VIDEO : कहीं पूरे अमेठी की आवाज़ तो नहीं है ‘द्रौपदी’ ?

विश्लेषण : विनीत दुबे

लोकसभा चुनाव 2019 के पाँचवें चरण में सोमवार को 7 राज्यों की 51 सीटों पर मतदान हुआ। उत्तर प्रदेश की हाई प्रोफाइल लोकसभा सीट अमेठी में भी वोट पड़े। इस वोटिंग के दौरान एक वृद्ध महिला मतदाता द्रौपदी ने जो कुछ कहा, उसके यदि मायने निकाले जायें तो कहा जा सकता है कि इस बार के चुनाव में अमेठी में कांग्रेस बेकफुट पर नज़र आ रही है। यह हम नहीं कह रहे हैं – इस वृद्ध मतदाता ने जो कहा और उसके बाद जो कुछ हुआ, उससे यही निष्कर्ष निकल रहा है।

अमेठी लोकसभा सीट कांग्रेस का गढ़ मानी जाती है। कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी यहाँ से 2004, 2009 और 2014 में तीन बार चुनाव जीत चुके हैं और 2019 में चौथी बार यहाँ से कांग्रेस के उम्मीदवार हैं। उनके विरुद्ध भाजपा ने अपनी तेज-तर्रार महिला नेता और केन्द्रीय मंत्री स्मृति ईरानी को दोबारा उम्मीदवार बनाया है।

सोमवार को मतदान के दौरान एक वृद्ध महिला मतदाता ने मीडिया के समक्ष मुखर होकर बयान दिया कि वह कमल को वोट देने वाली थी, परंतु जबरन उसका हाथ पकड़कर पंजे के चुनाव चिह्न पर धर दिया गया और बटन दबवा दी गई। मामला गौरीगंज के गूजरटोला मतदान केन्द्र क्रमांक 316 का बताया जा रहा है। इस महिला का यह बयान मीडिया में आते ही भाजपा उम्मीदवार स्मृति ईरानी ने इस महिला के वीडियो को अपने ट्विटर हैंडल पर री-ट्वीट कर दिया और इस महिला के बयान के आधार पर चुनाव आयोग में शिकायत भी दर्ज करवा दी।

चुनाव आयोग ने भी इस वृद्ध महिला मतदाता के बयान को गंभीरता से लेकर गूजरटोला मतदान केन्द्र के पीठासीन अधिकारी को तत्काल बदल दिया। अब इस मामले की जाँच की जा रही है।

अब अगर इस 80 साल की महिला के बयान को चुनाव आयोग गंभीरता से ले सकता है तो स्मृति ईरानी के बूथ कैप्चरिंग के आरोप को भी गंभीरता से लेना चाहिये, जिसमें उन्होंने कांग्रेस अध्यक्ष राहुल गांधी पर बूथ कैप्चरिंग कराने का आरोप लगाया है।

यदि यह सत्य है कि वृद्ध महिला से जबरन मतदान कराया गया और अमेठी में बूथ कैप्चरिंग हुई तो इसका सीधा-सीधा निष्कर्ष यह निकाला जा सकता है कि क्या राहुल गांधी अपने ही गढ़ में हार को भाँप रहे हैं। क्या कांग्रेस अपने ही गढ़ में जन-विश्वास खो रही है और उसे जबरन पंजे पर मुहर लगवानी पड़ रही है।

सवाल यह भी उठता है कि इतने वर्षों तक कांग्रेस को वोट देने वाली इस वृद्ध महिला का मन कांग्रेस से उठ गया है कि उसने अब उम्र के इस पड़ाव पर आकर कांग्रेस से मुंह मोड़ लिया। यदि वृद्धों का ही कांग्रेस से मोहभंग हो चुका है तो युवा वर्ग का मत किस तरफ रहा होगा। सवाल यह भी है कि क्या इस वृद्धा की आवाज पूरे अमेठी की आवाज़ तो नहीं, यदि ऐसा हुआ तो कांग्रेस को अपना ही गढ़ गंवाना पड़ सकता है।

इस बीच आपको यह भी बता दें कि पिछले लोकसभा चुनाव 2014 में राहुल गांधी यहाँ से चुनाव जीते तो सही, परंतु जीत का अंतर काफी घट गया था। वह मात्र 1,07,000 वोटों से ही जीत पाये थे, जबकि 2009 में उनके जीत का अंतर 3,50,000 वोटों का था। 2014 में राहुल गांधी को 4,08,651 वोट मिले थे, जबकि स्मृति ईरानी को 3,00,074 वोट मिले थे।

आपको बता दें कि कांग्रेस का अमेठी का किला अभेद नहीं है, इससे पहले भी कांग्रेस यहाँ से दो बार चुनाव हार चुकी है। 1977 में भारतीय लोकदल ने कांग्रेस को हराया था और 1998 में यहाँ से भाजपा के संजय सिंह चुनाव जीते थे। वैसे अमेठी सीट पर अभी तक 16 लोकसभा चुनाव और 2 उपचुनाव हुए हैं। इनमें से 16 बार कांग्रेस जीती है। यहाँ सपा और बसपा अभी तक खाता खोलने में सफल नहीं हुए हैं।

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