अब इंसानों के सीने में धड़केगा इस प्राणी का दिल : जानिए कैसे ?

रिपोर्ट : विनीत दुबे

अहमदाबाद, 18 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। अब इंसानों के सीने में सूअर का दिल भी धड़क सकता है। एक प्रख्यात डॉक्टर ने यह दावा किया है। इस डॉक्टर के दावे के अनुसार मात्र 3 साल में डॉक्टर ऐसे हृदय ट्रांसप्लांट में कामयाबी हासिल कर लेंगे, जिससे सूअर के दिल को इंसान के सीने में ट्रांसप्लांट किया जा सके।

ब्रिटेन का पहला सफल हार्ट ट्रांसप्लांट करने वाले डॉक्टर का दावा

ब्रिटेन में 40 साल पहले प्रथम सफल हार्ट ट्रांसप्लांट करने के लिये जाने जाते डॉक्टर सर टेरेन्स इंग्लिश का कहना है कि इंसान के सीने में सूअर का दिल ट्रांसप्लांट करने से पहले सूअर की किडनी (गुर्दा) इंसानों में लगाकर प्रयोग किया जाएगा। यदि यह प्रयोग सफल हुआ तो हृदय ट्रांसप्लांट की दिशा में आगे बढ़ेंगे। डॉक्टर सर टेरेन्स इंग्लिश के अनुसार उनके एक सहयोगी डॉक्टर इसी वर्ष के आखिर में सूअर की किडनी को इंसान के शरीर में ट्रांसप्लांट करने का प्रयोग करेंगे। डॉक्टरों के मुताबिक सूअर के अंगों को इंसानों के लिये उपयुक्त माना जाता है, क्योंकि उनके अंगों का आकार इंसानी अंगों के जैसा ही होता है। जानवरों से इंसानों में अंगों को ट्रांसप्लांट करने को जेनोट्रांसप्लांटेशन कहा जाता है। डॉक्टर टेरेन्स कहते हैं कि जानवरों के अधिकारों के लिये काम करने वाले लोग इसका विरोध कर सकते हैं, परंतु उन्हें यह सोचना होगा कि क्या यह अच्छी बात नहीं होगी कि इंसानों की जान बचाई जा सकेगी। डॉक्टरों का मानना है कि दुनिया में लोगों की औसत उम्र बढ़ रही है, जिसकी वजह से भी ऑर्गन ट्रांसप्लांट की जरूरत बढ़ गई है। हालाँकि ट्रांसप्लांट सफल नहीं होने पर मरीजों की मृत्यु होने का खतरा भी रहता है। दुनिया में ऑर्गन ट्रांसप्लांट की माँग तेजी से बढ़ती जा रही है और मात्र ब्रिटेन में ही 280 लोग हार्ट ट्रांसप्लांट का इंतज़ार कर रहे हैं।

पशुओं के अंग और कृत्रिम अंग ट्रांसप्लांट के प्रयोग

उल्लेखनीय है कि पशुओं के अंगों को तथा इंसानों द्वारा निर्मित कृत्रिम अंगों को इंसानों के शरीर में ट्रांसप्लांट करने के प्रयोग कोई नई बात नहीं है। ऐसे प्रयोग सालों से किये जा रहे हैं। हाल ही में जापान सरकार ने एक ऐसे प्रयोग को मंजूरी दी है, जिसमें इंसान तथा जानवरों के हाईब्रिड अंगों को उगाने का प्रयास किया जाएगा।

1967 में हुआ था दुनिया का पहला हृदय ट्रांसप्लांट

ज्ञात हो कि दुनिया का पहला मानव हृदय प्रत्यारोपण 3 दिसंबर 1967 को दक्षिण अफ्रीका के केपटाउन शहर में हुआ था। पूरी दुनिया में हर वर्ष लगभग 3500 हृदय प्रत्यारोपण होते हैं और लगभग 8 लाख लोग ऐसे हैं, जिनमें दिल से जुड़े चतुर्थ श्रेणी के दोष हैं और उन्हें नये अंग की जरूरत है। 1993 से गैर मानव हृदय के उपयोग के लिये अनुसंधान हो रहा है और अब यदि डॉक्टर सर टेरेन्स इंग्लिश की बात माने तो अगले 3 साल में यह संभव हो जाएगा कि इंसान के सीने में सूअर का दिल ट्रांसप्लांट किया जा सकेगा।

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