VIDEO : जानिए FRIENDSHIP DAY पर किसने भारत से कहा, ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 4 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। हर साल अगस्त महीने के पहले रविवार को FRIENDSHIP DAY ‘मैत्री दिवस’ मनाया जाता है। आज के दिन सभी लोगों ने अपने-अपने मित्रों को याद किया और सोशल मीडिया तथा फ्रेंडशिप बेल्ट बाँधकर दोस्ती को अटूट रखने के वायदे किये। इसी कड़ी में भारत के एक मित्र राष्ट्र ने भी भारत को याद किया। इतना ही नहीं, भारत के इस मित्र राष्ट्र ने अपनी मित्रता का एक वीडियो भी तैयार किया है। इस वीडियो के माध्यम से भारत के इस मित्र राष्ट्र ने बड़े जबरदस्त अंदाज़ में भारत को हैपी फ्रेंडशिप डे कहा है। कौन है भारत का वह मित्र राष्ट्र आइए जानते हैं।

इज़रायल है भारत का वह मित्र राष्ट्र

भारत में स्थित इज़रायली दूतावास ने अपने ट्वीटर हैंडल पर एक वीडियो शेयर किया है। इस वीडियो में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इज़रायल के प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू की तस्वीरों का वीडियो बनाया गया है। जबकि बेक ग्राउंड में भारत की लोकप्रिय फिल्म शोले के मशहूर गाने ‘ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे’ का म्यूज़िक चल रहा है। इतना ही नहीं, दूतावास ने ट्वीट करके लिखा है, ‘हैप्पी फ्रेंडशिप डे 2019 इंडिया, हमारी पुरानी दोस्ती मजबूत हो और नई ऊँचाइयों को छुए, ये दोस्ती हम नहीं तोड़ेंगे।’ इसके बाद इज़रायल और भारत का झंडा भी लगाया गया है और #growingpartnership का हैशटैग लगाया गया है। इस वीडियो में भारत और इज़रायली प्रधानमंत्री की मुलाकातों की कई तस्वीरों को एक साथ शेयर किया गया है। इसमें भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी के इज़रायली दौरे की भी तस्वीरें हैं।

उल्लेखनीय है कि कुछ दिन पहले इज़रायल में सत्तारूढ़ लिकुड पार्टी के तेल अवीव में स्थित मुख्यालय पर मोदी और नेतन्याहू का एक पोस्टर देखने को मिला था। यह पोस्टर वहाँ चुनाव प्रचार के लिये लगाया गया था। चुनाव के दौरान नेतन्याहू के भारत के साथ मैत्री सम्बंध प्रगाढ़ बनाने का प्रचार किया गया था।

आप भी देखिये इज़रायल दूतावास की ओर से शेयर किया गया यह वीडियो…

भारत और इज़रायल कब और कैसे बने दोस्त ?

1992 तक भारत और इज़रायल के बीच किसी प्रकार के कोई सम्बंध नहीं थे। क्योंकि भारत गुट निरपेक्ष देश था, जो पूर्व सोवियत संघ का समर्थक था और अन्य गुट निरपेक्ष देशों की तरह ही वह भी इज़रायल को मान्यता नहीं देता था। बल्कि भारत भी फिलिस्तीन की आज़ादी का समर्थक था। 17 सितंबर 1950 को भारत ने पहली बार इज़रायल को राष्ट्र के तौर पर आधिकारिक मान्यता दी थी। इसके बाद 1989 में कश्मीर विवाद और सोवियत संघ के पतन के अलावा भारत में पाकिस्तान की ओर से शुरू की गई अवैध घुसपैठ के चलते राजनीतिक परिदृश्य तेजी से बदले और भारत ने भी अपनी सोच बदलते हुए इज़रायल के साथ सम्बंध बनाने पर जोर दिया। 1992 में तत्कालीन प्रधानमंत्री नरसिंह राव ने इज़रायल के साथ कूटनीतिक सम्बंध शुरू करने की मंजूरी दी। इसके बाद भूतपूर्व प्रधानमंत्री अटलबिहारी वाजपेयी के कार्यकाल में भारत और इज़रायल के सम्बंधों को नये आयाम तक पहुँचाने की पुरजोर कोशिश की गई, क्योंकि दोनों देशों की इस्लामिक कट्टरपंथ के प्रति एक जैसी सोच है। मध्य पूर्व में यहूदी समर्थक नीति के कारण भी दोनों देशों में सम्बंध प्रगाढ़ हुए। वाजपेयी के कार्यकाल में तत्कालीन इज़रायली राष्ट्रपति एरियल शेरोन ने भारत का दौरा भी किया था। वह यात्रा किसी भी इज़रायली राष्ट्रपति की पहली भारत यात्रा थी।

रूस के बाद इज़रायल है भारत का सबसे बड़ा सैन्य मददगार

इसके बाद 2014 में जब भारत में नरेन्द्र मोदी के नेतृत्व में सरकार बनी तो मोदी ने वाजपेयी की कोशिशों को आगे बढ़ाने का काम किया और इसी दौरान 2015 में भारत के राष्ट्रपति प्रणव मुखर्जी ने पहली बार इज़रायल का दौरा किया। तत्पश्चात् जुलाई 2017 में भारत के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी भी पहली बार इज़रायल के दौरे पर गये। पिछले साल 2018 में इज़रायली प्रधानमंत्री बेंजामिन नेतन्याहू भारत के दौरे पर आए और दोनों देशों के बीच संबंधों को ऐसी मजबूती मिली कि अब रूस के बाद इज़रायल भारत का सबसे करीबी मित्र है, जिसके साथ भारत के सैनिक सहायता और सैन्य साजोसामान के निर्यात के सम्बंध हैं।

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