प्लास्टिक से मुक्ति का नया उपाय जानिए इस ‘ज़मीनी’ IAS अधिकारी से

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रिपोर्ट : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 25, सितंबर 2019 (युवाPRESS)। पर्यावरण की रक्षा के लिये काम करने वाली स्वीडन की 16 साल की एक कार्यकर्ता ग्रेटा थुनबर्ग ने सोमवार को अमेरिका के न्यू यॉर्क में संयुक्त राष्ट्र संघ के शिखर सम्मेलन में दुनिया भर के नेताओं को कड़े शब्दों में डाँटते हुए कहा कि क्लाइमेट चेंज पर बड़े बड़े दावे और बातें करने के बजाय ज़मीनी स्तर पर काम करना होगा। इससे पहले भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी ने 2018 के विश्व पर्यावरण दिवस पर विश्व समुदाय से सिंगल यूज़ प्लास्टिक से मुक्त होने की अपील की थी। इसके बाद पीएम मोदी ने पिछले महीने स्वतंत्रता दिवस को देशवासियों का प्लास्टिक मुक्त होने के लिये आह्वान किया था। साथ ही सरकार ने इस अभियान को 11 सितंबर से 2 अक्टूबर गांधी जयंती तक मनाये जा रहे स्वच्छता ही सेवा अभियान में भी शामिल किया है। पीएम मोदी के आह्वान पर देश भर में प्लास्टिक से मुक्ति के लिये अलग-अलग स्तर पर मुहिम चलाई जा रही है, परंतु पूर्वोत्तर के एक राज्य मेघालय के डीएम आईएएस अधिकारी राम सिंह तो काफी पहले से ही अपनी अनूठी जीवन शैली से लोगों को प्लास्टिक से मुक्त होने का संदेश देते आ रहे हैं।

साधारण जीवन जीने वाले असाधारण IAS राम सिंह

भावी छात्र या छात्राएँ भारतीय प्रशासनिक सेवा (Indian Administrative Service- IAS) या किसी भी रैंक की सरकारी नौकरी पाने के लिए दिन रात एक कर देते हैं, ताकि उन्हें एक आरामदायक और सुखी जीवन मिल सके। सरकारी नौकरी का एक फायदा यह भी होता है कि वह स्थाई होती है। प्राइवेट नौकरियों की तरह बार-बार बदलनी नहीं पड़ती। सरकारी नौकरी मिलने पर लोग गाड़ियों से आना-जाना और बड़ी-बड़ी दुकानों से चीजें खरीना पसंद करते हैं, पैदल चलना और स्थानीय लोगों से सामान खरीदना तो दूर की बात है, परंतु आज हम किसी सरकारी अफसर पर तंज या उपहास करने नहीं जा रहे, अपितु आपको एक ऐसे IAS ऑफीसर से मिलवाने जा रहे हैं, जिनके पास वह सभी सरकारी सुख-सुविधाएँ हैं, जो एक IAS अधिकारी के पास होनी चाहिए। इसके बावजूद इस अधिकारी को मीलों पैदल चलना और स्थानीय लोगों से सब्जी खरीद कर खाना पसंद है। आइए मिलाते हैं आपको मेघालय के उपायुक्त और जिला अधिकारी राम सिंह से। वर्तमान में राम सिंह मेघालय के वेस्ट हिल्स में उपायुक्त (Deputy Commissioner) और जिला अधिकारी (District Magistrate) के पद पर कार्यरत हैं।

