क्या अब तक के सबसे कमजोर पाकिस्तानी शासक हैं इमरान ?

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रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 25 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। पड़ोसी देश पाकिस्तान वर्तमान में काफी खराब दौर से गुजर रहा है। आतंकवाद को लेकर वो चारों ओर से घिर गया है। अब तो खुद पाकिस्तान के पीएम इमरान खान भी टूट कर बिखर चुके हैं। उन्होंने स्वीकार किया है कि कश्मीर मामले में उनकी हार हुई है। उन्हें अंतर्राष्ट्रीय समुदाय से इच्छित समर्थन नहीं मिल रहा है। एक बयान में तो उन्होंने टीवी एंकर से यह तक कह दिया कि ‘मेरी जगह आप होते तो हार्ट अटैक आ जाता।’ इस बयान में एक तरफ इमरान खान की निराशा झलक रही है, वहीं इसमें उनकी बड़ी नाकामी की भी झलक मिलती है।

अमेरिका से खाली हाथ लौटेंगे इमरान ?

अभी भारत और पाकिस्तान दोनों देशों के पीएम अमेरिका में हैं, जहाँ संयुक्त राष्ट्र संघ की महासभा में भाग लेने के लिये ये दोनों पहुँचे हुए हैं। इस बीच दोनों ही देश के पीएम ने अमेरिकी राष्ट्रपति डोनाल्ड ट्रंप से मुलाकात की, परंतु एक तरफ जहाँ भारत के पीएम नरेन्द्र मोदी और ट्रंप के मैत्री संबंधों की चर्चा जोरों से हो रही है। वहीं पाकिस्तानी पीएम की चर्चा उनकी नाकामियों को लेकर हो रही है। ट्रंप ने जिस तरह से पाकिस्तानी पीएम की खबर ली, उसका अंदाजा इमरान खान की सूरत देख कर लगाया जा सकता है। संभावना तो यह है कि इमरान खान अपने देश के लिये अमेरिका से कुछ लेकर नहीं आने वाले, जबकि मोदी अपने देश के लिये वहाँ से काफी कुछ ला सकते हैं।

इमरान की उपलब्धि है सिर्फ नाकामी !

इमरान खान के बयानों में झलकती उनकी निराशा और नाकामी से बड़ा सवाल उठता है कि क्या इमरान खान पाकिस्तान के सबसे कमजोर हुक्मरान हैं। क्योंकि इतना दर्द तो 1965, 1971 के युद्ध और 1999 के करगिल युद्ध में शिकस्त के बाद भी किसी पाकिस्तानी शासक के मुख से नहीं निकले होंगे, जैसे शब्द इमरान खान ने इस्तेमाल किये हैं। 18 अगस्त 2018 में पाकिस्तान के 22वें पीएम बने इमरान खान एक साल और 38 दिन के शासन में ही इतने क्यों टूट गये। दरअसल उनका यह दर्द इसलिये है क्योंकि उन्होंने अभी तक के अपने पूरे कार्यकाल में सिर्फ नाकामियों का ही कड़वा घूँट पिया है, उन्हें सफलता का स्वाद कभी चखने को ही नहीं मिला। इतना ही नहीं, इस एक साल में पाकिस्तान अब तक के सबसे खराब दौर में पहुँच गया है। उन्होंने बतौर प्रधान मंत्री उनके समक्ष जो परेशानियाँ और चुनौतियाँ हैं, उनका अपने इस बयान में जिक्र किया। उन्होंने कहा कि अफगानिस्तान की समस्या, ईरान की समस्या, अभी तो उनका मित्र चीन भी उनसे नाराज़ चल रहा है। इसके अलावा भारत के साथ भी तनाव पैदा हो गया है। उनके ही बयान के अनुसार वो चारों ओर से मुश्किलों में घिर गये हैं।

पाकिस्तान की सभी समस्याओं की जड़ है आतंकवाद !

हालाँकि उन्होंने उन समस्याओं का जिक्र नहीं किया, जो उनकी इन सभी समस्याओं की जड़ हैं। वास्तव में पाकिस्तान की सबसे बड़ी समस्या है आतंकवाद, जिसने उसे सभी तरह की मुश्किलों में डाला हुआ है, परंतु पाकिस्तान है कि इस समस्या को समस्या के रूप में देखने के बजाय उसे अपनी ताकत समझने की भूल कर रहा है।

अमेरिका को ही आँखें दिखाने लगे इमरान ?

पाकिस्तान को ट्रंप से डाँट पड़ी और अपेक्षित सहयोग नहीं मिला तो अब यही इमरान कह रहे हैं कि पाकिस्तान को 9-11 हमले के बाद अमेरिका की मदद करने का वादा नहीं करना चाहिये था। हालाँकि यह वादा उन्होंने नहीं, बल्कि तत्कालीन हुक्मरानों ने किया था, परंतु जब वे वादा निभा नहीं सकते थे, तो उन्हें वादा भी नहीं करना चाहिये था। जब अमेरिका ने अफगानिस्तान पर हमला किया था, तब भी पाकिस्तान को अमेरिका की मदद नहीं करनी चाहिये थी। अब पाकिस्तानी पीएम अमेरिका को आँखें दिखा रहे हैं और कहते हैं कि वह संयुक्त राष्ट्र संघ से कश्मीर में दखल देने की माँग करेंगे। जबकि एक बयान में वह खुद स्वीकार कर चुके हैं कि कश्मीर मामले में उनकी हार हुई है और उन्हें अंतर्राष्ट्रीय समुदाय का इच्छित सहयोग नहीं मिला। इसके बावजूद वह कश्मीर मामले को छोड़ने के लिये तैयार नहीं हैं।

पाक के दुश्मन नहीं, शुभ चिंतक हैं भारत-अफगानिस्तान

पाकिस्तान अपनी समस्याओं की जड़ तक जाना ही नहीं चाहता है, जिस जड़ ने टहनियों के रूप में विभिन्न समस्याओं को जन्म दिया है। इमरान खान कहते हैं कि वह पड़ोसी देशों भारत, अफगानिस्तान और ईरान से परेशान हैं, जबकि अमेरिकी प्रमुख डोनाल्ड ट्रंप ने उन्हें इसका भी जवाब दे दिया कि जिसे वह दुश्मन समझने की भूल कर रहे हैं, दरअसल वही उसके शुभचिंतक हैं।

एक मात्र आतंकवाद के कारण पाकिस्तान की अर्थ व्यवस्था चौपट हुई है। देश-दुनिया में उसने भरोसा खोया है, तो इसके पीछे भी आतंकवाद ही है। हर दिन उसे आतंकवाद के कारण ही नई नई फजीहत सहन करनी पड़ती है, जबकि पाकिस्तान है कि वह इसी आतंकवाद को भारत, अफगानिस्तान और ईरान के खिलाफ हथियार के रूप में इस्तेमाल करने में जुटा हुआ है, वह आतंकवाद को अपनी ताकत समझने की भूल कर रहा है।

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