कठुआ मामले को लेकर देश में बवाल, सच और झूठ की तहकीकात

Kathua case

जम्मू: कठुआ मामला अथार्त आसिफा रेप और हत्या मामले को समझने के लिए सबसे पहले यह जानने की कोशिश करना होगा कि यह घटना कब घटित हुई थी और अब क्यों देश में बवाल मचा हुआ है। सबसे पहले हम यह बता देना चाहते हैं कि हम किसी बलात्कारी का समर्थन नहीं करते हैं और नहीं ही हम किसी को बचाने की कोशिश कर रहें है क्योंकि जिसने भी Kathua case को अंजाम दिया है वह सही माइने पर इन्सान तो हो ही नहीं सकता। ऐसे हैवान को सख्त से सख्त सजा देनी चाहिए ताकि आगे से जो भी ऐसा करने की सोचे, उसकी सजा को देखकर रूह काप जाये।

Kathua case Investigations

Kathua case को लेकर कुछ तथ्य और सचाई

1. यह घटना (Kathua case) जम्मू के कठुवा में 10 जनवरी को घटित हुई थी और इस मुद्दे को 3 महीने बाद पूरे न्यूज मीडिया में उठाया गया। कुछ सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि कुठआ ज़िले के रसाना गांव की आठ साल की बकरवाल समाज की लड़की अपने घोड़ों को चराने जंगल में गई थी और वापस घर नहीं लौटी।

2. जम्मू का यह क्षेत्र कश्मीर घाटी के विपरीत शांत और हिन्दू बहुल इलाका है।

3. ऐसा पता चला है कि आसिफा के माता-पिता का निधन हो चुका था और वह अपने रिश्तेदारों के साथ रहती थी। उसके नाम थोड़ी पारिवारिक संपत्ति भी बताई जा रही है।

4. कुछ सूत्रों से ज्ञात हुआ है कि कठुवा के इस क्षेत्र में कुछ सालों से अवैध रोहिंग्या को बसाया जा रहा है।

5. जनवरी में आसिफा के लापता हो गई थी और उसके तीन महीने बाद आसिफा का शव कठुवा के मंदिर के पास पाया गया।

6. जब कठुआ मामला में बच्ची का पहला पोस्टमार्टम रिपोर्ट आया तो उसमें बलात्कार की घटना से इंकार किया गया था तो अब सवाल उठता है कि क्यों कुछ मीडिया के द्वारा बताया गया कि बच्ची के साथ बलात्कार हुआ है।

7. Kathua case में कुछ मीडिया चैनल द्वारा बताया गया है कि बच्ची को मंदिर में 8 दिनों तक बंधक बनाकर बलात्कार की घटना को अंजाम दिया गया था लेकिन सवाल यह उठता है कि जिस मंदिर का जीक्र मीडिया चैनलों द्वारा किया गया है वह मंदिर तीन गांव के आबादी के बीच है जहाँ कोई लॉक करने योग्य कोई दरवाजा भी नहीं है और मंदिर हमेशा खुला रहता है क्योंकि यहाँ रोज़ लोग सुबह और शाम को पूजा करने आते हैं। अब आप खुद ही सोचिये कि ऐसे जगर पर किसी को 8 दिनों तक बंधक बनाकर कैसे रखा जा सकता है।

8. आसिफा का जब लाश मिला था तो उसके शरीर पर गीली मिट्टी लिपटी हुई मिली थी इससे तो पता चलते है कि उसकी हत्या कहीं ऐसी जगह पर हुई होगी जहां पर गिली मिट्टी होगी। मंदिर में तो मार्बल लगा है, जहाँ कीचड़ तो है ही नहीं। पोस्टमार्टम से तो यह पता चला है कि मृत्यु के समय पर आसपास कहीं बारिश नहीं हुई। अब इससे तो ऐसा लगता है कि आसिफा की हत्या कहीं की गई होगी और उसका शव मंदिर के पास लाकर डाला गया है। इससे तो ऐसा लग रहा है कि यह किसी के द्वारा साजिश की गई है और इस घटना को अंजाम उसने दिया है जिसने यह साजिश रची है।