अपनी कार्यशैली से लोगों के लिये बन रहे मिशाल

राम सिंह हिमाचल प्रदेश के रहने वाले हैं। राम सिंह ने अपनी स्कूली और कॉलेज की पढ़ाई हिमाचल प्रदेश में ही पूरी की है। उन्होंने नौटिकल साइंस (Nautical Science) से बीएससी और सार्वजनिक नीति (Public Policy) से एमए किया है। राम सिंह बचपन से ही आईएएस अधिकारी बनने का सपना देख रहे थे। इस सपने को पूरा करने के लिए राम सिंह ने एमए करने के बाद 2008 में असम मेघालय कैडर से आईएएस किया। आईएएस करने के बाद राम सिंह की पहली नियुक्ति 1 सितंबर, 2010 को अनुविभागीय अधिकारी (Sub-Divisional Officer) के तौर पर मेघालय के रसूबेलपारा (Resubelpara) में हुई, जहाँ उन्होंने 2012 तक कार्य किया। इसके बाद मई 2012 में राम सिंह की नियुक्ति बतौर अतिरिक्त उपायुक्त (Additional Deputy Commissioner) मेघालय में वेस्ट गारो हिल्स के तुरा (West Garo Hills,Tura, Meghalaya) में हुई, परंतु जुलाई में ही उनका तबादला कर दिया गया और वह अगस्त 2012 से जुलाई 2016 तक मेघालय में साउथ वेस्ट गारो हिल्स के अमपाती (South West Garo Hills,Ampati, Meghalaya) में बतौर उपायुक्त (Deputy Commissioner) नियुक्त रहे। इसके बाद राम सिंह ने जुलाई 2016 से नवंबर 2017 तक मेघालय के शिलांग (Shillong, Meghalaya) में अतिरिक्त सचिव, मत्स्य, खेल और युवा मामले विभाग, निदेशक, मत्स्य और निदेशक (Additional Secretary to the Government of Meghalaya, Fisheries, Sports & Youth Affairs Department) और उच्च और तकनीकी शिक्षा (Director, Fisheries and Director, Higher & Technical Education) पदों पर कार्य किया। इसके बाद 1 दिसंबर, 2017 को वह मेघालय में वेस्ट गारो हिल्स के उपायुक्त और जिला मजिस्ट्रेट नियुक्त हुए और तब से अपने नित नए कार्यों से लोगों को चौका रहे हैं।

खुद बाजार से सब्जियाँ खरीद कर लाते हैं ये ऑफीसर

दरअसल राम सिंह की एक तसवीर सोशल मीडिया में वायरल हुई है जिसमें वह अपनी पीठ पर सब्जी की टोकरी लिए पैदल चलते दिखाई दे रहे हैं। उन्होंने अपने फेसबुक पेज पर स्वयं भी इस बात की पुष्टि की है कि वह सप्ताह की छुट्टी में 21 किलो सब्जी स्वयं की पीठ पर लाद कर 12 किलोमीटर चलते हुए अपने घर जाते हैं, जिससे वह फिट रह सकें। उनका यह भी कहना है कि इससे दूसरों को भी प्रेरणा मिलेगी। पिछले 6 महीने से वह इस कार्य को कर रहे है, जिसमें उनकी पत्नी भी सहयोग करती हैं। राम सिंह का कहना है कि बाँस से बनी टोकरी में सब्जी लाने से पर्यावरण भी शुद्ध रहता है और ट्रैफिक से भी मुक्ति मिल जाती है साथ ही पर्यावरण को दूषित करने वाली प्लास्टिक की पॉलिथीन से भी छुटकारा मिलता है।

खेतों में करते हैं काम और चलाते हैं साइकिल

सिंह को देख उनके आसपास के कई अधिकारी और स्थानीय लोग भी अब उनके बताये रास्ते पर चलने लगे हैं। लोग बाजार में ऑर्गेनिक सब्जी खरीदते हैं, बाँस से बनी टोकरी का प्रयोग कर रहे हैं और सबसे बड़ी बात पैदल चल कर ट्रैफिक को भी कम करने में योगदान दे रहे हैं। राम सिंह सबके लिये एक मिशाल बन कर सामने आये हैं। एक अधिकारी होने के बाद भी वह 12 किलोमीटर का लंबा सफर तय कर 21 किलो सब्जी अपनी पीठ पर लाद कर बाजार से घर जाते हैं, इतना ही नहीं, कई बार तो वह खेतों में काम कर रहे कृषकों के साथ भी उनका हाथ बँटाने से पीछे नहीं रहते। फिटनेस प्रेमी राम सिंह नियमित रुप से साइकिल चलाते हैं। दौड़ लगाते हैं और मैराथन में भी हिस्सा लेते हैं।

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