कर्नाटक : जो काम चुनाव नहीं कर सके, वह उप चुनाव ने कर दिया…

Written by

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 9 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। दक्षिण भारतीय राज्य कर्नाटक में सोमवार को ग़जब हो गया, जो काम चुनाव नहीं कर पाये थे, वह काम उप चुनाव ने कर दिया। 2018 के राज्य विधानसभा चुनाव में भाजपा को आवश्यक बहुमत नहीं मिल पाया था। इसलिये बीएस येदियुरप्पा को कुछ घण्टों की सरकार बनाने के बाद सदन में बहुमत सिद्ध करने से पहले इस्तीफा दे देना पड़ा था। हालाँकि इस उप चुनाव ने बहुमत की उस कमी को पूरा कर दिया है। बहुमत मिल जाने की खुशी में सीएम बीएस येदियुरप्पा ने जीते हुए 12 में से 11 विधायकों को अपने मंत्रिमंडल में शामिल करने की भी घोषणा की है।

दरअसल 2018 में हुए कर्नाटक के विधानसभा चुनाव में भाजपा सबसे बड़ी पार्टी बन कर तो उभरी थी, परंतु सरकार बनाने के लिये जरूरी 112 सीटों के बहुमत तक नहीं पहुँच पाई थी और उसे 105 सीटें ही मिल पाई थी। कांग्रेस दूसरे नंबर पर रही थी, जिसे 66 सीटें मिलीं और पूर्व प्रधानमंत्री एचडी देवेगौड़ा के नेतृत्व वाली जनतादल सेक्युलर यानी जेडी (एस) को 34 सीटें मिली थी। हालाँकि भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिये कांग्रेस ने बाहर से समर्थन देकर तीसरे नंबर की पार्टी जेडी (एस) के नेता और एचडी देवेगौड़ा के पुत्र एचडी कुमारस्वामी को मुख्यमंत्री बना दिया था। कांग्रेस के इस कदम से आहत हुए लिंगायत समुदाय के 15 विधायकों ने कांग्रेस से नाता तोड़ लिया था। इससे कुमारस्वामी सरकार भी कुछ महीनों में ही अल्पमत में आ गई थी और उसे भी इस्तीफा देना पड़ा था, जिसके बाद भाजपा को सबसे बड़ा दल होने का फायदा मिला और बहुमत नहीं होने के बावजूद उसे सरकार बनाने का अवसर मिला। इस प्रकार अब कर्नाटक में भाजपा के बीएस येदियुरप्पा सीएम हैं।

उपचुनाव में 15 में से भाजपा 12, कांग्रेस 2 जेडी(एस) शून्य

इधर जिन 15 विधायकों ने कांग्रेस से बगावत की थी, उन्हें दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित किया गया था। इसलिये यह 15 सीटें रिक्त होने पर गत 5 दिसंबर को इन सीटों पर उपचुनाव कराये गये थे। उप चुनाव में भाजपा ने 15 में से 12 सीटें जीत कर विधानसभा में बहुमत हासिल कर लिया है। कांग्रेस को 2 सीटें मिली हैं, जबकि एक निर्दलीय उम्मीदवार विजयी हुआ है। जेडी(एस) को एक भी सीट पर जीत नहीं मिली। आश्चर्यजनक बात तो यह है कि जिन विधायकों को अयोग्य घोषित किया गया था, उनमें से ही 12 को भाजपा ने टिकट देकर उप चुनाव लड़वाया था और प्रदेश की जनता ने उन्हें ही फिर से चुन कर विधानसभा में पहुँचाया है। फर्क सिर्फ इतना है कि पहले वे कांग्रेस के पाले में थे और अब भाजपा के पक्ष में हैं।

