बन रही है IAS दुर्गा पर फिल्म, जिन्होंने रेत खनन माफियाओं का दुर्ग तोड़ा…

Written by

* अखिलेश सरकार ने कर दिया था निलंबित

* मोदी सरकार ने OSD बना कर दिया सम्मान

आलेख : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 10 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय फिल्म जगत यानी BOLLYWOOD लगातार समाज के ऐसे साहसी और ऐतिहासिक पात्रों व चेहरों को दर्शकों के सामने प्रस्तुत कर रहा है, जिनसे नई युवा पीढ़ी को प्रेरणा मिले। बॉलीवुड इसी कड़ी में देश की एक युवा आईएएस अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल के जीवन पर फिल्म बनाने जा रहा है। भारतीय प्रशासनिक सेवा (IAS) की पंजाब कैडर की अधिकारी दुर्गा शक्ति नागपाल ने 2011 में पंजाब के मोहाली से अपने कैरियर का आरंभ किया था। दुर्गा ने मोहाली में ही कई भूमि घोटालों का पर्दाफ़ाश कर अपना रौद्र रूप दिखा दिया था और यह संकेत भी दे दिया था कि वे लंबी रेस की खिलाड़ी हैं। वे एक आईएएस अधिकारी के रूप में अपने कर्तव्य पथ पर आने वाले हर दबाव और विघ्न का साहसपूर्वक सामना करेंगी और ऐसा ही उन्होंने किया भी। यही कारण है कि आईएएस दुर्गा आज मोदी प्रशासन में कार्यरत् हैं। प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने देश की कमान संभालने के कुछ ही महीनों बाद जनवरी-2015 में दुर्गा शक्ति नागपाल को केन्द्रीय कृषि एवं कृषक कल्याण विभाग में विशेष कार्याधिकारी (OSD) के रूप में नियुक्त किया।

जब आईएएस ही बन कर दम लिया

25 जून, 1985 को उत्तर प्रदेश के आगरा में जन्मीं नागपाल की कहानी फिल्मी पर्दे पर उतारने का बीड़ा एज्योर एंटरटेनमेंट के सुनीर खेत्रपाल ने उठाया है, जो इससे पहले बदला व केसरी जैसी फिल्में बना चुके हैं। समाचार यह है कि रुपहले पर्दे पर आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल की भूमिका अभिनेत्री भूमि पेडनेकर निभाने वाली हैं। भूमि के लिए यह भूमिका कितनी चुनौतीपूर्ण होगी, यह तो समय ही बताएगा, परंतु रील लाइफ की सख़्त आईएएस अधिकारी दुर्गा ने आज जो मुक़ाम हासिल किया है, उसमें उन्हें कई बार कठिनाइयों का सामना करना पड़ा। दुर्गा के पिता सरकारी अधिकारी थे और दिल्ली केंटोनमेंट बोर्ड में सराहनीय सेवाओं के लिए उन्हें राष्ट्रपति पदक मिला था, तो दादा भी पुलिस अधिकारी थे, जिनकी 1954 में दिल्ली के सदर बाज़ार में ड्यूटी के दौरान हत्या कर दी गई थी। यद्यपि दुर्गा के मनोमस्तिष्क में तो आईएएस अधिकारी बनने की धुन सवार थी। दुर्गा ने इंदिरा गांधी दिल्ली तकनीकी विश्वविद्यालय (IGDTU) से 2007 से स्नातक की डिग्री हासिल की। साथ ही कम्प्यूटर इंजीनियरिंग की अंडर ग्रेजुएट डिग्री भी हासिल की। इसके बाद दुर्गा ने 2009 में पहली बार संघ लोक सेवा आयोग (UPSC) की परीक्षा दी। वे पहले ही प्रयास में 20वीं रैंक के साथ उत्तीर्ण हुईं। यद्यपि इससे पहले दुर्गा का भारतीय राजस्व सेवा (IRS) में चयन हो गया था, परंतु दुर्गा ने आईएएस अधिकारी बनना ही पसंद किया। उन्होंने आईएएस अधिकारी अभिषेक सिंह के साथ विवाह किया, जो आईएएस की पढ़ाई के दौरान उनके सहपाठी थे।

