चतुर कौआ : दुनिया का ऐसा पक्षी, जो मरते दम तक निभाता है दुश्मनी, देखिए मिसाल

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अहमदाबाद 3 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। मानव को ईश्वर की सबसे अच्छी रचना कहा गया है, क्योंकि उसके पास सोचने-समझने की शक्ति होती है, जिसे हम विवेक भी कहते हैं, परंतु क्या आप जानते हैं कि दुनिया में एक ऐसा पक्षी भी है जिसकी स्मृति शक्ति इंसानो से भी कहीं अधिक है ? इतना ही नहीं, वह अपनी दुश्मनी को मरते दम तक निभाता है। उस पक्षी को हम सभी भली-भाँति जानते और पहचानते हैं। वैसे तो कहानियों में उसे हमेशा धूर्त और चालाक पक्षी के रुप में ही दर्शाया जाता रहा है, परंतु क्या आप जानते हैं कि दुश्मनी निभाने में भी वह सबसे आगे है। कुरूप और कुरंगी दिखने वाला और लोगों की नज़रों में हेय माना जाने वाला कौआ अक्सर अपनी कर्कश आवाज़ के लिए भी लोगों के लिए परेशानी का सबब बन जाता है, परंतु आज हम आपको कौए के उन विकारों से अवगत नहीं कराएँगे, जिसके कारण लोग इस पक्षी से नफरत करते हैं, बल्कि ऐसी बातें बताएँगे, जो इस पक्षी को पक्षी जगत के अन्य पक्षियों से अलग करती हैं।

कौए की सबसे बड़ी विशेषता यह है कि किसी भी प्राणी के साथ दुश्मनी को मरते दम तक निभाता है। उसकी दुश्मनी के शिकार कई बार इंसान भी हो जाते हैं। कई ऐसे किस्से भी हमारे सामने आते हैं, जिसमें कौए की दुश्मनी से लोगों का घर से निकलना दूभर हो जाता है। ऐसा ही एक मामला मध्य प्रदेश भी सामने आया है, जहाँ कौए की मदद करने वाला एक व्यक्ति कौए की नज़र में उसका दुश्मन बन गया है। यह व्यक्ति पिछले तीन वर्षों से परेशान है। जी हाँ, एक कौआ जो पिछले तीन सालों से एक व्यक्ति को हर दिन चोंच मार कर अपनी दुश्मनी निकाल रहा है। माना जाता है कि ‘मादा’ कौआ अपने बच्चे और कौए के लिए जान भी दे सकती है और जान ले भी सकती है। मध्य प्रदेश के इस रोचक किस्से के बारे में बताने से पहले आइए आपको कौए से जुड़ी कुछ खास बातें बताते हैं।

किस्से और कहानियाँ का चालाक कौआ क्यों है ‘एकाक्षी’ ?

कौआ, क्रॉ (CROW), कागा, काक, करठ, काग, पिशुन, वायस आदि नामों से पुकारे जाने वाले कौए के किस्से और कहानियाँ सतयुग के ग्रंथों से लेकर कलयुग की किताबों तक में मौजूद हैं। रामायण के अनुसार वनवास के दौरान एक पेड़ के नीचे जब श्रीराम सीता के बालों में फूलों की वेणी लगा रहे थे, तब इंद्रपुत्र जयंत ईर्ष्यावश कौए का रूप धारण कर सीता के पैरों पर चोंच मारने लगा। यह देख राम ने बाण से उस कौए (जयंत) की एक आँख फोड़ दी, तब से कौए को एकाक्षी माना जाता है। आज भी कौआ किसी वस्तु को अपनी एक आँख से ही देक पाता है, क्योंकि कौए के दोनों आँखों से एक साथ देखने वाला क्षेत्र अधिकतर संकुचित होता है। कौए को यमराज का वाहन भी जाना जाता है तथा श्राद्ध पक्ष में तो इनका खास ही महत्व होता है। हिन्दू धर्म में मान्यता है कि श्राद्ध पक्ष के दौरान पितृ कौए के रूप में धरती पर आते हैं। राजस्थान में एक बहुप्रचलित कहावत है, ‘मलके माय हाडा काळ’ अर्थात दुष्ट व्यक्ति हर जगह पाए जाते हैं। अमेरिका की यूनिवर्सिटी ऑफ वॉशिंगटन के शोधकर्ता भी इस बात को मानते हैं कि कौओं की स्मृति बहुत तेज़ होती है। कौए उस इंसान का चेहरा हमेशा याद रखते हैं, जिसने कभी भी कौए, उसके घोंसले या उसके बच्चे को हानि पहुँचाई हो या ऐसी कोई कोशिश भी की हो।

