कोरोना के कहर में IPS officer Arun Bothra के सराहनीय कदम

Written by

Coronavirus महामारी जहां अनेक प्रकार से दुनियाभर के लोगों को प्रभावित कर रही है, वहीं संकट की इस घड़ी में अपने पराये की पहचान भी करवा रही है। ऐसी ही संकट से दिल्ली में रह रहे 12 साल के मासूम बच्चे को भी गुजरना पड़ा है। लॉकडाउन के कारण काम बंद होने के बाद देश के अलग-अलग हिस्सों में फंसे प्रवासी मजदूर अपने-अपने राज्यों को पलायन कर रहे हैं, इस दौरान जिसे जैसे भी मौका मिला बस वो अपने घर को निकल पड़ा।इस संकट के बीच Lockdown से पहले, दिल्ली में रहने वाला एक मजदूर परिवार ऐसा भी है जो अपने मासूम बच्चे को रिश्तेदार के घर छोड़कर चला गया था, जिसे बाद में उन्होंने घर से निकाल दिया और उस बच्चे को कई दिन तक पार्क में रहकर दिन गुजारने को मजबूर होना पड़ा। Odisha Cadre के IPS officer Arun Bothra ने अपने ट्विटर हैंडल से उस बच्चे की कहानी शेयर करते हुए लिखा, ”दिल्ली के एक मजदूर परिवार को लॉकडाउन से पहले अपने घर बिहार जाना पड़ा। जाते समय वो अपने 12 साल के बच्चे को एक रिश्तेदार के घर छोड़ गए, लेकिन उन्होंने कुछ ही दिन में उसे निकाल दिया। रहने की और कोई जगह थी नहीं, इसलिए बच्चा द्वारका के एक पार्क में रहने लगा”।इस दौरान कई दिन तक भूखे पेट पार्क की बैंच पर सो कर उस मासूम बच्चे को अपने दिन गुजारने पड़े, लेकिन अंत में आईपीएस अधिकारी की मदद से बच्चे के माता-पिता को दोबारा उनसे मिलवा दिया है।  Arun Bothra ने बताया कि दिल्ली की एक महिला ने बच्चे को देखा। उन्होंने हफ्तों तक उसे खाना दिया। बच्चे की हालत देखकर स्नेहा ने India Cares को ट्विटर पर टैग कर इसकी जानकारी देते हुए बच्चे को उसके माता-पिता से मिलवाने में मदद मांगी थी।इसके बाद एक और IPS Officer Sanjay ने उसके परिवार को पटना पहुंचाने का इंतजाम किया। साथ ही India Cares ने उनके लिए टिकट का प्रबंध किया। परिवार शनिवार सुबह दिल्ली पहुंच कर अपने बच्चे से पार्क में मिला।

ट्विटर के जरिए पहले भी कर चुके हैं मदद 

यह काम कोई राजनीतिक दल या  उद्योगपति द्वारा नहीं किया जा रहा, बल्कि IPS Arun Bothra अपने 600 सक्रिय वॉलंटियर्स के साथ मिलकर इस काम को अंजाम दे रहे हैं। वे कहते हैं Lockdown शुरू होने के बाद ही मेरे ट्विटर पर लोगों के मदद के लिए मैसेज आना शुरू हो गए थे। मैंने Direct Message का ऑप्शन ओपन रखा है। साथ ही लिखा भी था कि किसी भी जरूरत के लिए सीधे मैसेज करें। तब से ही तमाम मैसेज आ रहे हैं।

ऐसा ही एक मैसेज आता है जिसमें लिखा होता है कि, हमारे बच्चे को मिर्गी है, लेकिन जिस दवा से राहत मिल सकती है वो भारत में है ही नहीं। महिला के इस ट्विट के तुरंत बाद ट्विटर पर विदेश से दवा मगवाने की मुहिम शुरू हो जाती है और कुछ ही दिनों में दवा जरूरतमंद तक पहुंच भी जाती है।

एक संदेश ये भी आता है कि हम 50 लोग भूखे हैं, क्या खाने का कुछ इंतजाम हो सकता है। कुछ ही घंटों बाद उन तक खाना पहुंच जाता है।

ऐसे ढ़ेरों मामलों में लोगों को ट्विटर पर मैसेज करने के चंद घंटों बाद ही मदद मिल रही है। IPS Arun Bothra IG Crime से लेकर CBI तक में अहम ओहदों पर पोस्टेड रह चुके हैं। फिलहाल ओडिशा में हैं और वहां दो सरकारी बस कंपनियों और बिजली कंपनी के प्रमुख हैं।

Arun Bothra कहते हैं कि, देश के 29 राज्यों में हमारे 3 हजार से भी ज्यादा Volunteers हैं। लोग खुद ही ट्विटर पर मुझसे जुड़ते गए।फिर India Cares नाम का ट्विटर पर ग्रुप बनाया गया। एक कोर ग्रुप अलग बना। जो भी मदद के मैसेज आते हैं, उन्हें Volunteers के ग्रुप में डाला जाता  है। जो मदद कर सकता है, वो खुद ही आगे आ जाता है।हमारा आईएएस-आईपीएस का भी ग्रुप है, जिसमें 20-22 सदस्य हैं। जो काम वॉलंटियर्स के ग्रुप में नहीं हो पाते, वो काम हम इस ग्रुप के जरिए करते हैं।कहीं न कहीं से कोई न कोई मदद कर ही देता है।Arun Bothra कहते हैं कि हम इस काम के लिए कोई Donation नहीं लेते। हम अपने नेटवर्क के जरिए सीधी मदद पहुंचाने का काम कर रहे हैं। Volunteers भी अपने स्तर पर मदद कर रहे हैं। ग्रुप में 600 Active Volunteers हैं।

आईपीएस बोथरा की पत्नी डॉक्टर कीर्ति सिंघवी कहती हैं, घर में हम हर रोज डिस्कस करते हैं कि आज किन-किन लोगों को मदद मिली। अच्छी खबर सुनने से Positivity आती है।बीते करीब दो माह में 1150 मामलों में मदद पहुंचाई जा चुकी है और सिलसिला अभी भी जारी है।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares