‘मोदी विरोध’ की ‘ओछी’ राजनीति : भारत युद्ध जीते तो इंदिरा को श्रेय, मसूद वैश्विक आतंकी घोषित हो तो सिर्फ राजनयिकों को बधाई ?

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कांग्रेस ने यूपीए सरकार की पीठ थपथपाई, पर एनडीए सरकार को नहीं दी बधाई !

देश में लोकसभा चुनाव 2019 चल रहा है। हर राजनीतिक दल देश में घटने वाले प्रत्येक घटनाक्रम को अपने राजनीतिक नफे-नुकसान के नज़रिये से ले रहा है। यह सही भी है, परंतु बात जब देश को अंतरराष्ट्रीय स्तर पर मिली किसी सफलता की हो, तब तो कम से कम ओछी राजनीति से बाज़ आना चाहिए।

चुनाव की घोषणा से पहले जहाँ फरवरी में पुलवामा आतंकी हमले ने भारत को घाव दिया, भारत ने एयर स्ट्राइक कर बदला भी लिया। इस पर भी राजनीति हुई और यहाँ तक कि एयर स्ट्राइक के सबूत मांगे गए। कई नेताओं ने तो यहाँ तक कह दिया कि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी फायदे के लिए पुलवामा आतंकी हमला करवाया। मोदी विरोध के नाम पर हल्की राजनीति करने वालों ने एयर स्ट्राइक के सबूत तक मांगे, परंतु बात जब देश की ऐतिहासिक कूटनीतिक जीत की हो, तब भी उस पर राजनीति करना ओछी राजनीति की पराकाष्ठा नहीं, तो और क्या है ?

आज भारतीय कूटनीति के लिए ऐतिहासिक सफलता का दिन था, जब संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद् (UNSC) ने आतंक के आका और संसद हमले से लेकर पुलवामा हमले तक के लिए मास्टरमाइंड मौलान मसूद अज़हर को अंतरराष्ट्रीय आतंकी घोषित कर दिया। भारत के राजनेताओं में दलगत अंतर्विरोध होंगे, परंतु क्या कोई भी नेता इस बात पर असहमत था या है कि मसूद आतंकवादी है ? जब मसूद के आतंकवादी होने पर सभी दल सहमत हैं, तो फिर उसके वैश्विक आतंकी घोषित होने पर बधाई देने में भी राजनीतिक नफे-नुकसान को देखा जाना कहाँ तक उचित है ?

सबसे पहले बात करते हैं कांग्रेस की। जब भारत-पाकिस्तान युद्ध में भारत की जीत का श्रेय तत्कालीन प्रधानमंत्री इंदिरा गांधी को दिया जा सकता है, तो आज मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकी घोषित कराने के प्रयासों में मिली सफलता पर मोदी बधाई के पात्र क्यों नहीं हो सकते ? कांग्रेस का दोहरा चरित्र देखिए। जैसे ही मौलाना मसूद अज़हर को वैश्विक आतंकवादी घोषित किया गया, कांग्रेस ने यूपीए सरकार की पीठ थपथपाई। कांग्रेस ने गर्व से कहा कि यूपीए सरकार ने 2009 में सबसे पहले मसूद को वैश्विक आतंकी घोषित कराने का प्रस्ताव रखा था, परंतु अब जबकि वह वैश्विक आतंकवादी घोषित हो चुका है, तब बधाई की हकदार एनडीए सरकार नहीं है। यहाँ कांग्रेस से एक और सवाल पूछा जाना चाहिए कि वह चीन के एक बार के अड़ंगे के बाद पाँच वर्षों तक शांत क्यों हो गई। यूपीए सरकार ने दोबारा क्यों प्रयास नहीं किए। यदि प्रस्ताव की पहल करने का श्रेय यूपीए सरकार को देने में कांग्रेस को संकोच नहीं है, तो इस पहल को मिली सफलता का श्रेय एनडीए सरकार को देने में कांग्रेस क्यों हिचकिचाई ? कांग्रेस के अन्य कई नेताओं और सपा प्रमुख अखिलेश यादव ने भी प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के प्रयासों को राजनीतिक रूप से नज़रअंदाज करने की पूरी कोशिश करते हुए राजनयिकों को बधाई दे दी। किसी मोदी विरोधी नेता के मुँह से मोदी को बधाई के लिए एक शब्द तक नहीं फूटा।

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