MODIPLOMACY की एक और ‘अभिनंदन’ जीत : कुलभूषण की फांसी पर ICJ ने लगाई रोक

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* प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, “जाधव को न्याय मिलेगा”

अहमदाबाद, 17 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। भारत ने पाकिस्तान पर एक और बड़ी जीत हासिल की है। इस बार भारत के सामने पाकिस्तान तीन खाने चित्त हो गया। अंतर्राष्ट्रीय न्याय अदालत (ICJ) ने पाकिस्तान के कान पकड़कर मरोड़ दिये और भारतीय नागरिक कुलभूषण जाधव के मामले में पाकिस्तान को एक नहीं बल्कि तीन-तीन झटके दिये। आईसीजे ने कुलभूषण जाधव को फाँसी देने के पाकिस्तान के फैसले पर रोक लगा दी। पाकिस्तान को वियना संधि के उल्लंघन का भी दोषी करार दिया और पाकिस्तान में स्थित भारत के राजनयिक अधिकारियों को जाधव से मिलने की इजाजत भी दी। इस तरह से पाकिस्तान की अंतर्राष्ट्रीय समुदाय के बीच एक बार फिर भारी किरकिरी हो गई है।

यह है पूरा मामला

दरअसल पाकिस्तानी एजेंसियों ने 3 मार्च-2016 को ईरान से भारतीय नौसेना के पूर्व अधिकारी कुलभूषण जाधव का अपहरण किया था, जहाँ वह अपने व्यापार के सिलसिले में गये थे। जबकि पाकिस्तान ने दावा किया था कि उसने कुलभूषण को बलूचिस्तान से गिरफ्तार किया है। पाकिस्तान ने जाधव पर भारत के लिये जासूसी करने का भी आरोप लगाया था। पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव का अपहरण किये जाने के 22 दिन बाद 25 मार्च-2016 को एक संवाददाता सम्मेलन के माध्यम से भारत को जानकारी दी थी। भारत ने अंतर्राष्ट्रीय कूटनीतिक नियमों के अनुसार उसी दिन जाधव से राजनयिक संपर्क करने देने की पाकिस्तान से गुहार लगाई, परंतु उसने जाधव से मिलने की अनुमति नहीं दी। मुंबई के पवई क्षेत्र में रहनेवाले 49 वर्षीय जाधव के मामले की सुनवाई भी सिविल कोर्ट में करने के बजाय पाकिस्तान ने सैन्य कोर्ट में की और एक अस्पष्ट सुनवाई के बाद 10 अप्रैल-2017 को जाधव को फाँसी की सजा सुना दी।

भारत ने आईसीजे का दरवाजा खटखटाया

जब पाकिस्तान ने जाधव को रिहा करने की भारत की अपीलों को बार-बार खारिज कर दिया तो भारत ने वाणिज्य दूतावास सम्बंधों पर हुए वियेना समझौते को आधार बनाकर 8 मई-2017 को हेग में स्थित अंतर्राष्ट्रीय न्याय अदालत (आईसीजे) का दरवाजा खटखटाया। भारत ने कुलभूषण जाधव पर लगाये गये जासूसी के आरोपों को बेबुनियाद बताते हुए पाकिस्तान को ही आईसीजे के कठघरे में खड़ा कर दिया और उस पर वियेना समझौते का उल्लंघन करने का आरोप लगा दिया। भारत ने अपनी अपील में अदालत से कहा कि गिरफ्तारी के कई दिनों तक पाकिस्तान ने भारत को सूचना नहीं दी। पाकिस्तान ने आरोपी को उसके अधिकार भी नहीं बताए। भारत ने वैश्विक अदालत को बताया कि पाकिस्तान ने भारत के बार-बार आग्रह करने के बावजूद जाधव को पाकिस्तान में स्थित भारतीय राजनयिकों से संपर्क करने की अनुमति नहीं दी। भारत ने यह भी कहा कि जाधव को मृत्युदंड दिये जाने की सूचना भी भारत को एक प्रेस विज्ञप्ति के माध्यम से मिली।

पाकिस्तान को आईसीजे ने दिये तीन-तीन झटके

वैश्विक अदालत ने पहले झटके में भारत की दमदार दलीलों को मान्य रखते हुए पाकिस्तान के कान मरोड़े और भारत की कुलभूषण जाधव की फाँसी की सजा तत्काल रद्द करने की माँग को मान्य रखा।

अदालत ने भारत की इस दलील को भी स्वीकार किया कि पाकिस्तान ने अंतर्राष्ट्रीय कानून तथा वियना समझौते के नियमों को बेशर्मी से तोड़ा, जिसके तहत आरोपी को विशिष्ट सिविल और राजनीतिक अधिकार दिये जाते हैं।

अंतर्राष्ट्रीय न्याय अदालत के 16 में से 15 जजों ने भारत के पक्ष में फैसला दिया। अभी इस मामले पर दोबारा सुनवाई होनी है, जिसमें अदालत ने पाकिस्तान से उसके फैसले पर पुनर्विचार करने को कहा है।

काउंसलर एक्सेस देनी पड़ेगी

अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट के फैसले के बाद पाकिस्तान को कुलभूषण जाधव को काउंसलर एक्सेस यानी राजनयिक संपर्क करने की अनुमति देनी पड़ेगी। अर्थात् अब भारतीय अधिकारी कुलभूषण से मिल सकेंगे और इसके लिये पाकिस्तान को उन्हें इजाजत देनी पड़ेगी।

वियना समझौते का दोषी पाकिस्तान

अंतर्राष्ट्रीय कोर्ट ने अपने फैसले में पाकिस्तान को वियना कन्वेंशन का उल्लंघन करने का भी दोषी माना। वियना समझौता एक ऐसा अंतर्राष्ट्रीय कानून है जो दो देशों के बीच राजनयिक संबंधों को नियंत्रित करता है। कुलभूषण के मामले में पाकिस्तान ने कुलभूषण जाधव को सजा देने से पहले उसे कोई राजनयिक सहायता प्राप्त नहीं होने दी थी।

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