चंद्रयान-2 के बाद अब 2020 में ‘मिशन आदित्य’ है ISRO का अगला लक्ष्य

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 26 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन अर्थात् इंडियन स्पेस रिसर्च ऑर्गेनाइजेशन (ISRO) के 2019 के चंद्रयान-2 साहस को दुनिया ने देखा और सराहा भी। अब इसरो 2020 में एक और ऐसा साहस करने जा रहा है, जो दुनिया को हैरत में डाल देगा। 2019 में इसरो ने अमेरिका, रूस और चीन से हट कर चंद्रमा के दक्षिणी ध्रुव पर उतरने के लिये चंद्रयान-2 को लॉन्च किया था और इसमें पूरी तरह से सफलता भी पाई थी। इसरो का लैंडर विक्रम चांद की धरती पर उतरने से लगभग एक किलोमीटर दूर था, तब ही वह दिशा भटक गया था और ऑर्बिटर से उसका संपर्क टूट जाने से उसकी चांद की धरती पर सॉफ्ट लैंडिंग के बजाय क्रैश लैंडिंग हुई थी। हालाँकि चंद्रयान-2 अर्थात् ऑर्बिटर अभी भी चांद की कक्षा में प्रस्थापित है, जो चांद की परिक्रमा कर रहा है और चांद पर होने वाली हरकतों की तस्वीरें लेकर इसरो को भेज रहा है। अब नये साल में इसरो की नज़र सूरज तक पहुँचने की है। इसके लिये इसरो महत्वाकांक्षी ‘आदित्य मिशन’ पर काम कर रहा है।

मिशन आदित्य को 2020 के मध्य में लॉन्च करने की तैयारी

नया साल इसरो के लिये काफी महत्वपूर्ण सिद्ध होने वाला है, क्योंकि नये साल के लिये इसरो ने अंतरिक्ष विज्ञान के क्षेत्र में कई बड़े लक्ष्य निर्धारित किये हैं। वैसे तो नये साल में इसरो की ओर से लगभग दर्जन भर उपग्रह लॉन्च किये जाएँगे, परंतु इनमें सबसे बड़े दो मिशन हैं। इनमें से एक है ‘आदित्य मिशन’ और दूसरा है ‘मिशन गगनयान।’ मिशन गगनयान के लिये अभी तक टेस्ट फ्लाइट का नाम तय नहीं किया गया है। हालाँकि यह मिशन साल के अंत में अर्थात् दिसंबर-2020 में लॉन्च होगा, उससे पहले इसरो 2020 के मध्य में लॉन्च होने वाले आदित्य मिशन पर गंभीरता से काम कर रहा है। आदित्य एल-1 मिशन देश का पहला सोलर मिशन होगा। इसमें एक पीएसएलवी का प्रयोग स्पेसक्राफ्ट का भार वहन करने के लिये किया जाएगा, जिस पर काम हो रहा है। 400 किलोग्राम के इस क्लास सैटेलाइट में 6 वैज्ञानिक पेलोड्स होंगे। इन 6 पेलोड्स का काम ऑर्बिट के दायरे में आने वाले प्रभावी क्षेत्र के शुरुआती पॉइंट 1 यानी एल-1 तक पहुँचना है। यह ऑर्बिट पृथ्वी से 1.5 मिलियन कि.मी. की दूरी पर है। इस पॉइंट पर पहुँचने का फायदा यह होगा कि बिना किसी बाधा के लगातार सूर्य पर नज़र रखी जा सकेगी।

आदित्य एल-1 सूर्य की बाहरी परत का करेगा अध्ययन

उल्लेखनीय है कि आदित्य यान का मिशन सूर्य का अध्ययन करना है और इसकी परिकल्पना 11 साल पहले 2008 में की गई थी। जनवरी-2008 में अंतरिक्ष अनुसंधान के लिये गठित सलाहकार समिति ने इस मिशन की अवधारणा की थी। इसरो ने अन्य भारतीय अनुसंधान संगठनों के साथ मिल कर उनके सहयोग से इसकी डिजाइन तैयार की है। यह सूर्य का अध्ययन करने वाला पहला भारतीय अंतरिक्ष मिशन होगा और सूर्य के प्रथम लाग्रंगियन बिंदु एल-1 पर स्थापित होने वाला पहला भारतीय मिशन भी होगा। इसका उद्देश्य सूर्य की सतह के तापमान 6,000 कैलविन से कोरोना का तापमान 300 गुना ज्यादा क्यों है ? इसका पता लगाना है, जबकि कोरोना इससे काफी ऊपर है। सूर्य की इस बाहरी परत को तेजोमंडल कहते हैं, जो हजारों किलोमीटर तक फैली हुई है। इसरो आदित्य एल-1 को 2020 के मध्य में लॉन्च करने की योजना पर काम कर रहा है। यह एल-1 पृथ्वी से लगभग 1.5 मिलियन किलोमीटर की दूरी पर स्थित होगा। वहाँ से यह सूर्य के फोटोस्फेयर, क्रोमोस्फेयर और तेजोमंडल पर लगातार नज़र रखेगा और उनका अध्ययन करके विश्लेषण देगा। इस तेजोमंडल का क्लाइमेट चेंज पर खासा प्रभाव रहता है। यह सूर्य से निकलने वाले विस्फोटक कणों का भी अध्ययन करेगा। इसरो के अनुसार यह कण पृथ्वी के नीचे वाले ऑर्बिट में किसी काम के नहीं होते हैं। इन्हें पृथ्वी के चुंबकीय क्षेत्र से बाहर रखने की आवश्यकता है।

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