जानिए भारत में कब आया था पहला कंप्यूटर और कैसे बन गया हर आदमी की जरूरत ?

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आलेख : तारिणी मोदी

अहमदाबाद, 1 अक्टूबर, 2019 (युवाPRESS)। 19वीं शताब्दी के उत्तरार्ध और 20वीं शताब्दी के पूर्वार्ध में कुछ पश्चिमी देशों की तकनीकी, सामाजिक, आर्थिक और सांस्कृतिक स्थिति में काफी बड़ा बदलाव आया, जिसे औद्योगिक क्रांति (Industrial Revolution) कहा गया। धीरे-धीरे ये क्रांति पूरे विश्व में फैल गई। 1844 में “औद्योगिक क्रांति” शब्द का प्रयोग सर्वप्रथम आरनोल्ड टायनबी ने अपनी पुस्तक “लेक्चर्स ऑन दी इंड्स्ट्रियल रिवोल्यूशन इन इंग्लैंड” में किया था। औद्योगिक क्रांति के परिणामस्वरूप यूरोप एवं उत्तरी अमेरिका में नये-नये उद्योग-धन्धे आरम्भ हुए। इसके बाद नयी-नयी आधुनिक तकनीकों के आगमन ने उद्योगों को जबर्दस्त बढ़ावा दिया। इसी कड़ी में शामिल हुआ 4×3 इंच की स्क्रीन वाला एक  मशीन, जिसने उद्योग के क्षेत्र में एक नयी क्रांति ला दी। आज से 79 वर्ष पहले यानी 1940 में किसी ने सोचा भी नहीं होगा कि, यह छोटा-सा कंप्यूटर व्यापारियों को उनके मोटे-मोटे बही खातों से छुटकारा दिला देगा। बस, एक क्लिक में बड़ा से बड़ा हिसाब आसानी से किया जा सकेगा। भारी-भरकम ऑफिस का सारा काम 4×3 इंच के स्क्रीन में सिमट जाएगा। कंप्यूटर आज हर क्षेत्र में हर किसी की जरूरत बन गया है। अस्पताल हो या स्कूल, ऑफिस हो या मॉल या फिर आपका घर ही क्यों न हो, कंप्यूटर के बिना कोई भी काम करना अब असंभव-सा लगता है। आइए जानते हैं कंप्यूटर की शुरुआत कैसे हुई ? और व्यापार की दुनिया में कंप्यूटर इतना महत्वपूर्ण क्यों हो गया है ?

ईसा की पहली शताब्दी में भी था कंप्यूटर

प्रथम शताब्दी में यांत्रिक रेखीय संगणक यानी यांत्रिक रेखीय (एनालॉग) संगणकों का प्रादुर्भाव शुरू हो गया था, जिन्हें बाद में मध्यकालीन युग में खगोल शास्त्रीय गणनाओं के लिए प्रयोग किया गया। द्धितीय विश्व युद्ध (1935-1945) के दौरान यांत्रिक रेखीय संगणक को विशेषीकृत सैन्य कार्यो में उपयोग किया गया। इसी दौरान पहले विद्युतीय अंकीय परिपथ वाले संगणकों का विकास हुआ। प्रारम्भ में वो एक बड़े कमरे के आकार के होते थे और आज के आधुनिक सैकड़ों निजी संगणकों के बराबर बिजली का उपभोग करते थे। 1940-1945 में पहला इलेक्ट्रॉनिक अंकीय संगणक का विकास यूनाइटेड किंगडम और संयुक्त राज्य अमेरिका में किया गया था।

कंप्यूटर ने आसान बनाया काम और बचाया समय

आज व्यापार क्षेत्र में कंप्यूटर एक अहम् भूमिका निभा रहा है। कंप्यूटर ने न सिर्फ काम को आसान बनाया है, अपितु समय के सदुपयोग में भी मददगार सिद्ध हो रहा है। पहले ऑफिस में कागज़ों पर हाथ से लिख कर महत्वपूर्ण जानकारी सुरक्षित रखी जाती थी और ढेरों बही खाते भर जाते थे, वहीं आज कंप्यूटर ने इस समस्या को दूर कर दिया है। वेतन की गणना करनी हो या बाज़ार की जानकारी लेनी हो, किसी को पत्र लिखना हो या अपने व्यवसाय से संबंधित कोई विशेष जानकारी लेनी हो, कंप्यूटर की मदद से आसानी से ली जा सकती है।

भारत में 1952 में आ गया था पहला कंप्यूटर

1952 में भारत में कंप्यूटर युग की शुरुआत भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) कोलकाता से हुई। इस आईएसआई में स्थापित होने वाला पहला एनालॉग कंप्यूटर भारत का प्रथम कंप्यूटर था। यह कंप्यूटर 10 X 10 की मैट्रिक्स को हल कर सकता था। इसी समय भारतीय विज्ञान संस्थान बेंगलुरु में भी एक एनालॉग कंप्यूटर स्थापित किया गया था, जिसका प्रयोग अवकलन विश्लेषक के रूप में किया गया। इसके बाद 1956 में भारत के आईएसआई कोलकाता में भारत का प्रथम इलेक्ट्रोनिक डिजिटल कंप्यूटर HEC – 2M स्थापित किया गया और इसके साथ ही भारत जापान के बाद एशिया का दूसरा ऐसा देश बन गया, जिसने कंप्यूटर तकनीक को अपनाया था।