अवैध रेत खनन माफियाओं पर चलाया बुल्डोज़र

आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल देश में पहली बार तब चर्चा में आईं, जब उन्हें 2012 में उत्तर प्रदेश प्रशासन में नियुक्त किया गया। उस समय मुख्यमंत्री अखिलेश यादव थे। वास्तव में दुर्गा ने 2012 में अभिषेक सिंह से विवाह के बाद यूपी कैडर जॉइन किया। दुर्गा को गौतम बुद्ध नगर के सब डिविज़नल मजिस्ट्रेट (SDM) के रूप में नियुक्त किया गया। दुर्गा इसी दौरान जनता के बीच गईं और उन्होंने ग्रेटर नोएडा में अवैध रेत खनन के विरुद्ध अभियान छेड़ा। दुर्गा के नेतृत्व में विशेष जाँच टीम ने यमुना व हिंडन नदी तट क्षेत्रों में अवैध रेत खनन माफियाओं के विरुद्ध अभियान छेड़ा। इस दौरान 24 डम्पर ट्रक, 300 ट्रॉली सहित 15 लोगों को जेल की सलाखों के पीछे डाल दिया गया। इतना ही नहीं, इस अभियान के दौरान 2 करोड़ का दंड भी वसूला गया।

नेताओं की राजनीति का शिकार भी बनीं दुर्गा

आईएएस दुर्गा शक्ति नागपाल जब अवैध रेत खनन के विरुद्ध अभियान चला रही थीं, उस समय उत्तर प्रदेश में समाजवादी पार्टी (SP-सपा) की सरकार थी और अखिलेश यादव मुख्यमंत्री थे। अखिलेश यादव ने 28 जुलाई, 2013 को निलंबित कर दिया था, क्योंकि दुर्गा ने अपने कर्तव्य के आड़े धर्म या राजनीति को नहीं आने दिया। दरअसल दुर्गा शक्ति नागपाल के अवैध रेत खनन के विरुद्ध अभियान के दौरान ग्रेटर नोएडा के रबुपुरा क्षेत्र में कदालपुर गाँव में एक निर्माणाधीन मस्जिद की दीवार ढहा दी गई। आरोप ये लगाए गए कि दुर्गा की उपस्थिति में प्रशासन ने मस्जिद की दीवार ढहाई, जिसके चलते तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव ने उन्हें निलंबित कर दिया।

दुर्गा के समर्थक व मीडिया सूत्रों ने दावा किया कि दुर्गा ने दीवार गिराने का न तो आदेश दिया और न ही वे मौक़े पर हाज़िर थीं। दूसरी तरफ कदलपुर गांव के लोगों का दावा था कि दुर्गा के निरीक्षण में दीवार ढहाई गई। उत्तर प्रदेश सरकार ने दुर्गा के विरुद्ध आरोपपत्र दाखिल किया। दुर्गा ने अपने स्पष्टीकरण में कहा कि वे निर्दोष, हैं और उनकी कार्रवाई सुप्रीम कोर्ट के निर्देशानुसार तथा नागरिक सेवा के नियमों के अनुसार थी। अखिलेश सरकार यहीं नहीं रुकी। उसने दुर्गा का समर्थन करने वाले नोएडा जिला मजिस्ट्रेट (DM) रविकांत सिंह का भी तबादला कर उन्हें प्रतीक्षा सूची में डाल दिया। इस बीच दुर्गा के पति अभिषेक ने सीएम अखिलेश से मुलाक़ात की और 22 सितंबर, 2013 को अखिलेश सरकार ने दुर्गा का निलंबन वापस लेकर उन्हें 5 अक्टूबर, 2013 को कानपुर (ग्रामीण) की संयुक्त मजिस्ट्रेट (JDM) नियुक्त किया।

Article Categories:
News

Comments are closed.

Shares