अब ‘कर्नाटक में कौन करेगा सैलरी’ : सरकार गई तो पेंच फँसा पगार का

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अहमदाबाद, 25 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। कर्नाटक में एचडी कुमारस्वामी की सरकार गिरने के बाद ऊपरी तौर पर भले ही ऐसा लगता हो कि राजनीतिक उठापटक शाँत हो गई है, परंतु सच तो यह है कि सरकार के सत्ता से जाने के बाद अब प्रदेश में प्रशासनिक पेंच फँस गया है और 5 लाख प्रशासनिक कर्मचारियों को यह सवाल परेशान किये हुए है कि सरकार तो गई, अब सरकारी खजाने से कर्मचारियों को सैलरी कौन देगा ? क्योंकि सत्ता में कोई सरकार है नहीं, विधानसभा भंग नहीं हुई है, इसलिये राज्यपाल शासन भी लागू नहीं हुआ है। ऐसे में कर्मचारी दुआ कर रहे हैं कि जल्दी से राज्य में नई सरकार बन जाए।

सरकार गिरने से मुश्किल में सरकारी कर्मचारी

कर्नाटक में कांग्रेस और जेडीएस (JDS) की गठबंधन सरकार पिछले 14 महीने से चल रही थी, परंतु 15 विधायकों के इस्तीफा देने से कुमारस्वामी सरकार संकट में आ गई थी। इसमें सरकार पर विधानसभा में बहुमत साबित करने का दबाव बना तो सरकार की ओर से तथा पार्टी स्तर पर रूठे विधायकों को मनाने के प्रयास किये गये, परंतु सफलता नहीं मिली और सरकार अल्पमत में आ गई। इसी दौरान सरकार को विधानसभा में बहुमत साबित करना पड़ा, जिसमें वह विफल साबित हुई और कुमारस्वामी की सरकार गिर गई। अभी भी 15 विधायकों के इस्तीफे का पेंच फँसा हुआ है। विधानसभा में विधायकों की वर्तमान संख्याबल के हिसाब से भाजपा के पास सरकार बनाने के लिये पर्याप्त 105 विधायकों की संख्या है, परंतु वह सरकार बनाने का दावा पेश नहीं कर रही है। 15 विधायकों के इस्तीफे का मामला सुप्रीम कोर्ट में पेंडिंग है। इसलिये भाजपा चाहती है कि पहले सुप्रीम कोर्ट का फैसला आ जाए, उसके बाद वह आगे की रणनीति तय करेगी। ऐसे में कर्नाटक में नई सरकार के गठन का मामला अधर में लटका हुआ है। राजनीतिक दल भले ही फिलहाल शाँत बैठे हों, परंतु सरकार का गठन नहीं होने से फिलहाल प्रदेश के लगभग 5 लाख सरकारी कर्मचारी अवश्य परेशान हो रहे हैं।

1 अगस्त से सैलरी मिलने में हो सकती है मुश्किल

राज्य में कोई सरकार नहीं होने से 1 अगस्त से प्रदेश के 5 लाख प्रशासनिक कर्मचारियों की सैलरी कौन देगा, यह एक बड़ा सवाल कर्मचारियों को परेशान किये हुए है। यदि प्रदेश में जल्दी ही नई सरकार गठित नहीं हुई, तो इन कर्मचारियों को अपनी सैलरी के लिये लंबा इंतजार करना पड़ेगा। क्योंकि सरकार गिरने के साथ ही सरकारी स्तर के सारे काम स्थगित हो गये हैं। कर्मचारियों को सैलरी देने के लिये सरकारी खजाने से राशि देने का काम 1 अगस्त से शुरू होता है, परंतु सरकार सत्ता में नहीं होने से यह काम भी नहीं हो पाएगा। अभी ना तो राज्यपाल का शासन लागू है, ना ही विधानसभा भंग हुई है, इसलिये राज्यपाल वजूभाई वाला भी फंड रिलीज़ नहीं कर सकते। ऐसे में कर्मचारियों के पास एक ही रास्ता है कि वह दुआ करें कि राज्य में जल्द से जल्द नई सरकार गठित हो जाए।

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