कारगिल युद्ध में शहीद हुए पति को ऐसे श्रद्धांजलि दे रही पत्नी : सेना में भर्ती होकर कर रही देश सेवा

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अहमदाबाद, 25 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। 26 जुलाई को कारगिल विजय दिवस मनाया जाता है। 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच कश्मीर में कारगिल युद्ध हुआ था, जिसमें भारत के वीर सैनिकों ने पाकिस्तान की सेना को पीछे खदेड़ दिया था। हालाँकि इस युद्ध में कुछ जांबाज भारतीय सैनिक भी हुए थे। इन्हीं में से एक थे शहीद जगदीश सिंह। जिनकी पत्नी मीना सिंह अपने पति के सपनों को पूरा करने के लिये भारतीय सेना में भर्ती हो गई है और देश सेवा करने में जुटी हुई है।

परिवार आज भी शहीद बेटे के लिये बहाता है आँसू

उत्तर प्रदेश के जौनपुर जिले में केराकत-सुल्तानपुर मार्ग पर स्थित अकबरपुर गाँव निवासी 90 वर्षीय सत्यनारायण सिंह 20 साल गुजर जाने के बाद भी आज तक हर साल कारगिल विजय दिवस आने पर अपने शहीद बेटे को याद करते हुए अक्सर रो पड़ते हैं। उनकी आँखें भले ही बेटे के वियोग में नम हो जाती हैं, परंतु इसके बावजूद वह अपना सिर ऊँचा करके कहते हैं कि मेरे बेटे ने देश के लिये जो कुर्बानी दी है, उस पर मुझे नाज़ है। सत्यनारायण सिंह बताते हैं कि जब 20 साल पहले कारगिल में युद्ध छिड़ा था, तब उनके बेटे जगदीश सिंह के शहीद होने की सूचना आने पर पूरे अकबरपुर गाँव में कोहराम मच गया था और पूरा गाँव अपने बेटे के ग़म में डूब गया था। हालाँकि पूरा गाँव आज भी जगदीश सिंह की शहादत पर गर्व करता है।

सुविधाओं के नाम पर मिला धोखा

सत्यनारायण सिंह के अनुसार जब बेटे की शहादत की खबर आई तो परिवार को सांत्वना देने के लिये कुछ जन-प्रतिनिधि और शासन-प्रशासन के अधिकारी शहीद के घर आए थे। उन लोगों ने परिवार को कई प्रकार की सुविधाएँ देने का वायदा करके मीडिया में खूब सुर्खियाँ बटोरी थी। हालाँकि वह वायदे आज तक पूरे नहीं हुए। किसी ने केराकत-सुल्तानपुर देवगाँव मार्ग का नाम शहीद जगदीश सिंह के नाम पर रखने की घोषणा की थी, तो किसी ने गाँव में शहीद की प्रतिमा स्थापित करवाने का वायदा किया था और किसी ने शहीद के परिवार को पेट्रोलपंप आबंटित करने की भी घोषणा की थी, परंतु इनमें से किसी भी घोषणा पर आज तक अमल नहीं हुआ है। उस दिन के बाद अब 20 साल गुजर चुके हैं, किसी राजनेता या अधिकारी ने परिवार की तरफ या गाँव की तरफ पलटकर भी नहीं देखा। सत्यनारायण सिंह तो यहाँ तक कहते हैं कि मदद के नाम पर भी उनके परिवार का मज़ाक बनाया गया। परिवार को मदद के नाम पर 10 बीघा जमीन दी गई। यह ऐसी जमीन है, जो नाले में है और वह भी सिर्फ कागजों में ही है। स्थल पर जाकर देखें तो उस जमीन का कोई भी हिस्सा उपयोग करने योग्य नहीं है।

शहीद की पत्नी भी सेना में भर्ती होकर कर रही देश सेवा

परिवार को मदद के नाम पर सरकार से कुछ नहीं मिलने के बावजूद परिवार का हौसला बुलंद है और उसमें देश सेवा का जज्बा भी कूट-कूटकर भरा है। यही कारण है कि सुविधाएँ देने की घोषणाएँ किये जाने के बाद वह वायदे पूरे नहीं होने पर भी परिवार का हौसला नहीं टूटा और न ही देश के प्रति मर-मिटने के जज्बे में कोई कमी आई। बल्कि शहीद जगदीश सिंह की पत्नी मीना सिंह ने भी भारतीय सेना की महिला शाखा में भर्ती होकर देश सेवा करने का जज्बा दिखाया है। मीना सिंह का कहना है कि वह अपने पति के अधूरे सपनों को पूरा करने के लिये सेना में भर्ती हुई है।

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