‘अंतरजाल’ का जंजाल : सोचिए क्या होगा यदि एक दिन के लिए भी NETLESS हो जाए दुनिया ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 4 जुलाई 2019 (YUVAPRESS)। इंटरनेट जिसे हिंदी में ‘अंतरजाल’ कहते हैं। पूरी दुनिया आजकल इसी के जाल में फँसी दिखाई दे रही है। दुनिया का लगभग हर काम इंटरनेट पर निर्भर हो गया है। इंटरनेट से लोगों को काफी सुविधाएँ भी मिल रही हैं, परंतु एक बड़ा सवाल भी पैदा होता है कि जिस तरह से पूरी दुनिया और उसका हर काम इंटरनेट पर निर्भर हो चुका है, वह इंटरनेट यदि बंद हो जाए तो क्या परिणाम सामने आएँगे और कितना बड़ा नुकसान हो सकता है।

कब, कैसे और कहाँ हुआ इंटरनेट का जन्म ?

इंटरनेट जो आजकल विश्व की आधी आबादी इस्तेमाल कर रही है और जो इंटरनेट आजकल लोगों की जरूरत ही नहीं, अपितु आदत बन चुका है, वह इंटरनेट आखिरकार कब, कैसे और कहाँ पैदा हुआ ? इस सवाल का जवाब है कि इंटरनेट का जन्म 1969 में यानी लगभग 50 वर्ष पहले हुआ था। अमेरिका इसका जनक माना जाता है। क्योंकि अमेरिकी रक्षा विभाग के एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी ने चार यूनिवर्सिटीज़ के कंप्यूटरों को नेटवर्किंग से आपस में जोड़कर इसे जन्म दिया था। पहले इसे अर्पानेट (एडवांस्ड रिसर्च प्रोजेक्ट्स एजेंसी नेटवर्क) नाम दिया गया था। अमेरिका में रिसर्च और एजुकेशन को बढ़ावा देने के उद्देश्य से अर्पानेट को जन्म दिया गया था। उस समय इंटरनेट का उपयोग मात्र अमेरिकी मिलिट्री ही कर पाती थी। इसके बाद 1974 में इसका कॉमर्शियल उपयोग किया गया। पहली बार टेलनेट कंपनी ने इसका उपयोग किया। इस कंपनी के उपयोग के बाद ही इसका नाम इंटरनेट पड़ा। जब इसकी शुरुआत हुई तो शुरुआती दौर में इसका उपयोग सूचनाओं के आदान-प्रदान में टीसीपी यानी (ट्रांसमिशन कंट्रोल प्रॉटोकॉल) के रूप में होता था। कुछ समय बाद कंप्यूटर वैज्ञानिक टिम बर्न्स ली ने इंटरनेट पर पहला सफल कम्युनिकेशन किया और 1991 में वर्ल्ड वाइड वेब (WWW) का निर्माण किया। जिसके द्वारा इंटरनेट का उपयोग आसान हो गया। इससे पहले टिम ने मार्च 1989 में इन्फोर्मेशन मैनेजमेंट सिस्टम का एक प्रपोजल तैयार किया था, जिससे पहली बार इंटरनेट पर एचटीटीपी (हाईपरटेक्स्ट ट्रांसफर प्रॉटोकॉल) क्लाइंट का निर्माण हुआ तथा इंटरनेट के व्यापक इस्तेमाल में मदद मिली। टिम ने ही कंप्यूटर प्रोग्राम एचटीएमएल, यूआरएल और एचटीटीपी का भी निर्माण किया।

सर्च इंजन गूगल लॉन्च होने के बाद आई क्रांति

धीरे-धीरे इंटरनेट को सरल बनाने की दिशा में अन्य लोगों ने भी योगदान दिया, जिसमें गूगल का नाम शामिल है। टॉम लिंसन ने 1972 में ई-मेल (इलेक्ट्रोनिक मेल) की शुरुआत की, इसके बाद अमेरिका के नेशनल साइंस फाउंडेशन (एनएसएफ) ने 1985 में एनएसएफ-नेट का निर्माण किया। अर्पानेट की तुलना में नेशनल साइंस फाउंडेशन कई गुना बड़ा नेटवर्क था। यदि गूगल का योगदान देखें तो 1998 में गूगल के लॉन्च होने के बाद मानो इंटरनेट का कल्याण हो गया। गूगल एक सर्च इंजन है। इसने तेजी से दुनिया भर के लोगों को इंटरनेट से कनेक्ट किया। कह सकते हैं कि गूगल के द्वारा आप दुनिया के किसी भी कोने से कोई भी जानकारी एक क्लिक में प्राप्त कर सकते हैं।