9. कठुआ मामला को जिस मंदिर को बताया जा रहा है वह मंदिर आबादी के बीच में है, संभव नहीं है कि वहां 8 दिनों तक शव सड़ता रहे और लोगों को पता न चल पाये।

10. कुछ सूत्रों से यह भी पता चला है कि घटना के बाद जब स्थानीय पत्रकार वहां पहुंचे तब कुछ रोहिंग्या लोगों ने उनके साथ मारपीट की थी।

11. कुछ मीडिया चैनलों ने इस घटना (Kathua case) के साथ हिन्दू आरोपी और घटनास्थल के रूप में मंदिर शब्द प्रचारित किया जो कि गलत है क्योंकि जिस तरह से आंतकवादियों का कोई धर्म नहीं होता उसी तरह से किसी भी बलात्कारी का धर्म नहीं हो सकता। इसलिए इस घटना की जांच CBI द्वारा होनी चाहिए और साथ में उस मीडिया चैनल की भी जांच होनी चाहिए जिसने हिन्दू आरोपी और घटनास्थल के रूप में मंदिर शब्द का प्रयोग किया। पता चल जाये तो ऐसे मीडिया चैनल को रद्द कर देना चाहिए तथा साथ में कड़ी कारवाई करनी चाहिए ताकि मीडिया को पैड न्यूज से बचाया जा सके।

12. जम्मू के भाजपा के विधायकों ने राज्य सरकार से के CBI जाँच करने का केंद्र से अनुरोध किया है लेकिन राज्य सरकार नहीं चाहती की इसकी जांच CBI से हो, इससे तो यही पता चलता है कि कोई न कोई साजिश हुई है।

13. दूसरी ओर राज्य की मुफ़्ती सरकार ने CBI जाँच का अनुरोध न करते हुए जाँच के लिए SIT का गठन कर दिया है लेकिन हमें लगता है कि इसका सही फैसला तो CBI की जांच से ही आ सकती है। यह घटना इतना व्यापक रूप ले चुका है इसलिए इसे CBI से जांच करना ही उचित होगा तभी सही फैसला आ सकता है।

14. कश्मीर में आपने कई बार आंतकवादियों के गतिरोध वाली घटना के बारे में सुना होगा और तो इस घटना के विरोध में आंदोलनों का नेतृत्व ग़ुलाम नबी आज़ाद के प्रमुख सहयोगी कर रहे हैं जिसको देखकर भी ऐसा प्रतीत होता है कि Kathua case में किसी की साजिश हो सकती है।

15. जम्मू क्षेत्र के पुलिस कर्मियों का नाम भी बलात्कारियों की लिस्ट में डाला गया जिससे ऐसा लगता है कि जांच को प्रभावित करने के लिए ऐसा किया गया होगा। अत: इसका जांच CBI से कराना ही उचित होगा।

16. अभी तक गठित की गई SIT ने अपने रिपोर्ट में बताया है कि बच्ची को 8-9 दिन तक मंदिर के तहखाने में बन्द रखा गया होगा। जबकि उस मंदिर में तो कोई तहखाना हैं ही नहीं तो फिर कैसे तहखाने का जिक्र किया गया। इससे पता चलता है कि इस घटना को किसी न किसी साजिश के तौर पर अंजाम दिया गया है। CBI से जांच कराके इसका पता जरूर लगाना चाहिए कि कैसे SIT ने यह बताया कि मंदिर में तहखाना है और इन पर कारवाई की जानी चाहिए तभी दूध का दूध और पानी का पानी होगा।

17. Kathua case में SIT द्वारा रिपोर्ट में बताया गया है कि पुजारी ने अपने बेटे को 400 किलोमीटर दूर से बलात्कार करने के लिए बुलवाया जो कि साफ साफ मनगढ़त कहानी बनाई गई है क्योंकि घटना वाले दिन तो लड़का घटनास्थल से 400 Km दूर परीक्षा दे रहा था। इसस तो यही पता चलता है कि SIT किसी के इसारे पर कार्य कर रही है। इसलिए कठुआ केस की जांच CBI से होनी चाहिए।

