयारी शुरू की गई थी। लगभग 2 दशकों की तैयारी और विकास के बाद हल्का तेजस लड़ाकू विमान बनकर तैयार हुआ। 4 जनवरी-2001 को तेजस ने पहली उड़ान भरी थी।

तत्कालीन प्रधानमंत्री अटल बिहारी वाजपेयी ने इसे ‘तेजस’ नाम दिया था। यह संस्कृत भाषा का शब्द है, जिसका अर्थ होता है अत्याधिक ताकतवर ऊर्जा।

क्या हैं संपूर्ण स्वदेशी तेजस की खासियतें ?

तेजस लड़ाकू विमान एक बार में 54 हजार फीट की ऊँचाई तक उड़ान भर सकता है।

भारत का तेजस एयरक्राफ्ट 2,222 किलोमीटर प्रति घण्टे की गति से उड़ान भरने में सक्षम है।

तेजस विमान 3,000 किलोमीटर की दूरी तक एक बार में उड़ान भर सकता है।

तेजस विमान की लंबाई 43.4 फीट है, जबकि इसकी ऊँचाई 14.9 फीट है। तेजस का वजन सभी हथियारों से लैस होने के बाद 13,500 किलो होता है।

तेजस हवा से हवा में और हवा से ज़मीन पर मिसाइल दागने में सक्षम है। इसके अलावा इसमें एंटी शिप मिसाइल, लेज़र गाइडेड बम, रॉकेट तथा वेपन्स भी लगाये जा सकते हैं।

तेजस में हवा से हवा में मार करने वाली 6 प्रकार की मिसाइलें लगाई जा सकती हैं, इनमें डर्बी, पाइथन-5, आर-73, अस्त्र, असराम तथा मेटियोर शामिल हैं।

हवा से ज़मीन पर मार करने वाली मिसाइलें यानी ब्रह्मोस-एनजी, डीआरडीओ एंटी रेडियेशन मिसाइल और ब्रह्मोस-एनजी एंटी शिप मिसाइल भी तैनात की जा सकती है।

इसी प्रकार इसमें लेज़र गाइडेड बम, ग्लाइड बम और क्लस्टर वेपंस भी लगाये जा सकते हैं।

भारत को क्यों पड़ी तेजस बनाने की जरूरत ?

पिछले 45 सालों से भारतीय वायुसेना की ताकत रहे रूसी मिग-21 और मिग-27 लड़ाकू विमान अब काफी पुराने हो चुके हैं। इसी वजह से 45 सालों में लगभग 465 मिग विमान क्रैश हो चुके हैं, वो भी दुश्मन से लड़े बिना। जंग के मैदान में तो मात्र 11 मिग विमान ही गिरे हैं। मिग विमानों के उड़ान भरने के बाद ज़मीन पर आ गिरने से वायुसेना के लगभग 43 जवान भी शहीद हो चुके हैं। इसी कारण अब इन विमानों को ‘फ्लाइंग कॉफिन’ भी कहा जाने लगा है। इनके स्थान पर वायुसेना को नये विमानों की जरूरत थी।

भारतीय वायुसेना के लिये क्यों खास है तेजस ?

भारतीय वायुसेना के पास 33 स्क्वॉड्रन हैं। प्रत्येक स्क्वॉड्रन में 16 से 18 फाइटर जेट होते हैं।

इन 33 में से 11 स्क्वॉड्रन में अभी मिग-21 और मिग-27 फाइटर जेट हैं। इनमें भी मात्र 60 प्रतिशत ही ऑपरेशन के लिये तैयार हैं।

विशेषज्ञों के अनुसार चीन और पाकिस्तान के खतरे को देखते हुए भारतीय वायुसेना को 45 स्क्वॉड्रन की आवश्यकता है।

तेजस 34वीं स्क्वॉड्रन है और फ्रांस से राफेल मिलने के बाद वह 35वीं स्क्वॉड्रन बनेंगे।

तेजस 2001 से लेकर अभी तक 3500 उड़ानें भर चुका है। 3 साल पहले इसे भारतीय वायुसेना में शामिल किया गया है।

तेजस से क्यों घबराते हैं चीन-पाकिस्तान ?

चीन और पाकिस्तान ने मिलकर थंडरबर्ड लड़ाकू विमान का उत्पादन किया है। यह थंडरबर्ड दरअसल मिग-21 में ही कुछ सुधार करके बनाया गया है। जबकि भारत का तेजस चौथी पीढ़ी का लड़ाकू विमान है। जब बहरीन में आयोजित हुए इंटरनेशनल एयर शो में भारत ने तेजस को प्रदर्शनी में रखने की बात की तो चीन और पाकिस्तान ने अपने थंडरबर्ड को प्रदर्शनी से हटा लिया था। यह दर्शाता है कि भारत का तेजस उनके थंडरबर्ड से कई गुना अधिक ताकतवर है।

इतना ही नहीं, कई देशों ने भारतीय तेजस विमान की माँग की है, इसलिए भारत इसे एक्सपोर्ट करने की भी तैयारी कर रहा है।

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