मोदी ने PMO अधिकारी को पद के दुरुपयोग की ‘कुचेष्टा’ पर ऐसे सिखाया सबक

प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में अधिकारियों से बातचीत करते मोदी। (सांकेतिक व फाइल चित्र)

IPL मैच का टिकट चाहने वाले सरकारी बाबू को मिली पदावनति

प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने अपने पद का दुरुपयोग करने वाले एक उच्च पदस्थ अधिकारी को सबक सिखाकर अन्य अधिकारियों के लिये एक मिशाल कायम की है। प्रधानमंत्री ऑफिस (PMO) ने एक अधिकारी की पदोन्नति रद्द करके उसे उसके पिछले स्थान पर वापस भेज दिया यानी कि उस अधिकारी का डिमोशन कर दिया। यह दर्शाता है कि पीएम मोदी भ्रष्टाचार, पद के दुरुपयोग जैसे मुद्दों पर कितने गंभीर और कार्यशील (ACTIVE) हैं। क्योंकि इस अधिकारी के विरुद्ध कार्यवाही करने में पीएमओ ने बिल्कुल भी देरी नहीं की।

दरअसल भारतीय रेल सेवा की याँत्रिक अभियंता शाखा (IRSME) के 1987 बैच के अधिकारी गोपाल कृष्ण गुप्ता को पदोन्नत करके केन्द्रीय प्रति नियुक्ति पर केन्द्र सरकार के नवीन एवं नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय में संयुक्त सचिव के पद पर नियुक्त किया गया था, परंतु इस अधिकारी ने एक ऐसी भूल कर दी, जो उसे भारी पड़ गई और उसका डिमोशन हो गया।

वास्तव में वरिष्ठ केन्द्रीय अधिकारी गोपाल कृष्ण गुप्ता ने पिछले मार्च महीने में दिल्ली एण्ड डिस्ट्रिक्ट क्रिकेट एसोसिएशन (DDCA) के अध्यक्ष और वरिष्ठ पत्रकार रजत शर्मा को फोन करके उनसे 30 मार्च को होने वाले इण्डियन प्रीमियर लीग (IPL) 2019 के एक मैच का कॉम्प्लीमेंट्री पास माँगा था। इस पर डीडीसीए की ओर से कोई जवाब नहीं मिलने पर उन्होंने अपने पद का दुरुपयोग करते हुए अपने स्टाफ के सदस्यों से डीडीसीए के स्टाफ को भी फोन करवाया और उससे भी बात नहीं बनी।

मैच हो गया और गुप्ता को पास नहीं मिला तो गुप्ता ने 3 अप्रैल को रजत शर्मा को एक पत्र लिखकर उन्हें हूल दी कि कम से कम हमें एक-दूसरे के पद का मान रखना चाहिये और उनके पद का मान रखते हुए डीडीसीए को उन्हें जवाब तो देना ही चाहिये था, भले ही वह इनकार में होता।

यह पत्र एक मंच पर सार्वजनिक हो जाने से मामले ने तूल पकड़ लिया और बात पीएमओ तक पहुँच गई, जिससे इस अधिकारी को प्रोन्नति गँवानी पड़ी और किरकिरी झेलनी पड़ी।

पीएमओ में शिकायत पहुँचते ही प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व वाली कैबिनेट की नियुक्ति समिति (ACC) ने गुप्ता के केन्द्रीय प्रति नियुक्ति के कार्यकाल में तत्काल प्रभाव से कटौती कर दी और उन्हें तुरंत उनके कैडर यानी रेलवे विभाग में वापस भेज दिया।

यह मामला अब चर्चा का विषय बना हुआ है और अन्य अधिकारियों के लिये सबक बन गया है। पीएम मोदी ने पद का दुरुपयोग करने वाले अधिकारियों के बीच इस दृष्टांत से कड़ा संदेश पहुँचाने का प्रयास किया है।

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