शुभ और अशुभ संकेत देते हैं कौए

कौवा को शुभ और अशुभ संकेत देने वाला भी माना जाता है। लोगों का ऐसा मानना है कि यदि मादा कौआ जोड़े में अंडे देती है तो बहुत ही शुभ होने वाला होता है वहीं इसके विपरीत यदि वह 3 अंडे दे तो यह सूखा के संकेत होते हैं। ये बात तो आप भी मानते होंगे कि जब कौआ घर की छत पर “काँव-काँव” करता है, तब घर में कोई मेहमान अवश्य आता है। पुरानी परंपरा के अनुसार यदि किसी के सिर पर कौआ बैठ जाए, तो वह अपने किसी रिश्तेदार को झूठा पत्र लिखता है कि उसकी मृत्यु हो गई है। जिसे सुनकर परिजन शोक मनाए और उस व्यक्ति पर आने वाली मुसीबत टल जाए।

जिसने बचाई बच्चों की जान, उसकी जान आफत में

यह तो बात हुई कौए से जुड़ी मान्यताओं और कहानियों की। आइए अब जानते हैं मध्य प्रदेश का वह किस्सा, जिसमें एक व्यक्ति पिछले तीन वर्ष से कौए की दुश्मनी से परेशान है और उसकी जान पर बन आई है। दरअसल शिवपुरी जिले के सुमेला गाँव में एक कौए का बच्चा लोहे की जाल में फँस गया। गाँव में ही रहने वाले शिवा कटेल नामक व्यक्ति के मन में जाल में फँसे कौए के बच्चे को देख कर दया जागी। शिवा उसे बचाने पहुँचे, परंतु शिवा को क्या पता था कि एक पक्षी की जान बचाना उनके लिए परेशानी का कारण बन जाएगा। शिवा ने लोहे की जाली में फँसे एक कौए के बच्चे को जाली से बाहर तो निकाल लिया, परंतु कौए के बच्चे ने शिवा के हाथ में ही दम तोड़ दिया। अपने बच्चे को किसी इंसान के छूते ही बच्चे की माँ (मादा कौआ) ने शिवा पर ताबड़तोड़ हमले शुरू कर दिए। शिवा ने तो बच्चे की जान बचाने की कोशिश की थी, परंतु कौए को कौन समझाए। वह तो शिवा को दुश्मन ही समझ रहा है और आज तीन साल बाद भी वह शिवा का पीछा नहीं छोड़ रहा। यह मादा कौआ शिवा को अपना दुश्मन मान कर लगातार उस पर हमला करता है। इतना ही नहीं यह कौआ हर रोज अपने झुंड के साथ शिवा पर हमला करता है और अपनी चोंच से शिवा को घायल कर जाता है। घर से निकलते ही शिवा पर आसमानी आक्रमण होने लगता है, जो उनके जीवन में परेशानी का करण बना हुआ है। हालत यह हो गई है कि शिवा को अपने घर से निकलते हुए साथ में लकड़ी भी लेनी पड़ती है, ताकि उन पर हमला करने वाले कौए को भगाया जा सके।

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