जानिए विश्व की सबसे युवा PM को : संघर्षों की आँच में तप कर निखरीं सना मारिन

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* दो माताओं के अलगाव ने संकट में डाला

* नौकरी की, मैगज़ीन भी बाँटी सना मारिन ने

*24 वर्ष की आयु में राजनीति में रखा कदम

* 12 वर्षों में पहुँचीं फिनलैंड के सर्वोच्च पद पर

रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 11 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। सोना कंचन तभी कहलाता है, जब वह अग्नि में तप कर निखरता है। कुछ ऐसी ही कहानी विश्व के हर सफल व्यक्तियों के पीछे छिपी होती है। हर सफल व्यक्ति के पीछे उसका कड़ा संघर्ष होता है, क्योंकि कहावत भी यही कहती है, ‘कड़े परिश्रम का कोई विकल्प नहीं’। आज पूरी दुनिया में सना मारिन की चर्चा हो रही है, क्योंकि इस महिला ने राजनीति के लिहाज से छोटी-सी उम्र में वह बड़ा मुक़ाम हासिल किया है, जिसके लिए अच्छे-अच्छे राजनेता आजीवन तरसते रहते हैं।

जी हाँ। हम बात कर रहे हैं उत्तरी यूरोपीय देश फिनलैंड (FINLAND) की नई प्रधानमंत्री सना मारिन (SANNA MARIN) की। सना मंगलवार को फिनलैंड की प्रधानमंत्री बनीं। उनके प्रधानमंत्री पद तक पहुँचने के पीछे कड़ा संघर्ष छिपा है, परंतु उससे पहले आपको यह भी बताते चलें कि सना मारिन ने फिनलैंड की प्रधानमंत्री बन कर नया विश्व कीर्तिमान स्थापित किया है। सना मारिन दुनिया की सबसे युवा प्रधानमंत्री बनी हैं। सना मारिन की आयु केवल 34 वर्ष है और उन्होंने युक्रेन के प्रधानमंत्री ओलोक्सी हाचेरुक से सबसे कम आयु के प्रधानमंत्री होने की उपाधि अपने नाम की है। हाचेरुक जब 29 अगस्त, 2019 को प्रधानमंत्री बने, तब उनकी आयु 35 वर्ष थी।

राजनीतिक अस्थिरता के कुचक्र का सामना कर रहे फिनलैंड की कमान अब सना मारिन के हाथों में है, जो सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी की नेता हैं। यद्यपि सना मारिन का जीवन सीधा और सरल नहीं था। एक ‘असाधारण’ दम्पति (सजातीय) की संतान सना मारिन साधारण परिवार से सत्ता के शिखर पर पहुँचीं, तो अपनी कुशलता, योग्यता, कड़े परिश्रम और संघर्षों के बल पर। सना का जन्म फिनलैंड के हेलिंस्की में 16 नवंबर, 1985 को हुआ। सना के अभिभावक सजातीय थे अर्थात् दोनों माताएँ थीं, परंतु सना के जन्म के बाद दोनों माताओं में अनबन हुई और यहीं से मुश्किलों का दौर शुरू हुआ। माताओं के अलग होने के बाद सना हेलसिंकी से पर्कला शहर आ गईं। उन्होंने पॉकेट मनी व पढ़ाई के लिए 15 वर्ष की आयु में टैम्पीर शहर की एक बेकरी में नौकरी की। हाईस्कूल की पढ़ाई के दौरान मैगज़ीन बाँटीं। ग्रेजुएशन के बाद दुकानों में कशियर के रूप में काम किया। टैम्पीर युनविर्सिटी से प्रशासनिक विज्ञान की पढ़ाई के दौरान भी सना को सिटी यूथ ऑफिस में और बाद में सेल्समैन जैसी नौकरियाँ करनी पड़ीं।

जब राजनीति में उतरीं सना मारिन

सना मारिन का राजनीतिक करियर बहुत लंबा नहीं है। उन्होंने 13 वर्ष पूर्व यानी 2006 में ही सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी की युवा शाखा जॉइन की थी, परंतु अपनी कुशलता के दम पर सना 2010 में सोशल डेमोक्रैटिक यूथ की प्रथम महिला उपाध्यक्ष बनीं। वे 2012 तक इस पद पर रहीं। इससे पहले सना ने चुनावी मैदान में हाथ आज़माया, परंतु हार का सामना करना पड़ा। 2008 में फिनिश म्युनिसिपल इलेक्शन में सना को जब पराजय का सामना करना पड़ा, तब उन्होंने सोचा नहीं होगा कि एक दिन वे देश की प्रधानमंत्री बनेंगी। सना मारिन ने सक्रिय राजनेता के रूप में 2012 से काम शुरू किया और सिटी काउंसिल ऑप टैम्पीर के चुनाव में जीत हासिल की। 27 वर्ष की आयु में मिली यह बड़ी सफलता सना के राजनीतिक करियर को नए पंख लगा गई। इसके बाद तो सना 2013-17 तक काउंसिल की अध्यक्ष रहीं। सना टैम्पीर रीजन काउंसिल से विधायक भी हैं। वे 2013-16 के दौरान पिर्कान्मा रिजनल काउंसिल की सदस्य भी रहीं। 2014 में सना सोशल डेमोक्रैटिक पार्टी की द्वितीय अध्यक्ष चुनी गईं और 2015 के आम चुनाव में सना पिर्कान्मा जिले से पहली बार सांसद चुनी गईं। 6 जून, 2019 को सना मारिन दोबारा इसी सीट से विजयी रहीं और आज प्रधानमंत्री के पद पर पहुँच गईं। यद्यपि उन्हें शासकीय कार्यों का अनुभव है, क्योंकि वे परिवहन व संचार मंत्री रह चुकी हैं।

घण्टों नहीं, कार्य को महत्वपूर्ण मानती हैं सना

सना मारिन स्वयं को इंद्रधनुषी परिवार का हिस्सा बताती हैं। वे अपने सजातीय अभिभावक की न केवल इकलौती संतान हैं, अपितु अपने परिवार से युनिवर्सिटी तक जाने वाली प्रथम व्यक्ति हैं। सना के पति का नाम मार्कस रेकोहेन है, जिनसे उन्होंने 2018 में एक पुत्री एम्मा को जन्म दिया। मारिन ने राजनीति और सत्ता के शिखर को यूँ ही नहीं छुआ। पूर्ववर्ती एंटी रिन्ने सरकार में परिवहन व संचार मंत्री के रूप में सना मारिन ने शानदार प्रदर्शन किया। यही कारण है कि पार्टी ने उन्हें रिन्ने के स्थान पर प्रधानमंत्री पद के लिए चुना। सना व्यक्तिगत रूप ही नहीं, अपितु सार्वजनिक रूप से यह मानती हैं कि किसी भी कार्य की सफलता के पीछे घण्टे नहीं, अपितु लगन महत्वपूर्ण होती है। सना ने अपनी पार्टी के 120 वर्ष पूरे होने पर पैनल डिसक्शन के दौरान स्पष्ट रूप से कहा था, ‘सप्ताह में 4 दिन और हर दिन 6 घण्टे काम के लिए होने चाहिए। यही दुनिया का आगामी चलन होगा।’ सना मानती हैं कि 8 घण्टे कार्य करने की बजाए परिवार के साथ अधिक समय व्यतीत करने वाला व्यक्ति अधिक उत्पादकता दे सकता है।

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