कर्नाटक में पिछले साल हुआ था महाराष्ट्र जैसा राजनीतिक ड्रामा

पिछले साल 224 सीटों वाली कर्नाटक विधानसभा की 222 सीटों पर चुनाव हुए थे। इन चुनाव में किसी भी पार्टी को स्पष्ट बहुमत प्राप्त नहीं हुआ था। प्रदेश में सरकार रचने के लिये 112 सीटों के बहुमत की आवश्यकता थी, परंतु सबसे बड़ी पार्टी बन कर उभरी भाजपा भी 105 सीट ही प्राप्त कर पाई थी। दूसरे नंबर पर रही कांग्रेस को 66 और जेडी(एस) को 34 सीटें प्राप्त हुई थी। तत्कालीन कांग्रेसी सीएम सिद्धारमैया ने इस्तीफा दे दिया था। इसके बाद प्रदेश में सरकार बनाने के लिये महाराष्ट्र की तरह ही काफी राजनीतिक ड्रामा हुआ था। भाजपा को उम्मीद थी कि सबसे बड़ी पार्टी होने के नाते राज्यपाल उसे ही सरकार बनाने के लिये आमंत्रित करेंगे, इसलिये उसने महाराष्ट्र की तरह ही वहाँ भी घोषित किया था कि कांग्रेस के लिंगायत विधायक उसके संपर्क में हैं। इससे कांग्रेस और जेडी(एस) दोनों में खलबली मच गई थी और उन्होंने अपने-अपने विधायकों को टूटने से बचाने के लिये उन्हें अलग-अलग जगहों पर रखा था। दूसरी तरफ कांग्रेस ने किसी भी सूरत में भाजपा को सत्ता से बाहर रखने के लिये जेडी(एस) को बाहर से समर्थन देकर एचडी कुमारस्वामी के नेतृत्व में सरकार बना दी थी। कर्नाटक का लिंगायत समुदाय जेडी(एस) विरोधी है। इसलिये उसने कांग्रेस के इस कदम का विरोध किया और इस समुदाय के कुछ विधायकों समेत 15 विधायकों ने पार्टी से बगावत कर दी। इससे कुमारस्वामी सरकार कुछ दिन ही चल पाई और अल्पमत में आ जाने के बाद उसे भी इस्तीफा देना पड़ा। दूसरी तरफ भाजपा ने बीएस येदियुरप्पा के नेतृत्व में यह कह कर सरकार बना दी कि बागी विधायकों का उसे समर्थन प्राप्त है। परंतु बागी विधायकों को दल-बदल कानून के तहत अयोग्य घोषित कर दिया गया तो उनकी सीटें रिक्त हो गईं। सीटें रिक्त हो जाने से इन पर उप चुनाव हुए। गत 5 दिसंबर को वोटिंग कराई गई थी, जिसमें 60 प्रतिशत से अधिक मतदाताओं ने हिस्सा लिया और वोट डाला। सोमवार को चुनाव नतीजे आये जो कि भाजपा के पक्ष में रहे और कांग्रेस तथा जेडी(एस) के लिये झटका देने वाले साबित हुए। कांग्रेस ने यह कह कर जनादेश को स्वीकार किया कि जनता ने अयोग्य उम्मीदवारों को अपनी स्वीकृति दी। दूसरी तरफ बीएस येदियुरप्पा ने उप चुनाव में जीत हासिल होने से बहुमत का आँकड़ा 112 को पार कर लिया और अब विधानसभा में उनके विधायकों की संख्या 117 हो गई है, जिसकी खुशी में विजयी हुए 12 में से 11 विधायकों को उन्होंने अपने मंत्रिमंडल में जगह देने की घोषणा की है। एक विधायक के बारे में उन्होंने कहा कि उस विधायक से उन्होंने मंत्रिमंडल में जगह देने का कोई वादा नहीं किया था, जबकि इन 11 से वादा किया था, जो वे निभाएँगे।

कर्नाटक में कांग्रेस के समर्थन से कुमारस्वामी की सरकार बनने से पहले येदियुरप्पा ने भी महाराष्ट्र की तरह कुछ घण्टों की सरकार बनाई थी, हालाँकि वे सदन में बहुमत साबित नहीं कर पाये थे और उन्हें त्यागपत्र देना पड़ा था। उन्होंने 17 मई को सरकार बनाई थी और 19 मई को बहुमत सिद्ध करने के बजाय मुख्यमंत्री पद से त्यागपत्र दे दिया था।

झारखंड में त्रिशंकु परिणाम न आने दें मतदाता : मोदी

इस बीच झारखंड में विधानसभा चुनाव हो रहे हैं, जहाँ तीसरे चरण के मतदान से पहले बरही में प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने चुनावी सभा को संबोधित करते हुए कर्नाटक विधानसभा उप चुनाव के परिणामों का जिक्र किया और कांग्रेस पर निशाना साधा। उन्होंने मतदाताओं को झारखंड में भी कर्नाटक और महाराष्ट्र की तरह त्रिशंकु परिणाम न आएँ, इसके लिये भाजपा को स्पष्ट बहुमत के साथ विजयी बनाने की अपील की और राज्य का विकास करने के लिये भाजपा की जीत को जरूरी बताया। दूसरी तरफ उन्होंने कांग्रेस पर भी हमला करते हुए कहा कि अब गठबंधन सरकारों का समय बीते समय की बात हो चुकी है, वैसे भी कांग्रेस की गठजोड़ की राजनीति पुरानी हो गई है और वो गठजोड़ को निभाने में भी कमजोर साबित हो रही है।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares