एक डॉगी को इस ‘काम’ के लिए मिला हृदयद्रावक दंड : पशुप्रेमी भी जानकर रह जाएँगे दंग

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विश्लेषण : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 24 जुलाई 2019 (युवाPRESS)। प्रकृति ने मानव सहित सभी प्राणियों को जीवन जीने के लिये भोजन, शयन, भय (आत्मरक्षा) और मैथुन सहित कुछ मौलिक अधिकार दिये हैं। यह अधिकार ऐसे हैं, जो जीवन जीने के लिये सर्वाधिक जरूरी हैं। शरीर के हलन-चलन के लिये भोजन शरीर को ऊर्जा देने का काम करता है, वैसे ही निद्रा आने पर सोना भी आवश्यक है, अन्यथा स्वास्थ्य और मानसिक संतुलन पर दुष्प्रभाव पड़ता है। अनजाने और अनिश्चित भय के दौरान आत्मरक्षा करने का भी हर प्राणी को अधिकार है। इसी प्रकार मैथुन भी सभी प्राणियों को प्रकृति से मिली अनमोल भेंट है, जो उनके वंश को आगे बढ़ाने और अस्तित्व को बनाए रखने के लिये आवश्यक है, परंतु एक श्वान के स्वामी ने अपने ही पालतू श्वान के मौलिक अधिकारों पर कुठाराघात करके सभी आश्चर्य में डाल दिया है।

स्वामी ने पालतू कुत्ते को घर से निकाला

घटना केरल राज्य की है। केरल की राजधानी थिरुवनंतपुरम् में एक मालिक ने अपने 3 साल के मादा कुत्ते को घर से निकाल दिया। कुत्ते को घर से निकालने की जो वजह सामने आई है, वह सभी को हैरान कर रही है। मालिक ने अपने पालतू कुत्ते पर आरोप लगाया है कि वह पड़ोसी के कुत्ते के संपर्क में आने के बाद बिगड़ गया और उसने पड़ोसी के कुत्ते के साथ अवैध सम्बंध बना लिये थे। इसलिये हमने उसे घर से निकाल दिया। घर से निकाला गया मादा श्वान थिरुवनंतपुरम् के छकई इलाके में स्थित वर्ल्ड मार्केट में घूमता पाया गया। उसके गले में लटकी एक चिट्ठी ने ‘प्यूपिल फॉर एनिमल’ की स्वयंसेवक शमीम फारूखी इस डॉगी की तरफ आकर्षित हुईं। उन्होंने जब यह चिट्ठी पढ़ी तो वह हैरान रह गईं।

चिट्ठी में लिखा था – ‘यह डॉगी बहुत अच्छी है, उसे ज्यादा खाने की भी जरूरत नहीं होती है, वह कभी बीमार भी नहीं पड़ी, इसे 5 दिन में नहलाया जाता है। उसने किसी को काटा भी नहीं है। उसे दूध, बिस्कुट और अंडे खाने में दिये जाते हैं। अब हमने इसे घर से निकाल दिया है, क्योंकि इस डॉगी के पड़ोस के कुत्ते से अवैध सम्बंध थे।’

शमीम ने सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म फेसबुक के जरिये इस श्वान के स्वामी को जवाब देने का प्रयास किया है। उन्होंने फेसबुक पर इस डॉगी की तस्वीरें पोस्ट करते हुए लिखा है – ‘कुत्ते अक्सर ऐसा करते हैं। अगर इस डॉगी के मालिक को अपने डॉगी को ब्रीड नहीं करना था, तो उसे पता होना चाहिये कि नसबंदी नाम की चीज़ भी होती है। यदि वह अपनी डॉगी को वर्जिन देखना चाहता था तो उसे घर में बंद करके भी रख सकता था।’

पशु अधिकार कार्यकर्ता ने श्वान मालिक की मानसिकता पर उठाये सवाल

सोशल मीडिया पर शमीम फारूखी को जबरदस्त समर्थन मिल रहा है। एक पशु अधिकार कार्यकर्ता श्रीदेवी कार्ता ने इस पोस्ट की प्रतिक्रिया में लिखा है कि – ‘जिसने भी डॉगी के गले में यह नोट लिखा है, मैं उसके घर के बच्चों को लेकर चिंतित हूँ। उसके बच्चों का भाग्य क्या होगा, यदि वह किसी के साथ सम्बंध बनाने की हिम्मत करेंगे तो यह शख्स उनके जीवन को खतरे में डाल देगा। यदि इस मालिक को कुत्तों के बीच कोई कानूनी सम्बंध दिखते हैं, तो श्रीदेवी कार्ता ने उसे प्रस्ताव दिया कि आइए…हम कुंडली-मिलान के बाद आपके कुत्ते की शादी की व्यवस्था करते हैं और दहेज आदि पर समझौता करके आपके कुत्ते के अवैध सम्बंध के मुद्दे का हल निकालते हैं। ऐसा करके आप मन की शाँति पा सकेंगे।’

यह डॉगी फिलहाल शमीम के पास है। उन्होंने उसके लिये एक छोटा-सा घर बनाया है, जहाँ वो रह रहा है। उम्मीद की जा सकती है कि वो ऐसे परिवार में जाए, जहाँ लोग जानवरों से प्यार करते हों। शमीम यह भी लिखती हैं कि इस डॉगी के चेहरे पर उन्हें उम्मीद की किरण दिखती है। उसे अभी भी लगता है कि उसका मालिक उसे लेने जरूर आएगा।

श्वान मालिक पशु क्रूरता निवारण अधिनियम का दोषी ?

जाहिर तौर पर ही श्वान के मालिक का यह व्यवहार अनुचित है। इसके अलावा उसका यह व्यवहार कुत्ते के मौलिक अधिकारों का हनन करने वाला भी है। क्योंकि प्रकृति ने भोजन, शयन, आत्मरक्षा और मैथुन के चार मौलिक अधिकार मानव सहित सभी प्राणियों को दिये हैं। भारतीय संविधान में भी इंसानों की तरह पशुओं को भी कानूनी अधिकार प्राप्त हैं। पशुओं के प्रति क्रूरता को रोकने के लिये पशु क्रूरता निवारण अधिनियम-(PCA) 1960 लागू है, जिसके तहत इस इस श्वान मालिक के विरुद्ध कानूनी कार्यवाही की जा सकती है।

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