है आपमें कौशल ? तो बढिये आगे, मोदी सरकार थामेगी हाथ और मिलेंगे दाम भी

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कम पढ़े लिखे लोगों के लिए वरदान सिद्ध हो रही है PMKVY

भारतीय संस्कृति में नौकरी यानी सेवा को अंतिम विकल्प माना जाता है और अव्वल खेती मध्यम व्यापार की नीति रही है, परन्तु वर्तमान समय में अव्वल खेती को अंतिम पायदान पर धकेल दिया गया है और नौकरी को सर्वाधिक प्राथमिकता दी जाने लगी है। हालाँकि प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने युवाओं को अपना उद्योग शुरू करके उद्योगपति बनाने के लिये कौशल विकास योजना शुरू की है, तो यदि आप में भी कौशल है ? तो आगे बढ़िये। सरकार आपका हाथ थामेगी और आपको आजीविका का श्रेष्ठ साधन भी उपलब्ध करायेगी।

पहले के जमाने में कुम्हार की संतान अपने पिता से विरासत में मिट्टी के बर्तन बनाने की कला सीखती थी और इसी प्रकार लुहार की संतान अपने पिता से लोहे को पिघलाकर उससे हथियार और कृषि औजार सहित विविध वस्तुएँ बनाने की कला सीखते थे, पंडित की संतान क्रियाकांड और विद्यादान की विद्या सीखती थी और क्षत्रिय-वैश्य भी अपने पूर्वजों की विरासत को अपनाते थे, जिससे रोजगार की कोई समस्या ही नहीं होती थी। हालाँकि अब समय बदलने के साथ सबकुछ बदल गया है, वह वर्णप्रथा पुरानी हो गई है। अब कंप्यूटर युग में रोजगार के संसाधन भी बदल गये हैं।

इसीलिये पीएम मोदी ने ‘प्रधानमंत्री कौशल विकास योजना (PMKVY)’ योजना लागू की है, जिसका उद्देश्य देश के युवाओं को उनकी प्रतिभा के अनुसार कौशल विकास का प्रशिक्षण देकर सक्षम बनाना है, जिससे कि युवा प्रशिक्षित होकर स्वयं का उद्योग स्थापित कर सके और विपुल धन कमा सके। पीएमकेवीवाई योजना केन्द्र सरकार की फ्लैगशिप योजनाओं में से एक है, जो कौशल विकास एवं उद्यमता मंत्रालय द्वारा चलाई जाती है। यह योजना देश में बड़े पैमाने पर विशेषकर ग्रामीण और कम पढ़े-लिखे, कक्षा-10-12 तक पढ़े या ड्रॉप आउट (बीच में ही पढ़ाई छोड़ देने वाले) युवाओं को उद्योगों से जुड़े कौशल का प्रशिक्षण देकर रोजगार पाने में उनकी मदद कर रही है। इस प्रशिक्षण के लिये आपकी फीस भी सरकार ही भरपाई करती है। इतना ही नहीं, प्रशिक्षण के दौरान सरकार आपको भी लगभग 8,000 रुपये की पुरस्कार राशि देती है। इस योजना के तहत सरकार ने 2020 तक एक करोड़ युवाओं को कौशल प्रशिक्षण देने का लक्ष्य निर्धारित किया है।

सरकार की इस योजना से जुड़ने की प्रक्रिया बिल्कुल आसान है। आवेदक को इस योजना की वेबसाइट पर जाकर अपना नाम, पता और मोबाइल तथा ई-मेल आदि जानकारी भरकर नामांकन करना होता है। फॉर्म भरने के बाद आवेदक को जिस तकनीकी क्षेत्र का प्रशिक्षण चाहिये होता है, उसका चयन करना होता है। इस योजना में कंस्ट्रक्शन, इलेक्ट्रोनिक्स एण्ड हार्डवेयर, फूड प्रोसेसिंग, फर्नीचर, फिटिंग्स, हैंडीक्राफ्ट, जेम्स एण्ड ज्वैलरी, लेदर टेक्नोलॉजी आदि सहित लगभग 40 तकनीकी क्षेत्रों के विकल्प दिये गये हैं। आवेदक को अपने पसंदीदा तकनीकी क्षेत्र के साथ-साथ एक अतिरिक्त विकल्प का भी चयन करना होता है, ताकि यदि किसी कारण से आवेदक को अपने पसंदीदा तकनीकी क्षेत्र का प्रशिक्षण न मिल सकता हो तो उस अतिरिक्त तकनीकी क्षेत्र में आवेदक को प्रवेश मिल सके। यह जानकारियाँ भरने के बाद आवेदक को अपने नजदीकी ट्रेनिंग सेंटर का चयन करना होता है।

इस ट्रेनिंग सेंटर में 3 महीने, 6 महीने तथा 1 वर्ष के लिये रजिस्ट्रेशन किया जाता है। कोर्स पूरा होने के बाद प्रमाणपत्र दिया जाता है, जो पूरे देश में मान्य होता है। इस योजना में ट्रेनिंग के बाद सरकार प्रशिक्षित व्यक्ति की आर्थिक सहायता करने के साथ ही उसे नौकरी दिलाने में भी मदद करती है। रोजगार मेलों के माध्यम से सरकार ऐसे युवाओं को विविध तकनीकी क्षेत्रों में रोजगार दिलाती है। कोर्स पूरा होने के बाद स्वीकृत मूल्याँकन एजेंसी द्वारा मूल्याँकन किया जाता है, यदि आवेदक मूल्याँकन पास कर लेता है और आवेदक के पास वैध आधार कार्ड है तो आवेदक को सरकार की ओर से प्रमाणपत्र तथा स्किल कार्ड दिया जाता है। हालाँकि मूल्याँकन में पास नहीं होने पर निराश होने की जरूरत नहीं है, क्योंकि आवेदक कई बार या बार-बार अपना मूल्याँकन करवा सकते हैं, परंतु इसके लिये उन्हें हर बार मूल्याँकन शुल्क भरना पड़ेगा, तो इस तरह पीएम की इस योजना का लाभ लेकर आप भी अपने पसंदीदा क्षेत्र में रोजगार पा सकते हैं।

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