आविष्कार के 26 साल बाद भारत आया इंटरनेट

भारत में इंटरनेट की शुरुआत विदेश संचार निगम लिमिटेड (वीएसएनएल) ने की। इंटरनेट के जन्म के 26 साल बाद 15 अगस्त 1995 में भारत में इसकी शुरुआत हुई। वीएसएनएल ने टेलीफोन लाइन के द्वारा भारत के कंप्यूटरों को दुनिया के कंप्यूटरों से जोड़ा और इस तरह भारत में इंटरनेट का पदार्पण हुआ। तीन साल बाद 1998 में अन्य प्राइवेट कंपनियों ने भारत में इंटरनेट प्रोवाइडर के रूप में काम शुरू कर दिया। अब देश में अनेक कंपनियाँ इंटरनेट सेवाएँ उपलब्ध करवा रही हैं। अकेले भारत में इंटरनेट यूजर्स की संख्या 50 करोड़ के आँकड़े को पार कर चुकी है। पूरे विश्व में आधी आबादी इंटरनेट इस्तेमाल कर रही है और यह संख्या तेजी से बढ़ रही है। एक अनुमान के मुताबिक हर पल 10 लोग इंटरनेट से जुड़ रहे हैं। यदि किसी परिवार में 4 सदस्य हैं, तो उनमें से कम से कम 3 सदस्य इंटरनेट इस्तेमाल कर रहे हैं।

सुरक्षा व्यवस्था, व्यापार-व्यवसाय, कम्युनिकेशन सब इंटरनेट के सहारे

अब स्थिति यह हो गई है कि देश की आंतरिक सुरक्षा हो, सामरिक सुरक्षा हो, हवाई सुरक्षा, समुद्री सुरक्षा या अंतरिक्ष सुरक्षा सबकुछ इंटरनेट पर आधारित हो गई है। शिक्षा, व्यापार-व्यवसाय, देश-विदेश का कम्युनिकेशन, हवाई यातायात, रेल यातायात, सड़क यातायात, बैंकिंग सेवा इत्यादि सभी सेवाएँ इंटरनेट पर आधारित हो चुकी हैं। जो काम व्यक्ति करते थे, वह काम अब कंप्यूटर और इंटरनेट के माध्यम से एक क्लिक पर हो जाता है। इंटरनेट से लोगों को सभी क्षेत्रों में विविध प्रकार की सुविधाएँ भी प्राप्त हो रही हैं। बैंकों में पैसा उठाने के लिये पहले कतारों में घण्टों खड़े रहना पड़ता था, परंतु अब डिजिटल पेमेंट की सुविधा से घर बैठे मोबाइल या कंप्यूटर के जरिये इंटरनेट से एप्लीकेशन डाउनलोड करके पैसा किसी के भी खाते में ट्रांसफर कर सकते हैं या ऑनलाइन वस्तुएँ खरीदकर या बेचकर ऑनलाइन पेमेंट कर सकते हैं। बस, ट्रेन या हवाई जहाज की सेवाओं की जानकारी घर बैठे प्राप्त कर सकते हैं और एडवांस में टिकट बुक करवा सकते हैं। फेसबुक, वॉट्सएप, इंस्ट्राग्राम, ट्वीटर आदि सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म से आप देश दुनिया के किसी भी कोने में संपर्क स्थापित कर सकते हैं और बात कर सकते हैं। सुरक्षा के इंतजामात भी इंटरनेट पर आधारित हो गये हैं। रडार सिस्टम हो या मिसाइल सिस्टम सब इंटरनेट के माध्यम से ऑपरेट हो रहे हैं। वीडियो कैमरे के माध्यम से फेस टू फेस कहीं पर भी बातचीत कर सकते हैं। इस प्रकार पूरी दुनिया इस इंटरनेट के जाल में पूरी तरह से फंस चुकी है।

इंटरनेट के फायदे और नुकसान

इंटरनेट के कई फायदे हैं तो कई नुकसान भी हैं। आपको याद होगा 26/11 का मुंबई आतंकी हमला। इसमें पाकिस्तान में बैठे हमलावर आतंकियों के आका टीवी पर दृश्य देखकर मोबाइल पर आतंकवादियों को टिप्स दे रहे थे। इंटरनेट के माध्यम से एक ओर ऑनलाइन बैंकिंग आदि की सुविधा प्राप्त हुई है, वहीं इससे साइबर क्राइम भी बढ़ा है। आपराधिक मानसिकता वाले लोग इंटरनेट की सुविधाओं का दुरुपयोग भी करते हैं और कई प्रकार के आर्थिक व अन्य हिंसात्मक अपराधों व साजिशों को अंजाम देते हैं। इंटरनेट के बंद हो जाने से सुरक्षा के क्षेत्र में इंटरनेट पर आधारित सिस्टम ठप हो जाएगा, ऐसे में अरबों-खरबों की लागत से खरीदी गई सुरक्षा प्रणाली धरी की धरी रह जाएगी और प्रति दिन व्यापार-व्यवसाय में इंटरनेट बैंकिंग के माध्यम से अरबों-खरबों का लेन देन होता है, इंटरनेट सेवा बंद हो जाने पर ऑनलाइन लेन-देन ठप हो जाएगा। इंटरनेट के माध्यम से विदेश में बैठा व्यक्ति भी देश में अपने घर-परिवार और व्यापार-व्यवसाय के स्थल पर नज़र रख सकता है, यह सेवा ठप हो जाने से ऐसा कर पाना भी असंभव हो जाएगा। इस प्रकार इंटरनेट के ठप हो जाने से कई क्षेत्रों में व्यापक नुकसान से अर्थ व्यवस्था चरमरा सकती है।

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