मोदी विरोधी मोर्चे की इस सबसे मुखर नेता को ही नहीं है जीत का भरोसा, जानिए क्यों कांग्रेस पर आगबबूला हैं यह नेता ?

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एकमात्र मोदी विरोध के एजेण्डा को लेकर लोकसभा चुनाव 2019 में उतरे अलग-अलग विचारधाराओं, मतभेदों, मनभेदों और अनेक विरोधाभासों वाले विपक्षी राजनीतिक दलों में सबसे मुखर पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री तथा तृणमूल कांग्रेस (TMC) की अध्यक्ष ममता बैनर्जी रही हैं, परंतु परिणाम आने से पहले ही ममता बौखला गई हों, ऐसा लगता है।

ममता ने जो ताजा बयान दिया है, उससे लगता है कि उन्होंने परिणाम से पहले ही पराजय स्वीकार कर ली है। पश्चिम बंगाल में दीदी के उपनाम से संबोधित की जाने वाली टीएमसी की सुप्रीमो ममता ने हाल ही में एक ऐसा वक्तव्य दिया है, जिससे लगता है कि मोदी विरोध की उनकी चिनगारी दिल्ली तो क्या, बंगाल में भी काम नहीं कर पायेगी।

पश्चिम बंगाल के रायगंज लोकसभा क्षेत्र में जनसभा को संबोधित करतीं ममता बैनर्जी।

दरअसल ममता ने पश्चिम बंगाल में रायगंज लोकसभा क्षेत्र में एक चुनावी जनसभा को मोदी विरोधी अपने ही कथित महागठबंधन की कमजोरियों की पोल खोल दी और एक-एक कमजोरी को खुलकर सामने रखा। उन्होंने कांग्रेस को जमकर खरी-खोटी सुनाई और कहा कि कांग्रेस की नीतियों के कारण महा गठबंधन प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, भाजपा और एनडीए के सामने बौना साबित हो रहा है। उन्होंने यह भी स्वीकार किया कि कांग्रेस की विफलताओं की बदौलत ही भाजपा इतनी बलवान हुई।

ममता ने कांग्रेस को कोसते हुए कहा कि कांग्रेस अपने बल पर केन्द्र में सरकार नहीं बना सकती और इसके लिये उसे अन्य दलों का सहारा लेना ही पड़ेगा। उन्होंने कहा कि मोदी को सत्ता से हटाने के लिये हर राज्य में गठबंधन हुआ है, परन्तु कांग्रेस की नीतियों के कारण महा गठबंधन प्रभावी नहीं दिख रहा है। इस प्रकार मोदी विरोधी खेमे में चुनाव से पहले ही हताशा का वातावरण छा गया है और ऐसा लगता है कि उसने मैदान में हथियार उठाने से पहले ही पराजय स्वीकार कर ली है।

भाजपा अध्यक्ष अमित शाह व पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बैनर्जी (फाइल चित्र)

भाजपा की बढ़ती पैठ से बौखलाईं ममता

वास्तव में ममता की बौखलाहट का कारण पश्चिम बंगाल में भाजपा की बढ़ती पैठ है। ममता की पार्टी के लिए सबसे सुरक्षित एक मात्र राज्य पश्चिम बंगाल है, जहाँ वे सत्ता में हैं, परंतु पिछले तीन-चार वर्षों में भाजपा के जनाधार में दिन दूनी-रात चौगुनी वृद्धि हुई है। यहाँ तक कि कभी कांग्रेस और वामंथियों के और आज टीएमस के गढ़ कहलाने वाले पश्चिम बंगाल में अब टीएमसी के मुकाबले कांग्रेस या वामपंथी नहीं, अपितु भाजपा आ गई है। इसी कारण ममता को अपना कोलकाता का सिंहासन खतरे में नजर आ रहा है। इसीलिए ममता चाहती हैं कि मोदी और अमित शाह का लोकसभा चुनाव 2019 में कद और न बढ़े, अन्यथा बंगाल में अगले विधानसभा चुनाव में ममता की सत्ता वापसी भी खतरे में पड़ सकती है।

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