1966 में भारत ने विकसित कर लिया था पहला कंप्यूटर

1966 में भारत का पहला कंप्यूटर ISIJU विकसित किया गया।  इस कंप्यूटर को दो संस्थाओं भारतीय सांख्यिकी संस्थान (Indian Statistical Institute) और कोलकाता की जादवपुर यूनिवर्सिटी (Jadavpur University) ने मिल कर तैयार किया था। इसी कारण इसे ISIJU नाम दिया गया। ISIJU एक ट्रांजिस्टर युक्त कंप्यूटर था। इस कंप्यूटर का विकास भारतीय कंप्यूटर तकनीक के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण था। यद्यपि यह कंप्यूटर व्यवसायिक कम्प्यूटिंग आवश्यकताओं को पूर्ण नहीं करता था, जिस कारण से इसका प्रयोग किसी विशिष्ट कार्य के लिए नहीं किया गया। इसके बाद 90 के दशक में भारत का प्रथम सुपर कंप्यूटर ‘ परम 8000 ‘ का विकास किया गया, जिसका अर्थ था, parallel machine, जो कि आज सुपर कंप्यूटर की एक श्रृंखला है। परम का प्रयोग विभिन्न क्षेत्रों में किया गया। बायोइन्फ़ोर्मेटिक्स, मौसम विज्ञान और रसायन शास्त्र के क्षेत्र में सुपर कंप्यूटर लोगों की पहली पसंद बन गया। यद्यपि पर्सनल कंप्यूटर के आ जाने के कारण आज भारत के घरों में, कार्यालयों में पर्सनल कंप्यूटर ही प्रयोग किया जाता है, हालाँकि एनालॉग, मेनफ्रेम तथा सुपर कंप्यूटर ने भारत को एक विकासशील देश बनाने में अमूल्य योगदान दिया है।

IBM ने 1975 में बनाया था पहला पर्सनल कंप्यूटर

अंतरराष्ट्रीय व्यापार मशीन निगम (International Business Machines Corporation) यानी IBM ने 1975 में पहला पर्सनल कंप्यूटर बनाया, जिसे व्यक्तिगत कंप्यूटर या पर्सनल कंप्यूटर (Personal Computer) कहा गया। यह एक माइक्रोप्रोसेसर तकनीक थी, जो किसी भी व्यक्ति के लिए घर या कार्यालय में उपयोग करने के लिए डिज़ाइन किया गया छोटा और अपेक्षाकृत सस्ता कंप्यूटर था। माइक्रो कंप्यूटर, डेस्क टॉप कंप्यूटर, लैप टॉप और  टैबलेट पीसी कंप्यूटर के ही उदाहरण हैं। इसमें भी डेस्क टॉप लघु उद्योग के लिए अधिक उपयोगी माना जाता है। पीसी दुनिया भर में प्रौद्योगिकी का एक सबसे महत्वपूर्ण अंग है। पीसी की डाटा प्रोसेसिंग क्षमताओं के कारण यह डाटा को सुरक्षित रखने में अधिक उपयोगी है। साथ ही पर्सनल कम्प्यूटर्स के लिए अधिकतर सॉफ्टवेयर इसके प्रयोग की सहजता तथा यूज़र फ्रेंडली होने को ध्यान में रख कर ही बनाए गए हैं। यही कारण है कि सॉफ्टवेयर उद्योग निंरतर पर्सनल कम्प्यूटर्स के नए उत्पादों को व्यापक श्रृंखला प्रदान करता रहा है।

छोटे व्यापारियों के लिये आया M Tiny

आज दुनिया में कई कंपनियाँ कंप्यूटर निर्माण में संलग्न हैं। इसी दौड़ में शामिल लिनोवो (Lenovo) कंपनी ने लघु व्यापारियों के लिए थिंक सेंटर का M Tiny सीरीज लॉन्च किया है। यह सीरीज़ छोटे व्यापारियों के लिए एक बेहतर उपकरण है, इसे ख़ास तौर पर बढ़ रहे बिजनेस के लिए तैयार किया गया है। ये अपग्रेड होते हुए न सिर्फ स्पेस बचाता है, अपितु आपके डेस्कटॉप को कस्टमाइज भी करता है। यह ऊर्जा का संरक्षण भी करता है। साथ ही इसे डाटा संरक्षित करने के लिए बहुत स्पेस की भी जरूरत नहीं होती है। ये डेस्कटॉप कहीं भी फिट हो सकता है। M सीरीज के Tiny डेस्कटॉप आपको कुछ भी हैंडल करने की सुविधा प्रदान करते हैं। मल्टीटास्किंग और मल्टीमीडिया से लेकर ग्राफिक डिजाइन और हाइफाइनेंस तक के काम इस कंप्यूटर से संभव है।

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