कौन हैं यह ‘धाकड़’ ठाकुर, जो पाकिस्तान की हर ईंट का जवाब पत्थर से दे रही हैं ?

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 12 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। बात आरंभ करने से पहले आपको ठाकुर का अर्थ समझा देते हैं। ठाकुर कोई जाति या उपनाम (SURNAME) नहीं है। मध्य काल में ठाकुर का अर्थ ईश्वर, स्वामी या मंदिर की प्रतिमा के रूप में किया जाता था। मुग़ल काल के शासकों को यह शब्द इतना भाया कि उन्होंने अपने व्यवहार में अपने नाम के साथ ठाकुर शब्द प्रयोग करना आरंभ किया। ईश्वर का समानार्थी शब्द होने के कारण कई जातियों लोध, लोधा, लोधी, राजपूत, चौहान, सोलंकी, परिहार, पमारक, जादौन, भाटी, तोमर चंदेल जाति के लोगों ने स्वयं को ठाकुर की उपाधि व अधिकार से सम्मानित किया। आधुनिक काल में तो राजपूतों के लिए ठाकुर होना गौरव की बात हो गई है। राजपूतों में इस समय इसका प्रयोग अधिक है। राजस्थान, इलाहाबाद,जौनपुर आगरा, बरेली कमिश्नरी के राजपूत ठाकुर कहलाते है। राजस्थान और अवध में तो तमाम राजपूतों की उपाधि ठाकुर है और ठाकुर कह देने से ही राजपूत का पता लग जाता है। जाट लोग मथुरा, आगरा, अलीगढ़, बुलंदशहर, भरतपुर, धौलपुर के सिनसिनवार, राणा, सिकरवार, भृंगुर, लोध-लोधा-लोधी, चापोत्कट, ठकुरेले, ठेनवा, रावत ही ठाकुर कहलाते हैं। उत्तर प्रदेश, बिहार के पूर्वी भागों के राजपूत स्वयं को ठाकुर के स्थान पर बाबू लिखते हैं। बंगाल के कुछ ब्राह्मण वंशों को भी ठाकुर कहा जाता है।

अब आपको बताते हैं कि हमने ठाकुर शब्द का महिमामंडन क्यों किया ? वास्तव में अमेरिका के न्यूयॉर्क में बैठी विश्व पंचायत में जो पाकिस्तान जम्मू-कश्मीर में धारा 370 हटने के बाद मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों की बौछार कर रहा है, उसे भारत की ओर से एक धाकड़ ठाकुर महिला ही जवाब दे रही हैं। संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार परिषद् (UNHRC) में पाकिस्तान की ओर से कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोप की एक ईंट फेंकी जा रही है, तो भारत की ओर से विजय ठाकुर सिंह सौ पत्थरों से जवाब दे रही हैं। विजय ठाकुर सिंह भारतीय विदेश मंत्रालय की सचिव हैं और यूएनएचआरसी में भारत का प्रतिनिधित्व कर रही हैं। पाकिस्तान ने कश्मीर पर झूठ के पुलिंदों की बरसात करने के लिए अपने विदेश मंत्री शाह महमदू क़ुरैशी को लगाया है, परंतु भारत की ओर से क़ुरैशी का कोई समकक्ष (विदेश मंत्री या विदेश राज्य मंत्री) नहीं, अपितु विजय ठाकुर सिंह पाकिस्तान के हर झूठ का पर्दाफाश कर रही हैं। पाकिस्तान के कश्मीर में मानवाधिकारों के उल्लंघन के आरोपों पर विचार करने के लिए बुलाई गई यूएनएचआरसी की यह बैठक 19 सितंबर तक चलने वाली है, परंतु धाकड़ ठाकुर के दृढ़ इरादों से साफ है कि बैठक भले ही 19 सितंबर तक चलेगी, परंतु धाकड़ ठाकुर पाकिस्तान की एक भी नहीं चलने देंगी।

कौन हैं विजय ठाकुर सिंह ?

आगामी 18 सितंबर को 59वाँ जन्म दिन मनाने वाली विजय ठाकुर सिंह विदेश मंत्रालय में 1 अक्टूबर, 2018 से सचिव (पूर्व) पद पर कार्यरत् हैं। 18 सितंबर, 1960 को जन्मीं विजय ठाकुर सिंह ने अर्थशास्त्र में एमए किया है। इसके बाद उन्होंने भारतीय विदेश सेवा (IFS) परीक्षा पास की और 1985 में आईएफएस अधिकारी के रूप में सेवाएँ शुरू की। इसके बाद उन्होंने सिंगापुर, आयर्लैण्ड, अमेरिका और अफग़ानिस्तान सहित दुनिया के कई देशों में भारत का सशक्त प्रतिनिधित्व किया। उन्होंने वर्ष 1989-1999 यानी 10 वर्षों के दौरान भारतीय विदेश मंत्रालय में काम करते हुए नई दिल्ली में निदेशक (पाकिस्तान), उप सचिव (पाकिस्तान), अवर सचिव (अफग़ानिस्तान, पाकिस्तान) के रूप में भी कार्य किया। वर्ष 2000-2003 के दौरान विजय ठाकुर सिंह अमेरिका स्थित न्यूयॉर्क में संयुक्त राष्ट्र में स्थायी भारतीय मिशन में काउंसेलर भी रहीं। दिसंबर-2016 से सितंबर-2018 के बीच ठाकुर ने आयर्लैण्ड स्थित भारतीय दूतावास में राजदूत के रूप में सेवाएँ दीं, तो इससे पहले जून-2013 से अगस्त-2016 के बीच सिंगापुर स्थित भारतीय उच्चायोग में उच्चायुक्त के रूप में कार्य किया। ठाकुर फरवरी-2006 से अगस्त-2007 के दौरान स्पेन में राजधानी मैड्रिड स्थित भारतीय मिशन की उपाध्यक्ष रहीं। विजय ठाकुर सिंह आतंकवाद से ग्रस्त अफग़ानिस्तान में भी काबुल स्थित भारतीय दूतावास में काउंसेलर के रूप में काम कर चुकी हैं।

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