भारत का ‘BORDER MASTERSTROKE’ : घनघोर अंधेरों और बादलों के आर-पार, RiSAT-2BR1 की नज़र होगी धारदार

* ISRO ने अंतरिक्ष जगत में रचा एक और इतिहास

* शक्तिशाली इमेजिंग उपग्रह का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 11 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय अंतरिक्ष अनुसंधान संगठन (ISRO) ने बुधवार को एक और इतिहास रच दिया। इसरो ने आंध्र प्रदेश में श्रीहरिकोटा स्थित सतीश धवन अंतरिक्ष केन्द्र से अपने 75वें लॉन्च व्हीकल मिशन के अंतर्गत शक्तिशाली इमेजिंग उपग्रह रीसैट-2बीआर1 (RiSAT-2BR1) का सफलतापूर्वक प्रक्षेपण किया। इसरो का यह उपग्रह भारत का अपनी सीमाओं को सुरक्षित करने की दिशा में मास्टरस्ट्रोक माना जा रहा है, क्योंकि इस उपग्रह की लॉन्चिंग के बाद अब देश की पाकिस्तान और चीन से लगी सीमाओं पर दृष्टि रखना सरल हो जाएगा। RiSAT-2BR1 की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि यह रात के घने अंधेरे, ख़राब मौसम में भी सक्रिय रहेगा। धरती पर मौसम भले साथ न दे, परंतु RiSAT-2BR1 कार्यरत् रहेगा। बादलों और कोहरों की घनी धुंध को भी चीर कर यह उपग्रह सीमाओं के स्पष्ट चित्र भेजेगा, जो भारत को भविष्य में जरूरत पड़ने की जाने वाली किसी भी प्रकार की एयरस्ट्राइक में सहायक सिद्ध होगा।

इसरो के लिए ऐतिहासिक बन गया 11 दिसंबर, 2019

इसरो ने बुधवार यानी 11 दिसंबर, 2019 को पीएसएलवी के माध्यम से जो RiSAT-2BR1 उपग्रह प्रक्षेपित किया, वह अकेला नहीं था। इसरो ने इस उपग्रह के साथ 9 विदेशी उपग्रह भी प्रक्षेपित किए हैं। इस लॉन्चिंग के साथ इसरो ने पिछले 20 वर्षों में 33 देशों के 319 उपग्रह छोड़ने का रिकॉर्ड अपने नाम दर्ज करा लिया है। इसरो विदेशी उपग्रहों को छोड़ कर रिकॉर्ड के साथ कमाई भी कर रहा है। पिछले तीन वर्षों में यानी वर्ष 1016-18 के दौरान इसरो ने कॉमर्शियल लॉन्चिंग से 6289 करोड़ रुपए कमाए हैं। यह जानकारी प्रधानमंत्री कार्यालय (PMO) में राज्य मंत्री जितेन्द्र सिंह ने गत जुलाई-2019 में लोकसभा में दी थी। इसरो के लिए 11 दिसंबर, 2019 का दिन इसलिए भी ऐतिहासिक बन गया, क्योंकि आज उसका 75वाँ लॉन्च व्हीकल मिशन था। पीएसएलवी ने 50वीं उड़ान भरी। पहले लॉन्च पैड से यह 37वीं उड़ान थी। वर्ष 2019 की यह छठी उड़ान थी, जबकि PSLV-QL रॉकेट की आज दूसरी उड़ान थी।

क्या है RiSAT-2BR1 और कैसे करेगा काम ?

RiSAT-2BR1 उपग्रह को जिस पीएसएलवी-सी48 क्यूएल रॉकेट से लॉन्च किया गया, उसमें चार स्ट्रैप ऑन होने के कारण पीएसएलवी के आगे क्यूएल लिख गया है। जहाँ तक RiSAT-2BR1 का प्रश्न है, तो यह उपग्रह चौबीसों घण्टे काम करेगा। माइक्रोवेव फ्रिक्वेंसी पर काम करने के कारण RiSAT-2BR1 को इमेजिंग सैटेलाइट कहते हैं। यह रीसैट-2 उपग्रह का अद्यतन संस्करण हैं। इसका वज़न 628 किलोग्राम है, जो पृथ्वी से 576 किलोमीटर ऊपर की कक्षा में स्थापित किया गया है। RiSAT-2BR1 के साथ छोड़े गए अन्य 9 उपग्रहों में अमेरिका के 6, इज़राइल, जापान और इटली के एक-एक उपग्रह भी शामिल हैं।

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