हाफिज़ की हुज्जत : जिस लश्कर को बनाया, अब उसी से कर रहा तौबा, ‘मेरा LET से कोई लेना-देना नहीं…’

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FATF  रिपोर्ट को गुमराह करने में जुटे इमरान और उनके पाले हुए आतंकी

FATF की ग्रे लिस्ट में पाकिस्तान, ब्लैक लिस्ट में गया तो हो जाएगा हुक्का-पानी बंद

विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 20 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। पाकिस्तान पर उसके देश में पल रहे आतंकवादियों की नकेल कसने का दबाव है। ऐसे में भी आतंकवादियों की पनाहगाह बन चुका यह देश अपनी नापाक हरकतों से बाज़ आने का नाम नहीं ले रहा है। पाकिस्तान फाइनांसियल एक्शन टास्क फोर्स () की ग्रे लिस्ट में है और यह ब्लैक लिस्ट में जाने की तैयारी में है, यदि ऐसा हुआ तो इस देश को कोई भी देश या अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्था कर्ज नहीं देगी और इसका हुक्का-पानी बंद हो जाएगा। इसलिये नापाक पड़ोसी देश एफएटीएफ को गुमराह करने की कोशिशों में जुटा है। आतंकवादियों के विरुद्ध फर्जी एफआईआर (FIR) दर्ज करके कार्यवाही करने का दिखावा कर रहा है। इसी कड़ी में मुंबई आतंकी हमले के मास्टर माइंड और संयुक्त राष्ट्र द्वारा अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किये गये हाफिज़ सईद को भी 17 जुलाई को गिरफ्तार किया गया था। हालाँकि अब हाफिज़ ने मंगलवार को लाहौर हाईकोर्ट में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती दी है। इतना ही नहीं, जमाद-उद-दावा (JUD) के चीफ आतंकी हाफिज़ सईद ने उस आतंकवादी संगठन लश्करे-तैयबा (LET) से तौबा करने का दिखावा किया है, जिसका वह संस्थापक है।

आरोपों से मुकर रहा है हाफिज़

एक करोड़ अमेरिकी डॉलर के इनामी अंतर्राष्ट्रीय आतंकी हाफिज़ सईद को पाकिस्तान में 17 जुलाई-2019 को टेरर फंडिंग केस में गिरफ्तार किया गया था। आगामी 2 सितंबर को एंटी टेरर कोर्ट में इस मामले की सुनवाई होने वाली है। इस गिरफ्तार आतंकी को लाहौर की कोट लखपत जेल में कड़ी सुरक्षा के बीच रखा गया है। इस बीच जेल से ही हाफिज़ सईद ने मंगलवार को लाहौर हाईकोर्ट में अपनी गिरफ्तारी को चुनौती देने वाली याचिका दायर की है। याचिका में उसने दावा किया है कि उसका और इस मामले में आरोपी बनाए गये प्रतिबंधित लश्करे-तैयबा और फलाह-ए-इंसानियत के 67 अन्य आरोपियों का लश्करे-तैयबा से कोई लेना-देना नहीं है। इतना ही नहीं, इन सभी ने इस संबंध में देश की अन्य अदालतों की ओर से सुनाए गये फैसलों का हवाला भी दिया है। हाफिज़ ने हाईकोर्ट से अपील की है कि वह घोषित करे कि जिन संपत्तियों का ब्यौरा याचिका में दिया गया है, उनका इस्तेमाल मस्जिद के उद्देश्य के लिये किया जा रहा है। इसलिये उस संपत्ति पर कानून की कोई बाध्यता नहीं है और न ही उनके विरुद्ध दर्ज एफआईआर वैध है। उसने कहा कि, ‘कोर्ट घोषित करे कि किसी भी याचिकाकर्ता का लश्करे-तैयबा से सम्बंध नहीं है, इसलिये उनके खिलाफ एफआईआर बिना कानून का पालन किये दर्ज की गई है और इसे खारिज कर दिया जाए।’ उल्लेखनीय है कि हाफिज का संगठन जमात-उद-दावा लश्करे-तैयबा का फ्रंट ऑर्गेनाइजेशन माना जाता है, जिसने 2008 में मुंबई में आतंकी हमले को अंजाम दिया था। इस हमले में 166 निर्दोष लोगों की जान गई थी। दिसंबर 2008 में संयुक्त राष्ट्र सुरक्षा परिषद ने लश्करे-तैयबा को बैन कर दिया और हाफिज़ सईद को अंतर्राष्ट्रीय आतंकवादी घोषित किया था। इसके बाद अमेरिका ने उस पर एक करोड़ डॉलर का इनाम घोषित किया है।

पाकिस्तान के खाने और दिखाने के दाँत अलग

पाकिस्तान मामलों के जानकारों का कहना है कि हाफिज़ सईद की गिरफ्तारी एफएटीएफ को गुमराह करने की रणनीति के तहत पाकिस्तान की ओर से उठाया गया एक दिखावटी कदम था। अब जब कश्मीर से धारा 370 हटाये जाने के बाद भारत और पाकिस्तान के बीच तनाव की स्थिति है और दूसरी तरफ जैशे-मोहम्मद का सरगना और हाल ही में अंतर्राष्ट्रीय आतंकी घोषित हुआ मौलाना मसूद अजहर अस्पताल के बिस्तर पर पड़ा है, ऐसे में पाकिस्तान ने हाफिज़ सईद को जेल से बाहर निकालने की बिसात बिछाई है। यह सबकुछ एक सोची-समझी रणनीति के तहत किया जा रहा है। हालांकि पाकिस्तान अभी एफएटीएफ की ग्रे सूची में शामिल है और उसकी गर्दन पर ब्लैक लिस्ट होने की तलवार लटकी हुई है। यदि ऐसा हुआ तो दुनिया का कोई भी देश या अंतर्राष्ट्रीय वित्तीय संस्थान पाकिस्तान को कर्ज नहीं देगा और पाकिस्तान का हुक्का-पानी बंद हो जाएगा। इन सबके बावजूद हाफिज सईद को जेल से बाहर निकालना पाकिस्तान की मजबूरी है और जासूसी संस्था आईएसआई तथा पाकिस्तानी सेना की जरूरत है। इसलिये इन्हीं दोनों ने मिलकर अब हाफिज की रिहाई की पटकथा लिखी है।

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