शांति की ओर कश्मीर : आतंक के पेड़ की जारी है छँटाई, जड़ से ही की जा रही कटाई…

* ‘वानी वृक्ष’ की एक-एक आतंकी टहनी टूटी

* अब ‘मूसा मिशन’ भी हो गया मटियामेट

* ‘ऑपरेशन ऑलआउट’ बना अमन का फ़रिश्ता

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 23 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के शासन में आने के बाद जम्मू-कश्मीर निरंतर शांति की ओर अग्रसर हो रहा है। मोदी सरकार ने सबसे पहले तो कश्मीर को सबसे अधिक तंग करने वाले आतंक पर लगाम कसने के लिए वर्ष 2016 से ऑपरेशन ऑलआउट आरंभ किया और तीन वर्ष के भीतर ही धारा 370 हटा कर जम्मू-कश्मीर में शांति और विकास के नए द्वार खोल दिए। शासक के रूप में मोदी शासन कश्मीर में अमन-चैन के लिए आवश्यक कदम उठा रहा है, तो कश्मीरियों पर अत्याचार करने वाले आतंकवादियों के विरुद्ध भारतीय सेना (INDIAN ARMY) ने ऑपरेशन ऑलआउट के तहत छोटे-मोटे आतंकियों ही नहीं, अपितु उनके बड़े-बड़े आकाओं को ठिकाने लगा कर कश्मीर घाटी को आतंक से मुक्त करने का अभियान छेड़ रखा है।

भारतीय सेना ने कश्मीर घाटी में हिज़्बुल मुजाहिद्दीन के कमांडर बुरहान वानी को मार गिराने के बाद अधिक उग्र हुए आतंकवाद के फ़न को कुचलने के लिए वर्ष 2016 में ऑपरेशन ऑलआउट आरंभ किया था। इस ऑपरेशन के तहत वानी के बाद उसके कई साथियों को एक-एक कर ढेर कर दिया गया, तो अब ताज़ा जानकारी के अनुसार भारतीय सेना ने एक और आतंकवादी संगठन अंसार गज़वात-उल-हिन्द का ख़ात्मा कर दिया है, जिसका गठन वर्ष 2017 में कुख्यात आतंकवादी ज़ाकिर मूसा ने की थी। ज़ाकिर मूसा को भारतीय सेना ने गत 23 मई, 2019 को ही मार गिराया था। मूसा की मौत के बाद इस आतंकवादी संगठन की कमान हमीद ललहारी संभाल रहा था, परंतु मंगलवार देर रात त्राल के राजपुरा में सेना ने जिन तीन आतंकियों को मार गिराया, उसमें ललहारी भी शामिल था। इस मुठभेड़ में मारे गए आतंकियों में हमीद ललहारी, नवीद और ज़ुनैद शामिल हैं। तीनों अवंतीपुरा-पुलवामा के रहने वाले थे। जम्मू-कश्मीर पुलिस महानिदेशक (DGP) दिलबाग सिंह ने बुधवार को श्रीनगर में बताया कि ललहारी की मौत के साथ ही कश्मीर में अंसार गज़वत-उल-हिन्द नामक आतंकवादी संगठन का फिलहाल ख़ात्मा हो गया है।

कौन था ज़ाकिर मूसा और कैसे छात्र से बना आतंकी ?

वर्ष 2013 तक ज़ाकिर मूसा एक आम कश्मीरी युवक था, जो चंडीगढ़ में एक इंजीनियरिंग कॉलेज में पढ़ाई करता था, परंतु अचानक उसने पढ़ाई बीच में छोड़ दी। कई दिनों तक वह ग़ायब रहा। न घर पहुँचा और न कॉलेज में ही आता था। कुछ सप्ताहों के बाद ज़ाकिर दुनिया के सामने आया, तब वह कोई विद्यार्थी नहीं था। वह विद्यार्थी से एक आतंकवादी बन चुका था। अप्रैल-मई 2017 में एक वीडियो सार्वजनिक हुआ, जिसमें एक कश्मीरी युवक जम्मू-कश्मीर में इस्लामिक राज्य स्थापित करने की बात करता पाया गया। इसके बाद तो जिहाद के नाम पर उसने कई वीडियो जारी किए। यह युवक ज़ाकिर मूसा ही था। चंडीगढ़ कॉलेज से ग़ायब होने के बाद ज़ाकिर हिज़्बुल मुजाहिद्दीन नामक आतंकवादी संगठन से जुड़ गया था, जहाँ वह कमांडर बुरहान वानी के साथ काम कर रहा था। ज़ाकिर मूसा अपनी लड़ाई को धर्म से जोड़ता रहा। उसने अपने अभियान को शरीयत-ए-शहादत यानी शरीयत के लिए शहादत का नाम दिया। वर्ष 2016 में सेना ने वानी को मौत के घाट उतार दिया, तो मूसा ने हिज़्बुल मुजाहिद्दीन की कमान संभाली। ज़ाकिर ने कश्मीर की समस्या को राजनीतिक की बजाए धार्मिक बताया, जिसके चलते कश्मीर के अलगाववादी भड़क गए। इसी कारण ज़ाकिर ने हिज़्बुल से नाता तोड़ा और जुलाई-2017 में अंसार ग़ज़वात-उल-हिन्द नामक संगठन बनाया, जिसे जम्मू-कश्मीर में अल क़ायदा की शाखा भी कहा जाता था। ज़ाकिर मूसा का मकसद ओसामा बिन लादेन की तर्ज पर कश्मीर में इस्लामिक राज्य स्थापित करना था, परंतु मई-2018 में ज़ाकिर मारा गया और हाल में ललहारी उसके संगठन की कमान संभाल रहा था, परंतु अब उसका भी ख़ात्मा होने के साथ ही ज़ाकिर के आतंकी संगठन अंसार ग़ज़वात-उल-हिन्द तथा सारे गिरोह का फिलहाल ख़ात्मा हो गया है।

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