18. Kathua case को ध्यान से देखने पर ऐसा लग रहा है कि इसमें किसी आतंकवादी संगठन का भी हाथ हो सकता है क्योंकि बकरवाल मुस्लिम भारतीय सेना के प्रमुख सहयोगी माने जाते हैं जो सेना के लिए दुर्गम स्थानों पर खच्चर पर लाद कर समान आदि को पहुँचाने का काम करते हैं। कारगिल युद्ध में भी उनकी सेवा का योगदान विशेष उल्लेखनीय है। अब उनमें भारतीय सेना और भारत के ख़िलाफ़ आक्रोश को भड़काया जा रहा है ताकि भारत को इससे नुकशान हो। इसप्रकार से कहा जा सकता है कि यह देश के सुरक्षा से भी जुड़ी मामला हो सकती है। अत: इस घटना की जांच CBI से कराना ही उचित होगा।

19. आज से कुछ सालो पहले भी इस प्रकार की एक घटना सामने आई थी जो 2003 में शोपियां में घटित हुई थी। इसमें 22 वर्षीय नीलोफर जान और उसकी 17 वर्षीय ननद अपने सेव के बगीचे से गायब हो गयीं थी और उनके शव पास के नाले में पड़े मिले थे। वहां की स्थानीय पुलिस ने जांच में पाया था कि अचानक बादल फटने और बाढ़ आने से दोनों युवतियां बहकर मर गई। लेकिन अलगाववादियों ने एक साजिश की तहत भारतीय सेना को बलात्कार के जाल में फंसाया। तब उमर अब्दुल्ला स्थानीय पुलिस की जांच को नकार दिया और 17 अदिकारियों को सस्पेंड करके जेल भेज दिया और जांच के लिए न्यायिक कमेटी का गठन किया। बाद में न्यायिक कमेटी ने यह बताया कि दोनों युवतियों का बलात्कार करके हत्या की गयी है। फिर इसके बाद जब सेना की ओर से जांच के लिए दबाव बढ़ा तो रिपोर्ट में बलात्कार की पुष्टि नहीं हुई और सभी 17 निलंबित अधिकारीयों को दोषमुक्त पाया गया। उस समय उस घटना को लेकर व्यापक हिंसा, प्रदर्शन और असंतोष के चलते 47 दिनों तक कर्फ़्यू लागू रहा।

20. मेरे भाइयों क्या ऐसा नहीं लग रहा है कि कुछ लोग सरकार को अस्थिर करने के लिए लंबे समय से षड्यंत्र रच रहे हैं। ये लोग कभी अवार्ड वापसी, कभी कोरेगांव हिंसा, कभी पटेल आरक्षण, कभी जुनैद, कभी अख़लाक़ और कभी लिंगायत के बहाने देश को बरबाद करने और सत्ता को हथियाना चाहते हैं ताकि देश को और लुटा जा सके। हम इनकी चाल को आज नहीं समझेंगे तो कब, जब सर से पानी ऊपर चला जायेगा तब।

जरा सोचिये कौन कौन लोगो ऐसी घटना को अंजाम दे रहा है और किसलिये है इस सबके पीछे कौन है। इनका क्या उद्देश्य हैं और इन सब के पीछे कौन है?

जरा सोचिये मेरे भाइयों आशिफ़ा का ये फ़ोटो उसके अपहरण / बलात्कार / हत्या से तुरंत पहले कैसे वायरल हो गया और तो उसकी लाश इन्हीं कपड़ों में कैसे पाई गई। अपराध से तुरंत पहले किसने उसकी फ़ोटो खींची होगी । घटना से पहले ही उसका यह फोटो क्यों खींचा गया। इससे तो ऐसा लगता है न कि अपराधी को पता था कि आशिफ़ा के साथ क्या होने वाला है। Kathua case के पीछे एक बहुत बड़ा षड्यंत्र नजर आ रहा है इसलिए इसकी जांच CBI होनी ही चाहिए ताकि असली दोषियों को सजा मिल सके।

मेरे ख्याल से सभी लोग यही चाहते हैं कि आशिफ़ा के दोषियों को सख्त से सख्त सजा मिलनी ही चाहिए तो फिर Kathua case की जांच CBI से होनी ही चाहिए। ताकि असली गुनाहगार पकड़ा जा सकें और उसे सजा मिल सकें।

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