जया प्रदा ने थामा भाजपा का दामन, ‘मोदी के हाथों में देश सुरक्षित’ : आज़म के लिए खतरे की घंटी बनेंगी जया ?

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दक्षिण भारतीय फिल्मों से अभिनय और राजनीति दोनों ही क्षेत्रों में कैरियर शुरू करने वालीं जया प्रदा ने जिस तरह फिल्मी कैरियर को बॉलीवुड तक विस्तार दिया, उसी तरह राजनीतिक कैरियर में भी उत्तर भारत से दिल्ली तक अपनी पहुँच बनाई।

दक्षिण भारत के दिग्गज राजनेता एन. टी. रामाराव (एनटीआर) के साथ राजनीतिक जीवन की शुरुआत करने वाली जया प्रदा अब वर्तमान भारतीय राजनीति के सबसे बड़े दल भाजपा और नेता नरेन्द्र मोदी के साथ हैं। जया ने मंगलवार को भाजपा का दामन थाम लिया। भाजपा नेता भूपेन्द्र यादव ने जया प्रदा को भाजपा की प्राथमिक सदस्यता दिलाई।

भाजपा में शामिल होने के बाद अपनी पहली प्रतिक्रिया में पूर्व सांसद जया प्रदा ने कहा, ‘मैंने दिल से भारतीय जनता पार्टी को ज्वॉइन किया है। मेरा पूरा जीवन भाजपा के लिए समर्पित है। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी के हाथों में देश सुरक्षित है।’

अब आज़म खान के साथ आर-पार की लड़ाई ?

माना जा रहा है कि भाजपा जया प्रदा को उत्तर प्रदेश की रामपुर लोकसभा सीट से उम्मीदवार बना सकती है। जया प्रदा इस सीट से दो बार समाजवादी पार्टी (सपा) की सांसद रह चुकी हैं। सपा ने इस बार रामपुर से अपने दिग्गज नेता आज़म खान को चुनाव मैदान में उतारा है। आज़म अपने जीवन का पहला चुनाव लड़ रहे हैं और यदि जया प्रदा भाजपा उम्मीदवार बनीं, तो आज़म का लोकसभा पहुँचना संकट में पड़ सकता है। उत्तर प्रदेश की रामपुर सीट दिलचस्प और हॉट सीट बनने वाली है। लोकसभा चुनाव 2014 में यह सीट भाजपा ने सपा से छीनी थी। भाजपा के नेपाल सिंह ने आज़म के करीबी सपा उम्मीदवार नसीर खाँ को परास्त किया था। हालाँकि 2014 में सपा-बसपा के वोट बँट गए थे, जबकि इस बार आज़म को बसपा कोटे के वोट भी मिलेंगे, जिससे उनकी जीत आसान बन सकती थी, परंतु यदि भाजपा ने जया प्रदा को उतारा, तो आज़म की जीत पर संकट के बादल मंडराना तय है।

जया-आज़म की पुरानी दुश्मनी

जया प्रदा और आज़म खान के बीच पुरानी दुश्मनी है। जब सपा में अमर सिंह का प्रभाव था, तब जया प्रदा का बोलबाला था। जया ने 2004 और 2009 में रामपुर से सपा सांसद के रूप में जीत हासिल की थी। 2009 में तो आज़म के विरोध के बावजूद मुलायम ने जया को ही रामपुर का टिकट दिया और जया ने यह सीट जीत कर दिखाई। आज़म व उनके समर्थक जया के लिए नचनिया और घुंघरू वाली जैसे शब्दों का इस्तेमाल करते थे, जबकि जया आज़म को भैया कहती थीं। जब अमर सिंह ने सपा छोड़ी, तो जया ने भी सपा से किनारा कर लिया और 2014 में अजित सिंह की पार्टी राष्ट्रीय लोकदल (रालोद) के टिकट पर चुनावी किस्मत आजमाई, परंतु उन्हें हार का सामना करना पड़ा।’

एनटीआर से मोदी तक जया का राजनीतिक सफर :

जया प्रदा ने अपना राजनीतिक कैरियर 1994 में अपने साथी अभिनेता एन. टी. रामाराव के साथ किया। एनटीआर ने जया का अपनी राजनीतिक पार्टी तेलुगु देशम् पार्टी (टीडीपी) में प्रवेश कराया। 1996 में जया आंध्र प्रदेश से राज्यसभा के लिए मनोनीत की गईं। एनटीआर के निधन के बाद चंद्रबाबु नायडू के हाथों में टीडीपी की कमान आई और मतभेदों के चलते जया ने टीडीपी छोड़ सपा का दामन थामा। इस प्रकार एनटीआर से शुरुआत कर जया प्रदा ने चंद्रबाबु नायडू, मुलायम सिंह यादव, अजित सिंह के बाद अब नरेन्द्र मोदी और अमित शाह के साथ मिल कर नए राजनीतिक सफर की शुरुआत की है।

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