वासेपुर की इलेक्शन वॉर में देवरानी पर भारी पड़ रही जेठानी

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 23 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। बॉलीवुड के फिल्म निर्माता अनुराग कश्यप की बहुचर्चित फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ झारखंड के जिस वासेपुर की पटकथा पर आधारित है और इस फिल्म की कहानी वासेपुर के जिस बाहुबली परिवार से प्रेरित है, उसी वासेपुर में उसी परिवार की देवरानी और जेठानी के बीच की चुनावी जंग आजकल काफी चर्चा में है। यह चुनावी लड़ाई शुरू से ही चर्चा का केन्द्र रही है। अब जबकि झारखंड विधानसभा चुनाव के सोमवार को परिणाम घोषित हो रहे हैं, तो इसमें जेठानी अपनी देवरानी पर भारी पड़ती नज़र आ रही हैं। जेठानी कांग्रेस की प्रत्याशी हैं और देवरानी भाजपा प्रत्याशी है। यही स्थिति पूरे प्रदेश में भी दिखाई दे रही है। सबसे पुरानी और सीनियर पार्टी कांग्रेस सहयोगी दलों के साथ मिल कर वर्तमान सबसे बड़ी पार्टी भाजपा पर भारी पड़ रही है।

वासेपुर की गैंगवॉर नहीं, इलेक्शन वॉर बनी टॉक ऑफ दी टाउन

बॉलीवुड फिल्म ‘गैंग्स ऑफ वासेपुर’ में बाहुबली रामाधीर सिंह का किरदार झारखंड के वासेपुर के जिस बाहुबली परिवार से प्रेरित है, वह बाहुबली सूर्यदेव सिंह हैं। धनबाद जिले की झरिया विधानसभा सीट पर बाहुबली सूर्यदेव सिंह के ‘सिंह मेंशन यानी धनबाद के चर्चित घराने’ का ही वर्चस्व है। 2014 के विधानसभा चुनाव में इस सीट से भाजपा के संजीव सिंह विधायक चुने गये थे, जो इसी बाहुबली परिवार से हैं और जो अपने चचेरे भाई नीरज सिंह की हत्या के आरोप में अभी जेल में हैं। 2019 में कांग्रेस ने स्व. नीरज सिंह की धर्मपत्नी पूर्णिमा सिंह को टिकट दिया तो भाजपा ने संजीव सिंह की धर्मपत्नी रागिनी सिंह को उनके विरुद्ध चुनावी मैदान में उतारा। इसलिये एक ही बाहुबली परिवार की दो बहुओं के बीच वर्चस्व की लड़ाई ने इस चुनावी जंग को रोचक बना दिया और कोयला नगरी के नाम से पहचानी जाने वाली झरिया नगरी को चर्चा में ला दिया। अब जब सोमवार को चुनाव परिणाम घोषित हो रहे हैं और वोटों की गिनती चल रही है तो कांग्रेस प्रत्याशी यानी जेठानी पूर्णिमा सिंह अपनी देवरानी भाजपा प्रत्याशी रागिनी सिंह पर भारी पड़ रही हैं। अभी तक की गिनती के अनुसार पूर्णिमा सिंह को 53,799 वोट मिले हैं, जबकि उनकी देवरानी को 49,619 वोट मिले हैं। इस प्रकार देवरानी परंपरानुसार अपनी जेठानी के पीछे-पीछे चल रही हैं। इसके अलावा परिणाम पिछले परिणामों से विपरीत आते भी दिख रहे हैं। क्योंकि 2014 में संजीव सिंह ने अपने चचेरे भाई नीरज सिंह को ही 34 हजार से अधिक वोटों से हराया था। अब नीरज सिंह की पत्नी का पलड़ा भारी नज़र आ रहा है।

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