कौन हैं ये ‘प्रेम’, जिनकी दरियादिली उन्हें बिल्डर से अलग बनाती है ?

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अहमदाबाद 18 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। रीयल एस्टेट यह एक ऐसा क्षेत्र है, जहाँ हर व्यवसायी पर पैसे कमाने की धुन सवार होती है। लोगों के मन में एक बिल्डर की छवि अधिकांशत: नकारात्मक होती है। ऐसे कई केस हैं, जहाँ बिल्डर्स लोगों से धोखाधड़ी भी करते हैं, कई बिल्डर तो पैसा लेकर भाग जाते हैं। आम्रपाली केस एक जीता-जागता और ताज़ा उदाहरण है, परंतु इस नकारात्मक छवि से हट कर देश में एक बिल्डर ऐसे भी हैं, जिनकी दरियादिली ने पूरे देश और विशेषकर देश की सरकार व सेना का दिल जीत लिया है।

दरयानानी कन्स्ट्रकशन कंपनी प्राइवेट लिमिटेड का नाम तो सुना होगा। ये रीयल एस्टेट कंपनी अन्य कंपनियों से हट कर है, जो एक बिल्डर की आम छवि से अलग काम कर रही है। इसके संस्थापक का नाम है प्रेम दरयानानी। इस कंपनी की स्थापना 4 मार्च, 1980 को हुई थी। यह एक ग़ैर सरकारी कंपनी है, जिसके निदेशकों में प्रेम कल्याणदास दरयानानी और रोहन प्रेम दरयानानी शामिल हैं। पिछले 39 वर्षों से रीयल एस्टेट क्षेत्र में कार्यरत् प्रेम दरयानानी का बिल्डर से इतर एक समाज सेवक का भी रूप है। दक्षिण मुंबई के वालकेश्वर के रहने वाले 71 वर्षीय प्रेम दरयानानी ने मुंबई के गवर्नमेंट लॉ कॉलेज से स्नातक की उपाधि हासिल की है। साथ ही उन्होंने सामाजिक विज्ञान में पीएचडी भी किया है। वे दो दशकों से रियल एस्टेट कारोबार में हैं। वह सेना के प्रति आभार व्यक्त करने के लिए समय समय पर दान देते रहते हैं। यद्यपि वे मानव समाज सेवा के लिए 31 वर्षों से कार्यरत् हैं। उन्होंने मानव समाज सेवा के लिए अक्टूबर-1982 में राधा कल्याणदास दरयानानी चैरिटेबल ट्रस्ट की स्थापना की। प्रेम दरयानानी इस ट्रस्ट के अध्यक्ष हैं। व्यवसाय से बिल्डर होने के बावजूद प्रेम दरयानानी ने इस ट्रस्ट को समाज सेवा का माध्यम बनाया और पिछले कुछ समय से वे सेना और शहीद जवानों के लिए ट्रस्ट के जरिए किए जाने वाले कार्यों के कारण विख्यात हो गए हैं।

