सेना ने खोजी कश्मीरी प्लेयर : अब थाईलैंड में खेलेगी व्हीलचेयर बास्केटबॉल !

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 17 सितंबर 2019 (युवाPRESS)। आपने ऐसी कई फिल्में देखी होंगी और नवल कथाएँ पढ़ीं होंगी, जिनमें कोई अपने मित्र या प्रियजन की खोज में निकलता है और अंततः उसे खोज कर सफलता की नई इबारत लिखता है। ऐसा ही एक किस्सा सामने आया है कश्मीर में। जब धारा 370 समाप्त करने के समय पूरे कश्मीर में फोनसेवा और इंटरनेट सेवा बंद हो गई, तो व्हीलचेयर बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया का अपनी एक कश्मीरी प्लेयर से संपर्क करना मुश्किल हो गया। इस कश्मीरी व्हीलचेयर बास्केटबॉल खिलाड़ी ने थाईलैंड में आयोजित होने वाली एशिया ओसनिया व्हीलचेयर चैंपियनशिप के लिये क्वालिफाइ किया था, परंतु उससे संपर्क नहीं होने के कारण उसके कोच उसे खोजने निकल पड़े। अंततः भारतीय सेना ने उनकी मदद की और उन्हें उनकी खिलाड़ी मिल गई। इस प्रकार कश्मीर में भारतीय सेना का एक और बड़ा कारनामा सामने आया।

कौन है कश्मीरी व्हीलचेयर बास्केटबॉल प्लेयर ?

इशरत अख्तर अपने कोच लुइस जार्ज के साथ

दरअसल कश्मीर के बारामूला जिले की रहने वाली व्हीलचेयर बास्केटबॉल खिलाड़ी इशरत अख्तर ने इसी वर्ष थाईलैंड में आयोजित होने वाली एशिया ओसनिया व्हीलचेयर चैंपियनशिप में क्वालिफाइ किया है। इसके लिये उसे 27 अगस्त को चेन्नई में नेशनल कैंप में पहुँचना था, परंतु उससे पहले ही 5 अगस्त को केन्द्र सरकार ने जम्मू कश्मीर से धारा 370 हटा दी और सुरक्षा कारणों से पूरे राज्य में फोन सेवा तथा इंटरनेट सेवा बंद कर दी। यह सेवा बंद होने से व्हीलचेयर बास्केटबॉल फेडरेशन ऑफ इंडिया के लिये अपनी खिलाड़ी से संपर्क करना मुश्किल हो गया। उसके कोच लुइस जार्ज को भी अपनी खिलाड़ी का पता मालूम नहीं था, ऐसे में यह कश्मीरी खिलाड़ी कैसे चेन्नई के नेशनल कैंप में पहुँचने में सफल हुई ? इसके पीछे की कहानी बड़ी रोचक है।

फोन-इंटरनेट सेवा बंद होने का कई प्रकार से असर पड़ा

जम्मू कश्मीर में धारा 370 हटाए जाने के दौरान फोन और इंटरनेट सेवा बंद किये जाने का लोगों पर कई प्रकार से असर पड़ा। इसी असर की एक कहानी है बास्केटबॉल खिलाड़ी इशरत अख्तर की। फेडरेशन इशरत अख्तर से संपर्क करना चाहता था, परंतु यह संभव नहीं हो पा रहा था। तब इशरत को खोजने का बीड़ा उठाया दो दोस्तों ने। यह दो दोस्त थे इशरत के कोच लुइस जार्ज, जो नेवी के पूर्व अधिकारी थे और उनके मित्र रिटायर्ड कर्नल आइसनहोवर, जो इंटेलिजेंस ब्यूरो में भी काम कर चुके थे। यह दोनों स्कूली दौर में एक ही क्लास में पढ़ते थे। धारा 370 हटने के 20 दिन बाद 25 अगस्त लुइस ने आइसनहोवर से संपर्क किया और उनसे कश्मीर के हालात पर चर्चा की। इसी दौरान लुइस ने आइसनहोवर को बताया कि उनकी एक प्लेयर कश्मीर में है, जिससे उनका संपर्क नहीं हो पा रहा है। तब आइसनहोवर ने उनसे इशरत अख्तर के बारे में कुछ जानकारियाँ लीं और उसका फोटो माँगा। इसके बाद आइसनहोवर ने अपने सूत्रों की मदद से श्रीनगर में जम्मू कश्मीर पुलिस को इस खिलाड़ी की जानकारी दी। पुलिस से यह जानकारी भारतीय सेना के पास पहुँची। अब आगे की सारी भूमिका सेना को निभानी थी, जो उसने बखूबी निभाई भी। सेना ने मात्र एक दिन में पता लगा लिया कि आइसनहोवर और उनके मित्र लुइस जार्ज जिस इशरत अख्तर को खोज रहे हैं, वह बारामूला जिले के बांगडारा गाँव में रहती है।

पहले सेना को देख कर चौंका, फिर खुशी से झूम उठा परिवार

जब खोजते हुए सेना के जवान इशरत अख्तर के घर पहुँचे और उनका दरवाजा खटखटाया तो पहले सेना को द्वार पर देख कर इशरत और उसके पिता अब्दुल राशिद मीर चौंक गये। जब इशरत के पिता को यह पता चला कि उनकी बेटी का फोटो लेकर सेना उसकी तलाश में जुटी थी, तो कुछ ही पलों में कई भयंकर विचारों ने भी उन्हें भयभीत कर दिया, परंतु जब सेना के जवानों ने उन्हें सच्चाई से रूबरू कराया तो पिता और पुत्री दोनों खुशी से झूम उठे, उस समय यही दोनों घर पर मौजूद थे। इस प्रकार सेना ने इस मिशन को एक ही दिन में पूरा कर लिया था, जो हमारी सेना की काबिलियत को दर्शाता है। इसके बाद इशरत ने 27 अगस्त को चेन्नई जाकर नेशनल कैंप में भाग लिया और अब वह थाईलैंड में 27 नवंबर से 8 दिसंबर तक खेली जाने वाली एशिया-ओसनिया व्हीलचेयर बास्केटबॉल चैंपियनशिप में भारत का प्रतिनिधित्व करेगी। यह टूर्नामेंट टोकयो ओलंपिक-2020 के लिये क्वालिफायर टूर्नामेंट के समान है।

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