कर्नाटक विधानसभा चुनाव – बीजेपी को बड़ी राहत, क्योंकि आरएसएस ने दिया साथ

Karnataka Election 2018 - RSS, BJP

कर्नाटक: दक्षिण भारत में बीजेपी को प्रवेश दिलाने के लिए भारत के प्रधानमंत्री श्री नरेंद्रमोदी जी और बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अमित शाह ने पूरा दम लगा दिया है। कुछ सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Election 2018) में बीजेपी को कांग्रेस से मिल रहीं जबरदस्त टक्कर ध्यान में रखते हुए राज्य के स्वयंसेवकों गुपचुक तरीके से एकजुट करना शुरू कर दिया है। ऐसा माना जा रहा है कि आरएसएस (RSS) अभी कर्नाटक में ऐक्शन में आ चुकी है। एक समय ऐसा लग रहा था कि लिंगायत मुद्दे को कांग्रेस ने उठाकर बीजेपी (BJP) को बैकफुट पर ला दिया है लेकिन आरएसएस के ऐक्शन में आने से बीजेपी को बहुत बड़ी राहत मिली है। ऐसा कहा जा रहा है कि आरएसएस गुपचुक तरीके से बीजेपी के लिए प्रचार कर रही है।

आरएसएस हिंदुत्व और हिंदू कार्यकर्ताओं की हत्या के मुद्दे को उठा रही है और अपने पदाधिकारी मतदाताओं को अपने पाले में लाने के लिए संगठनात्मक नेटवर्क का उपयोग कर रही है। कुछ सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि आरएसएस के लगभग 28 वरिष्ठ प्रचारकों ने बेंगलुरु में डेरा जमा लिया है। ये प्रचारक पूरे राज्य में अपनी शाखाओं से संपर्क बनाए हुए है।

कुछ आरएसएस के पदाधिकारियों के अनुसार उनके प्रचारक और कार्यकर्ता मुख्य रूप से कर्नाटक के उत्तरी और तटीय क्षेत्रों पर फोक्स करेंगे। इन क्षत्रों में कर्नाटक के 100 से 80 सीटें आती है जो बीजेपी को बहुमत हासिल कराने में मुख्य भूमिका निभा सकती है। आरएसएस को लिंगायत और वीरशैव के मतभेदों और उसके प्रभाव को खत्म करने का काम दिया गया है। इसके अलावा आरएसएस के एक पदाधिकारी ने बताया कि यदि जरुरत पड़ी तो हमारे स्थानीय इकाई बीजेपी के नेताओं के साथ मिलकर कार्य करेगी।

भाजपा के केंद्रीय चुनाव समिति ने कर्नाटक विधानसभा चुनाव (Karnataka Election 2018) के लिए अपने 72 उम्मीदवारों की सूची जारी कर दी है और भाजपा के मुख्यमंत्री के उम्मीदवार बीएस येदियुरप्पा शिकारीपुर सीट से चुनाव लड़ेंगे। प्रधानमंत्री मोदी और अमित शाह ने भाजपा के शीर्ष नेताओं से मुलाकात करके उम्मीदवारों की सूची को जारी किया।

उधर कर्नाटक चुनाव (Karnataka Election 2018) को ध्यान में रखते हुए कांग्रेस के मुख्यमंत्री सिद्दारमैया की अगुवाई वाली सरकार ने एक साल पहले से ही अपनी तैयारी शुरू कर दी थी ताकि विपक्ष को बैकफुट पर धकेला जा सके। लेकिन पिछले तीन महीने से बीजेपी ने अपने रुख में परिवर्तन करते हुए अपने केंद्रीय नेताओं का फोकस इस पर केंद्रित कर दिया है।

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