VIDEO : जब छलक उठे कठोर सीनों में छिपे कोमल हृदय…

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* प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने कहा, ‘पूरा देश ISRO के साथ खड़ा है’

* सोनिया-राहुल ने भी इसरो और उसके वैज्ञानिकों के प्रयासों को सराहा

* वैज्ञानिकों की तपस्या के आगे 130 करोड़ भारतीय नतमस्तक

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 7 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। शुक्रवार रात 11 बजे से पूरा भारत जिस क्षण की प्रतीक्षा कर रहा था, वह क्षण हर्ष की जगह संघर्ष का संदेश लेकर आई, तो भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) के अध्यक्ष के. सिवन से लेकर सभी वैज्ञानिक और पूरा देश निराश हो गया। बेंगलुरू स्थित इसरो केन्द्र में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी जिस चंद्रयान 2 की चंद्र की सतह पर लाइव लैंडिंग देखने पहुँचे थे, वहाँ शुक्रवार/शनिवार (7 सितंबर, 2019) की रात 1.38 बजे तक सब कुछ ठीक-ठाक था। भारत और इसरो इतिहास रचने से बस अब चंद सेकेंड की दूरी पर थे। चंद्रयान 2 को चंद्रमा की सतह पर 1 बज कर 52 मिनट और 54 सेकेंड पर लैंड करना था। अंतिम 90 सेकेंड बचे थे और चंद्रयान 2 तथा उसमें विद्यमान विक्रम लैंडर-प्रज्ञान रोवर चंद्र से केवल 2.1 किलोमीटर दूर थे, तभी लैंडर से ग्राउंड स्टेशन का संपर्क टूट गया और इसके साथ ही 130 करोड़ भारतीयों, उनके प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और इसरो अध्यक्ष सिवन सहित सभी वैज्ञानिकों के चेहरों पर तनाव की लहर दौड़ गई।

तपस्या भंग हुई-समाप्त नहीं, मोदी ने यूँ बढ़ा दिया हौसला

इसरो ने गत 22 जुलाई, 2019 को जो चंद्रयान 2 प्रक्षेपित किया था, उसके पीछे इसरो के वैज्ञानिकों की 11 वर्षों की तपस्या थी। जब विक्रम लैंडर का सम्पर्क टूटा, तो इसरो के वैज्ञानिकों की 11 वर्षों की तपस्या मानों भंग हो गई, परंतु प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चार घण्टे बाद ही निराशा में डूबे इसरो वैज्ञानिकों को उससे बाहर निकालने का ज़िम्मा उठाया। जब ग्राउंड सेंटर से चंद्रयान 2 के विक्रम लैंडर का सम्पर्क टूट गया, तो प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने इसरो के वैज्ञानिकों में छाई निराशा को साफ-साफ पढ़ लिया था। इसीलिए मोदी तुरंत इसरो सेंटर से बाहर चले गए।

मोदी ने ऐसा क्यों किया, यह उन्होंने शनिवार सुबह 8 बजे इसरो सेंटर में पुन: पहुँच कर बताया। मोदी ने सुबह इसरो पहुँच कर देश और इसरो के वैज्ञानिकों को अपने उत्साहपूर्ण व आशावादी संबोधन से न केवल निराशा से बाहर निकालने का परिश्रम किया, अपितु इसरो के वैज्ञानिकों को चंद्रयान 2 की 48 दिनों की सफल यात्रा के लिए बधाई भी दी।

जब मोदी ने सीने से लगा लिया रोते सिवन को

कहते हैं कि अपने जीवन में कठोर और साहसी निर्णय लेने वाले लोगों के सीने में अक्सर एक कोमल हृदय भी बसता है। यही कारण है कि सरदार पटेल को उपाधि तो लौह पुरुष की मिली, परंतु उनका हृदय कमल जितना कोमल था। कुछ ऐसी ही धारणा वैज्ञानिकों को लेकर भी होती है कि वे अपने शोध-अनुसंधान में इतने मग्न होते हैं कि कभी-कभी तो उनके परिजनों को यहाँ तक लगने लगता है कि इनके कठोर सीने में दिल है भी या नहीं। ऐसी ही धारणा अनुशासन, कठोर और साहसी निर्णय लेने के लिए विख्यात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के बारे में भी है, परंतु शनिवार सुबह ऐसी धारणा टूट गई, जब कठोर सीनों में कोमल हृदय के भाव जाग उठे। मोदी ने शनिवार सुबह 8 बजे इसरो सेंटर में वैज्ञानिकों को संबोधित किया और उन्हें पुन: प्रयास में जुट जाने का हौसला दिया। लगभग आधा घण्टे के संबोधन के बाद प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी इसरो सेंटर से विदाई लेने लगे, तो इसरो अध्यक्ष सिवन वरिष्ठ साथियों के साथ उन्हें दरवाजे तक छोड़ने आए। इसी दौरान सिवन अचानक भावुक हो गए। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने सिवन को सीने से लगा लिया और उनका हौसला बढ़ाया। रात को भी जब लैंडर का सम्पर्क टूटा, तब भी मोदी इसरो सेंटर से विदा होने से पूर्व सिवन की पीठ थप-थपा कर गए थे और शनिवार सुबह जब मोदी इसरो सेंटर से विदा हो रहे थे, तब उन्होंने भावुक सिवन का न केवल ढाढस बंधाया, अपितु उन्हें सीने से भी लगा लिया।

देश इसरो के साथ, ‘हमने खोल दिया अंतरिक्ष का दुर्ग द्वार’

एक तरफ जहाँ देर रात प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने विक्रम लैंडर से सम्पर्क टूटने के बाद अपनी पहली ही प्रतिक्रिया में कहा कि पूरा देश इसरो और उसके वैज्ञानिकों के साथ खड़ा है, वहीं शनिवार सुबह से ही देश के लोग भी इसरो को सलाम कर रहे हैं। कांग्रेस अध्यक्ष सोनिया गांधी व पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी ने जहाँ ट्वीट कर इसरो के वैज्ञानिकों को उनके शानदार प्रयासों के लिए बधाई दी, वहीं आम नागरिक देर रात से ही सोशल मीडिया पर इसरो का हौसला बढ़ाने वाले ट्वीट कर रहे हैं। कवि कुमार विश्वास ने एक कविता ट्वीट कर इसरो के वैज्ञानिकों का हौसला बढ़ाया।

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