70 घंटों में धोया 70 वर्षों से लगा 370 का कलंक, लोकसभा में भी पास हुआ J & K पुनर्गठन बिल

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इतिहास बनी धारा 370, बदल गया भूगोल

केन्द्र शासित प्रदेश बने लद्दाख और जम्मू कश्मीर

अनिश्चित काल के लिये स्थगित हुई लोकसभा

अहमदाबाद, 6 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन विधेयक मंगलवार को लोकसभा में भी पारित हो गया। लोकसभा में उपस्थित 434 सांसदों में से वोटिंग के दौरान विधेयक के पक्ष में 367 वोट पड़े, जबकि विरोध में मात्र 67 वोट पड़े। इस बीच जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 को खत्म करने का संकल्प भी पारित हुआ, जबकि मोदी सरकार ने जम्मू कश्मीर आरक्षण विधेयक को फिलहाल वापस ले लिया। इसी के साथ एक तरफ जहाँ धारा 370 अब इतिहास बन गई, वहीं दूसरी ओर जम्मू कश्मीर का भूगोल बदल गया। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल को राष्ट्रपति की मुहर लगने के साथ ही यह राज्य अब दो टुकड़ों में बँट जाएगा। एक भाग लद्दाख और दूसरा भाग जम्मू कश्मीर कहलाएगा। दोनों ही केन्द्र शासित प्रदेश होंगे, हालाँकि लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी, जबकि जम्मू कश्मीर में विधानसभा होगी। राज्य सभा में यह बिल और संकल्प सोमवार को ही पारित हो चुके हैं। इसी के साथ संसद का मौजूदा सत्र भी समाप्त किये जाने की घोषणा कर दी गई।

लोकसभा में पास हुआ धारा 370 खत्म करने का संकल्प और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल

मोदी सरकार के गृह मंत्री जम्मू कश्मीर को विशेष राज्य का दर्जा देने वाली धारा 370 को खत्म करने का संकल्प और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल को सोमवार को राज्य सभा में लाए थे, इससे पहले शाह ने राज्य सभा में इस प्रस्ताव और बिल को पारित कराने का रास्ता बना लिया था। राज्य सभा में यह प्रस्ताव और बिल 61 वोटों की तुलना में 125 वोटों से पारित हो गया था। इसके बाद गृह मंत्री शाह मंगलवार को सुबह यह प्रस्ताव और विधेयक लोकसभा में लाये।

चर्चा के दौरान शाह ने विपक्ष के सभी सवालों के दिये जवाब

इस दौरान उन्होंने धारा 370 को खत्म करने के प्रस्ताव पर चर्चा में भाग लिया और विपक्षी सदस्यों के सभी सवालों का जवाब देकर उनके संदेह को दूर किया। चर्चा के दौरान शाह ने इस धारा के नकारात्मक पहलुओं से सदन को अवगत कराया और कहा कि इस धारा के रहते जम्मू कश्मीर से आतंकवाद का खात्मा करना संभव नहीं है। उन्होंने कहा कि इस धारा के कारण ही भारत सरकार के कई कानूनों और योजनाओं को जम्मू कश्मीर में लागू नहीं किया जा सकता था, जिससे वहाँ के लोगों का विकास और वहाँ ढाँचागत सुविधाओं का विकास करने में दिक्कतें आ रही थी। जम्मू कश्मीर का विकास सुनिश्चित करने के लिये इस धारा को खत्म करना जरूरी था और पूरी प्रक्रिया संवैधानिक दायरे में रहकर की गई है। उन्होंने यह भी कहा कि स्थिति सामान्य होने पर वह जम्मू कश्मीर को पूर्ण राज्य का दर्जा देने में अब 70 साल का लंबा वक्त नहीं लगाएँगे।

इतिहास बन गई धारा 370, बदल गया जम्मू कश्मीर का भूगोल

इसी के साथ एक तरफ जहाँ धारा 370 अब इतिहास बन गई, वहीं दूसरी ओर जम्मू कश्मीर का भूगोल बदल गया। जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल को राष्ट्रपति की मुहर लगने के साथ ही यह राज्य अब दो टुकड़ों में बँट जाएगा। एक भाग लद्दाख और दूसरा भाग जम्मू कश्मीर कहलाएगा। दोनों ही केन्द्र शासित प्रदेश होंगे, हालाँकि लद्दाख में विधानसभा नहीं होगी, जबकि जम्मू कश्मीर में विधानसभा होगी।

शाह ने जम्मू कश्मीर आरक्षण विधेयक वापस लिया

पूरे दिन की चर्चा के अंत में देर शाम लोकसभा में इस प्रस्ताव और जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल को पारित कराने के लिये वोटिंग कराई गई, जिसमें प्रस्ताव और बिल 67 वोटों के मुकाबले 367 वोटों से पारित हो गया। इस बीच खास बात यह भी रही कि लोकसभा में कांग्रेस और यूपीए के कई नेताओं ने भी धारा 370 को खत्म करने के संकल्प तथा जम्मू कश्मीर पुनर्गठन बिल के पक्ष में वोटिंग की। इनमें राहुल गांधी के कांग्रेस अध्यक्ष पद से इस्तीफे के बाद से ही नये अध्यक्ष की रेस में शामिल ज्योतिरादित्य सिंधिया भी शामिल हैं। गृह मंत्री ने जम्मू कश्मीर आरक्षण विधेयक को वापस लेने का आग्रह करते हुए कहा कि राष्ट्रपति के आदेश से जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटने के साथ ही वहाँ आरक्षण अपने आप लागू हो जाएगा, इसलिये इस बिल को वापस लेने की इजाजत चाहता हूँ और इस बिल को राज्य सभा से भी वापस लेने की अपील करूँगा। इसके बाद सदन ने उन्हें इजाजत दी, जिसके बाद उन्होंने यह बिल वापस ले लिया।

अनिश्चितकाल के लिये स्थगित हुई लोकसभा

तत्पश्चात लोकसभा को अनिश्चित काल के लिये स्थगित कर दिया गया। इस मौके पर लोकसभा अध्यक्ष ओम बिड़ला ने कहा कि 1952 से लेकर इस 17वीं लोकसभा तक यह सत्र सबसे खास ही नहीं बल्कि स्वर्णिम रहा है। उन्होंने कहा कि वर्तमान लोकसभा का पहला सत्र 17 जून को शुरू हुआ था, जो आज खत्म हो गया। इस बीच लोकसभा की कुल 37 बैठकें हुईं, जो लगभग 280 घण्टे चलीं। सत्र की पहली बैठक में कुछ देर के लिये मौन रखा गया था। इसके बाद 17 और 18 जून को सदन के कुल 539 सदस्यों ने शपथ ली थी। 19 जून को लोकसभा अध्यक्ष के चुनाव का प्रस्ताव लाया गया था, जिसमें सभा ने मुझे चुनकर यह गर्व महसूस करने का अवसर दिया।

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