झारखंड की झनकार-दोबारा नहीं सरकार : 19 वर्षों के इतिहास में हर बार सत्ता परिवर्तन

विशेष रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 23 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। 22 मार्च, 1912 से 15 नवंबर, 2000 यानी 88 वर्षों तक अविभाजित बिहार का हिस्सा रहे झारखंड ने अपने पृथक अस्तित्व के बाद स्थिर सरकारें तो देखीं, परंतु सबसे स्थिर मुख्यमंत्री का तमगा तो केवल निवर्तमान मुख्यमंत्री रघुबर दास को ही हासिल हो सका। 19 वर्षों के इतिहास में झारखंड में 2019 से पहले चार चुनाव हुए और उन शुरुआती 14 वर्षों में तीन की बजाए पाँच मुख्यमंत्रियों ने सत्ता की बागडोर संभाली।

जहाँ तक चुनावी इतिहास और आँकड़ों का प्रश्न है, तो झारखंड ने किसी भी विधानसभा चुनाव में किसी भी सत्तारूढ़ राजनीतिक दल या मुख्यमंत्री को दोबारा सत्ता में आने नहीं दिया। झारखंड की सदा यही झनकार रही है कि वह हर पाँच वर्ष में सत्ता परिवर्तन कर देता है। वैसे राज्य का इतिहास लंबा नहीं है, परंतु झारखंड में पहला विधानसभा चुनाव फरवरी-2000 में हुआ था। इसके बाद 2005, 2009, 2014 और 2019 में यानी कुल पाँच विधानसभा चुनाव हुए और इस बार भी जनता ने निवर्तमान मुख्यमंत्री रघुबर दास के नेतृत्व वाली सत्तारूढ़ भारतीय जनता पार्टी (बीजेपी-BJP) और ऑल झारखंड स्टूडेंट्स यूनियन (आजसू-AJSU) गठबंधन सरकार को सत्ता से बाहर का रास्ता दिखा दिया।

पहले ही चुनाव में खंडित जनादेश

झारखंड ने अपने इतिहास में सदैव खंडित जनादेश दिया है। राज्य में पहली बार फरवरी-2000 में विधानसभा चुनाव हुए। इस चुनाव में 81 सदस्यीय विधानसभा में भाजपा 32 सीटों के साथ सबसे बड़ी पार्टी के रूप में तो उभरी, परंतु उसे बहुमत नहीं मिला। इतना ही नहीं, भाजपा के नेतृत्व वाले राष्ट्रीय जनतांत्रिक गठबंधन (NDA-राजग) को 40 सीटें अवश्य मिलीं, पर ये भी बहुमत से 1 सीट कम थी। इस चुनाव में भाजपा ने 5 सीटों वाली समता पार्टी और 3 सीटों वाली जनता दल यूनाइटेड (JDU-जदयू) के साथ सरकार बनाई और भाजपा के बाबूलाल मरांडी राज्य के पहले मुख्यमंत्री बने। वे पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा नहीं कर सके। भाजपा ने बीच में ही मरांडी को हटा कर अर्जुन मुंडा को मुख्यमंत्री बना दिया।

2005 में मुंडा नहीं कर सके वापसी

दूसरे झारखंड विधानसभा चुनाव 2005 में एनडीए भाजपा-30 व जेडीयू-6) ने फिर 36 सीटों के साथ वापसी तो की, परंतु बहुमत नहीं मिला। एनडीए ने झारखंड मुक्ति मोर्चा (JMM-झामुमो) के 17 विधायकों के समर्थन से सरकार बनाई और जेएमएम संस्थापक शिबु सोरेन मुख्यमंत्री बने। इसके बाद फिर उलटफेर हुआ और मुंडा मुख्यमंत्री बने। राजनीतिक उलटफेर ने अब भी पीछा नहीं छोड़ा और निर्दलीय मधु कोडा को मुख्यमंत्री बनने का अवसर मिला। कोडा भी ज्यादा दिन नहीं रह सके और शिबु सोरेन फिर सीएम बन गए। इस तरह दूसरी विधानसभा के चार वर्ष के कार्यकाल में झारखंड ने तीन मुख्यमंत्री देखे।

2009 में भी खंडित जनादेश

झारखंड विधानसभा चुनाव 2009 में भी जनता ने खंडित जनादेश दिया। इस चुनाव में भाजपा और जेएमएम को 18-18 सीटें मिलीं। जेएमएम ने कांग्रेस (15), जेवीएम(पी) (11) के साथ मिल कर सरकार बनाई और शिबु सोरेन तीसरी बार मुख्यमंत्री बने। जेएमएम ने फिर पल्टी मारी और भाजपा के अर्जुन मुंडा मुख्यमंत्री बने। कुछ ही समय बाद शिबु सोरेन के पुत्र हेमंत सोरेन मुख्यमंत्री बन गए।

एकमात्र रघुबर सरकार रही स्थिर

झारखंड विधानसभा चुनाव 2014 में जनता ने फिर एक बार किसी एक दल को स्पष्ट बहुमत नहीं दिया। यद्यपि भाजपा (37)-आजसू गठबंधन (5) को स्पष्ट बहुमत मिला, वहीं 19 विधायकों के साथ जेएमएम को विपक्ष में बैठना पड़ा। भाजपा के रघुबर दास मुख्यमंत्री बने। रघुबर ने पाँच वर्ष तक स्थिर सरकार चलाई। रघुबर पाँच वर्ष का कार्यकाल पूरा करने वाले झारखंड के पहले मुख्यमंत्री रहे, परंतु 2019 में उन्हें वापसी करने में सफलता नहीं मिली।

You may have missed