सेना के लिए सबसे बड़े दानवीर बने दरयानानी

प्रेम दरयानानी इस समय अपने ट्रस्ट के जरिए सेना को व्यक्तिगत स्तर पर सबसे बड़े दान देने वाले व्यक्ति के तौर पर जाने जाते हैं। उन्होंने लोनावला के कान्हेगांव में अपनी दो एकड़ की जमीन सेना को दान दे दी है, ताकि वहाँ पर महाराष्ट्र में पहला और देश के दूसरे सेना लॉ कालेज का विस्तार हो सके। इस जमीन की बाज़ार में कीमत करीब 25 करोड़ बताई जा रही है। सेना की सेवा का ज़ुनून रखने वाले प्रेम दरयानानी ने ट्रस्ट के जरिए दूसरी बार जमीन दान में दी है। प्रेम दरयानानी की दरियादिली वास्तव में प्रशंसनीय है। उन्होंने मार्च-2018 में सेना को पहला दान दिया था, जिसमें 6 तैयार बिल्डिंग और 4 एकड़ ज़मीन शामिल थी। अब प्रेम दरयानानी ने फिर दो एकड़ ज़मीन सेना को दान में दी है। इन सबकी कुल कीमत करीब 40 करोड़ रुपये मानी जा रही है। इस जमीन पर महाराष्ट्र में पहले और देश के दूसरे सेना लॉ कालेज का विस्तार होगा। इस लॉ कॉलेज का निर्माण साल 2017 से किया जा रहा है। इस इमारत पर ट्रस्ट द्वारा 12 इमारतों का निर्माण करवाया गया है, इसे भी दान में दिया गया है। इस जमीन और बिल्डिंग से सेना के लॉ कालेज का विस्तार होगा और दूसरे तथा तीसरे वर्ष के छात्रों को पढ़ाई का मौका मिलेगा। देश में सेना के लोगों के लिए दो ही लॉ कॉलेज हैं। पहला मोहाली-चंडीगढ़ में कई साल पहले बना था, जबकि दरयानानी ट्रस्ट के सहयोग से दूसरा लॉ कॉलेज पुणे के पास कान्हेगाँव में बनाया गया है। एक साल पहले इसका संचालन शुरू हो गया था।

प्रेम की दरियादिली पर देश फिदा

प्रेम दरयानानी ने वर्ष 1999 में कारगिल युद्ध के बाद खड़की में सेना के रिहैबिलिटेशन सेंटर में विवाहित अधिकारियों और कर्मियों के लिए छह मकानों का निर्माण किया था। उन्होंने 1990 में घोरपड़ी में राष्ट्रीय युद्ध स्मारक परियोजना के लिए 1 लाख रुपये से अधिक का दान दिया था। 2014 में, उन्होंने एक सैनिक के परिजनों को 40,000 रुपये का दान दिया, जो 1988 में गश्त के दौरान सियाचिन में मारा गया था। इससे पहले मार्च-2018 में उन्होंने कॉलेज के लिए 40 करोड़ की संपत्ति दान में दी थी।राधा कलिनदास दरयानानी ट्रस्ट के प्रमुख प्रेम दरयानानी का कहना है, इस दान का मुख्य मकसद देश के बाहरी और आंतरिक दुशमनों से निपटने के लिए अपनी जान की बाजी लगा देने वाली भारतीय सेना के प्रति सम्मान और प्यार दिखाना है। उनका मानना है कि भारतीय सेना के जवान हर खतरे का सामना करते हुए हमेशा सीमा पर चौकस रहते हैं। वो अपनी जान की बाजी लगा देते हैं, ताकि हम सुरक्षित रह सकें। यहां तक जब भी देश पर किसी प्राकृतिक या मानवीय आपदा का संकट आता है तो वो हमेशा मदद के लिए तैयार रहते हैं। प्रेम दरयानानी ने कहा कि नागरिकों की भी जिम्मेदारी है कि हम उनके लिए योगदान करें। इसी भावना के तहत ही अब समय है कि हम आम जनता को इस बारे में जागरूक करें। ये हमारा कर्तव्यह है कि हम सैनिकों और उनके परिवारों के साथ खड़े रहें। हर भारतीय चाहे वो व्यकितगत हो या कारपोरेट या फिर सामाजिक संगठन, सबका ये दायित्व है कि वो भारतीय सेना के साथ जुड़े रहने की भावना को आत्मसात करें। ताकि सेना को भरोसा हो कि पूरा देश उनके साथ एकजुट है। लोनावला के लॉ कालेज के दूसरे चरण का भूमिपूजन दक्षिणी कमान के कमांडर इन चीफ लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी के हाथों संपन्न हुआ। इस मौके पर दक्षिणी कमान के कई अफसर मौजूद थे। लेफ्टिनेंट जनरल एसके सैनी ने कहा कि सेना देश के लिए हमेशा तैयार रहती है और इस तरह आम लोगों के सेना के साथ जुड़ने से सेना का मनोबल बढ़ेगा।

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