कौन कहता है इंजीनियरिंग में जॉब नहीं : इस युवक को एक आइडिया ने दिलाया 37 लाख का पैकेज

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 13 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। कौन कहता है कि इंजीनियरिंग सेक्टर में जॉब (JOBS IN ENGINEERING SECTOR) नहीं हैं ? गुजरात के सूरत शहर (SURAT CITY OF GUJARAT) के सौरभ वार्ष्णेय (SAURABH VARSHNEY) ने सिद्ध कर दिखाया है कि प्रामाणिकता से की गई मेहनत, लगन और आइडिया (IDEA) के साथ काम किया जाए तो सफलता अवश्य मिलती है। सौरभ ने हैदराबाद की एक सॉफ्टवेयर कंपनी (SOFTWARE COMPANY IN HYDERABAD) में दो महीने की इंटर्नशिप (INTERNSHIP) के दौरान सफलता के इन्हीं मायनों को सार्थक किया है। मात्र दो माह की इंटर्नशिप में सौरभ ने कंपनी की ओर से दिये गये लक्ष्य से भी आगे बढ़ कर परिणाम दिया, जिससे प्रसन्न होकर कंपनी ने सौरभ को वार्षिक 37 लाख रुपये का सैलरी पैकेज (SALARY PACKAGE) ऑफर किया और एक सामान्य परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दी।

24 घण्टे में मात्र 4 घण्टे सोता था सौरभ

सौरभ के अनुसार उसके पिता सूरत में एक किराना की दुकान चला कर परिवार का गुजारा करते हैं। उनकी कमाई वार्षिक एक लाख रुपये से भी कम है। ऐसे में सौरभ स्कूली दिनों में फीस भरने के लिये भी सगे-संबंधियों से पैसे उधार लेने पड़ते थे। आर्थिक स्थिति अच्छी नहीं होने से सौरभ ने फीस माफ कराने के लिये अच्छे मार्क्स लाने का निश्चय किया और इसके लिये कड़ी मेहनत करने की चुनौती थी। हालाँकि सौरभ ने भी इस चुनौती को हाथों-हाथ लिया और अपनी प्रामाणिकता, मेहनत और लगन से लक्ष्य को हासिल कर दिखाया। इस लक्ष्य को हासिल करना बिल्कुल भी आसान नहीं था। सौरभ ने लक्ष्य प्राप्ति के लिये 24 घण्टों में से 20-20 घण्टे पढ़ाई की और मात्र 4 घण्टे की ही नींद ली। परिणाम स्वरूप कक्षा-11 साइंस में वह स्कूल में अव्वल आया तो उसके माता-पिता को चीफ गेस्ट (CHIEF GUEST) के रूप में बुलाया गया। इससे प्रेरित होकर सौरभ ने कक्षा-12 साइंस में और कड़ी मेहनत करके 95 प्रतिशत अंक प्राप्त किये। इसके बाद जॉइंट एंट्रेंस एग्जाम (JEE) की परीक्षा उत्तीर्ण करके पिपलोद में स्थित स्वामी विवेकानंद इंस्टीट्यूट ऑफ टेक्नोलॉजी (SV NIT) कॉलेज में केमिकल इंजीनियरिंग (CHEMICAL ENGINEERING) में प्रवेश प्राप्त किया। कॉलेज में भी पैसे उधार लेकर ही फीस का भुगतान किया था। सौरभ को इस कॉलेज में केमिकल इंजीनियरिंग में एडमिशन मिला था, परंतु सौरभ को कंप्यूटर इंजीनियरिंग (COMPUTER ENGINEERING) में एडमिशन लेना था। इसलिये उसने एक वर्ष केमिकल इंजीनियरिंग में पढ़ाई करके प्रथम क्रम प्राप्त किया। इसके बाद ब्रांच बदल कर कंप्यूटर इंजीनियरिंग में आ गया। तीसरे वर्ष में सौरभ ने हैदराबाद की एक सॉफ्टवेयर कंपनी में दो महीने इंटर्नशिप की। कंपनी ने सौरभ को जो काम दिया था, सौरभ ने उससे दुगुना काम किया और आइडिया से काम किया, जिसके परिणाम स्वरूप कंपनी के बॉस सौरभ से खुश हुए और उन्होंने सौरभ को वार्षिक 37 लाख रुपये का सैलरी पैकेज ऑफर किया। इस प्रकार सौरभ ने अपनी कड़ी मेहनत से अपने परिवार की आर्थिक स्थिति बदल दी। सौरभ अन्य युवाओं के लिये भी प्रेरणास्रोत है।

हर साल पास होते हैं 8 लाख इंजीनियर्स

इस बीच आपको बता दें कि ऐसा नहीं है कि इंजीनियरिंग क्षेत्र में जॉब की कमी है। ऑल इंडिया कौंसिल फोर टेक्नीकल एजुकेशन (एआईसीटीई) के चेयरमैन डॉ. प्रो. अनिल सहस्रबुद्धे के अनुसार हर साल पूरे देश में लगभग 8 लाख इंजीनियर्स पास आउट हो रहे हैं। इनमें से चार से साढ़े चार लाख इंजीनियर्स को कैंपस सिलेक्शन के माध्यम से स्थल पर ही जॉब मिल जाती है, जबकि शेष इंजीनियर्स भी कहीं न कहीं जॉब कर ही रहे हैं। हालांकि एआईसीटीई के पास उनका डाटा नहीं है। सहस्रबुद्धे के अनुसार आने वाले 10 साल में इंजीनियरिंग सेक्टर में 40 प्रतिशत जॉब बदल जाएँगी। परंपरागत जॉब के स्थान पर नई जॉब जैसे कि आर्टिफिशियल इंटेलीजेंस, डाटा एनालिसिस, रोबोटिक, वर्चुअल रियलिटी, साइबर सिक्युरिटी, क्लाउट आदि की जॉब्स आ रही हैं। उन्होंने मीडिया से बात करते हुए बताया कि एआईसीटीई तकनीकी शिक्षा में जो परिवर्तन ला रही है उसका एक ही उद्देश्य है कि बदलती दुनिया में भारतीय स्टूडेंट्स भी खुद को कंपीट कर पाएँ, क्योंकि बाहर औसत आयु 35 से 40 वर्ष हो चुकी है और वहाँ काम करना आसान नहीं है। ऐसे में भारतीय इंजीनियर्स के लिये विदेशों में जॉब के नये रास्ते खुलेंगे, बशर्ते उनकी शिक्षा उच्च क्वालिटी की होनी चाहिये। बीते 3 सालों में हुए परिवर्तनों से भारत दुनिया में प्रयोग करने वाले देशों की सूची में 81 से 52वें स्थान पर आ गया है। आने वाले समय में भारत खुद को टॉप टेन की सूची में देखना चाहता है। इसलिये तय किया गया है कि 2020 से 2022 तक देश में किसी भी नये इंजीनियरिंग और फार्मेसी कॉलेज को न खोला जाए। दूसरी तरफ जो कॉलेज बदलते समय के साथ बदल नहीं पा रहे हैं, ऐसे 100 से ज्यादा कॉलेज हर साल बंद हो रहे हैं।

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