बुलंद हो अगर हौंसला तो कुछ भी नामुमकिन नहीं

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Coronavirus के चलते देशभर में Lockdown चल रहा है। Lockdown के चलते अपना राज्य छोड़कर अन्य राज्यों में काम करने वाले मजदूर वहीं फंस गए हैं। हालांकि सरकार ने मजदूरों को उनके गृह राज्य में वापसी के लिए स्पेशल श्रमिक ट्रेनें चलवाई हैं। लेकिन फिर भी कई प्रवासी मजदूर पैदल चलकर या साइकिल चलाकर अपने घर पहुंच रहे हैं। इस दौरान बिहार के दरभंगा से एक ऐसा केस सामने आया है, अपने बीमार पिता को साइकिल पर बिठाकर 12 सौ किलोमीटर का सफर तय करने वाली बिहार के दरभंगा की रहने वाली ज्योति की शोहरत सात समंदर पार विदेशों तक फैल गई है।

7 दिनों में किया 1200 किलोमीटर का सफर तय

दरभंगा सिरहुल्ली गांव की रहने वाली 15 साल की ज्योति जनवरी में अपने बीमार पिता की सेवा करने के लिए गुड़गांव गई थी। इसी दौरान मार्च में लॉकडाउन हो गया और वह गुड़गांव में ही फंस गई। बीमार पिता के पास पैसे नहीं थे, इसलिए पिता और बेटी के सामने रोजी-रोटी का संकट पैदा हो गया। इसी बीच प्रधानमंत्री राहत कोष से एक हजार रुपये उनके खाते में आए। ज्येाति ने कुछ और पैसे मिलाकर पुरानी साइकिल खरीदी और पिता को उस पर बिठाकर गांव तक का सफर तय करने का फैसला कर लिया। पिता ने पहले तो इंकार किया, लेकिन बेटी के हौसले को देखकर उन्होंने अनुमति दे दी। ज्योति आठ दिनों की कड़ी मशक्कत के बाद 1200 किलोमीटर साइकिल चलाकर अपने पिता को लेकर गुड़गांव से दरभंगा के सिरहुल्ली गांव पहुंच गई।

इस दौरान रास्ते में कई तरह की परेशानियां हुईं लेकिन हर बाधा को ज्योति बिना हिम्मत हारे पार करती गई। कई बार ज्योति को खाना भी नहीं मिला। रास्ते में कहीं किसी ने पानी पिलाया तो कहीं किसी ने खाना खिलाया।

अपनी हिम्मत और हौंसलो के बल पर अखबार से लेकर सोशल मीडिया तक की सुर्खियों में रहने वाली ज्योति के चर्चे अब यूरोप और अमेरिका में हो रहे हैं। इन साधन-संपन्न देशों में ज्योति की हिम्मत की दाद दी जा रही है और उसको अब बेहतर जीवन की पेशकश भी की जा रही है।

जब ज्योति के बुलंद हौंसलों की दास्तान अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप की बेटी इवांका ट्रंप ने पढ़ी तो उन्होंने इसकी काफी सराहना की। ज्योति की दास्तान को शुक्रवार को इवांका ट्रम्प ने ट्विटर पर साझा किया। मीडिया में ज्योति की कहानी सामने आने के बाद कई लोग और संगठन उसकी मदद को आगे आए हैं। ज्योति फिलहाल आठवीं कक्षा में पढ़ रही है इसलिए कई संगठनों ने उसको पढ़ाई में मदद का आश्वासन दिया है।

ज्योति के लंबे साइकिल के सफर को देखते हुए Cycling Federation of India ने ज्योति को अगले महीने Trial के लिए भी बुलाया है। इस संबंध में ज्योति ने बताया कि शुक्रवार उसके पास एक कॉल आया है। इसमें साइकिलिंग फेडरेशन के चेयरमैन ओंकार सिंह ने उसको शाबाशी के साथ आशीर्वाद भी दिया। इस बीच शुक्रवार को राढ़ी पश्चिमी पंचायत के पकटोला स्थित डॉ. गोविंद चंद्र मिश्रा एजुकेशनल फाउंडेशन ने भी ज्योति को मुफ्त शिक्षा और उसके पिता मोहन पासवान को नौकरी का प्रस्ताव दिया है। फाउंडेशन ने सिरहुल्ली निवासी मोहन पासवान और उनकी पुत्री ज्योति कुमारी को हरसंभव सहायता करने का फैसला किया है।

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