जानिए एक ऐसी जेल के बारे में, जहाँ हर क़ैदी है 93 करोड़ रुपए का !

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* क्यूबा में है विश्व की सबसे महंगी अमेरिकी जेल

* खूँखार अपराधियों ने बढ़ाई जेल की महंगाई

आलेख : तुहिना चौबे

अहमदाबाद 23 सितंबर, 2019 (युवाPRESS)। बंदी गृह, कारागार, जेल। इन शब्दों को सुनते ही हर किसी का मन काँप उठता है। कैसा होती होगी जेल ? क्या करते होंगे ? कितने लोग होंगे ? कैसे रहते होंगे लोग ? ऐसे ना जाने कितने सवाल, परंतु आज हम आपको जिस जेल के बारे में बता रहे हैं, उस जेल में हर क़ैदी पर वार्षिक 13 मिलियन डॉलर यानी करीब 93 करोड़ रुपए खर्च किये जाते हैं और क़ैदियों की सुरक्षा में तैनात सैनिकों पर 3,900 करोड़ रुपए खर्च किए जाते हैं। इस जेल के एक क़ैदी पर करीब 45 सैनिकों की तैनाती की जाती है। चौंक गए न सुन कर ? परंतु यह सत्य है। ऐसे बंदी गृह के बारे में आप भी अवश्य जानना चाहेंगे, भले ही आप जाना न चाहें। तो आइए जानते हैं कहाँ और कैसी है ये जेल ?

क्यूबा में एक जेल ऐसी है जो दुनिया की सबसे महंगी जेल हैं। इस जेल का नाम है ग्वांतानामो बे हिरासत शिविर (Guantanamo Bay Detention Camp)। इस जेल का ये नाम इसलिए पड़ा, क्योंकि यह ग्वांतानामो खाड़ी के तट पर स्थित है। अमेरिकी अख़बार न्यूयॉर्क टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक इस जेल में फिलहाल 40 क़ैदी हैं और हर क़ैदी पर वार्षिक करीब 93 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। आपको जान कर आश्चर्य होगा कि इस जेल में करीब 1,800 सैनिक तैनात हैं। यहाँ सिर्फ एक क़ैदी पर क़रीब 45 सैनिकों की नियुक्ति है। जेल की सुरक्षा में तैनात सैनिकों पर हर साल करीब 3,900 करोड़ रुपये खर्च होते हैं। क़ैदियों के पीले कपड़े ही इस जेल के क़ैदियों की पहचान है।

बेहद ख़तरनाक क़ैदी रखे जाते हैं यहाँ

अब आप सोच रहे होंगे कि आखिर इस जेल में कैदियों को इतनी सुरक्षा क्यों दी जाती है ? तो आपको बता दें कि यहाँ कई ऐसे अपराधियों को रखा गया है, जो बेहद ही ख़तरनाक हैं। खबरों के मुताबिक 9/11 हमले का मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद भी इसी जेल में बंद है। अमेरिका में 11 सितंबर 2001 (9/11) को हुए वर्ल्ड ट्रेड सेंटर पर हुए आतंकी हमले के कथित मास्टरमाइंड खालिद शेख मोहम्मद पर हमले के 20 साल बाद 11 जनवरी 2021 से ट्रायल शुरू होगा। खालिद के अलावा चार अन्य लोगों के खिलाफ ग्वांतानामो बे की सैन्य अदालत में सुनवाई चलेगी। इन सभी पर करीब 3,000 लोगों की हत्या और आतंकवाद समेत युद्ध अपराधों के आरोप हैं। उल्लेखनीय है कि हाइजैकर्स के न्यूयॉर्क, पेंटागन में वर्ल्ड ट्रेड सेंटर, और शैंक्सविले, पेन्सिलवेनिया के पास एक मैदान में विमान के दुर्घटनाग्रस्त कराने से लगभग 3,000 लोग मारे गए थे। यह पहली बार है, जब मामले की सुनवाई की तारीख तय की गई थी। 55 वर्षीय शेख मोहम्मद को 2003 में पाकिस्तानी सुरक्षा बलों ने पकड़ लिया था और 2006 में ग्वांतानामो बे में स्थानांतरित कर दिया था। अन्य चार प्रतिवादियों को 2002 और 2003 में पाकिस्तान में पकड़ लिया गया था।

क्यूबा के साउथ-ईस्ट कोस्ट पर है जेल

क्यूबा के दक्षिण-पूर्वी तट पर अमेरिका ने 1898 में ग्वांतानामो बे नेवी बेस बनाया था। जनवरी-2002 में यहाँ उस ज़मीन पर एक हिरासत केन्द्र बनाया गया, जो ज़मीन अमेरिका ने 1930 में लीज़ पर ली थी। तत्कालीन राष्ट्रपति जॉर्ज डब्ल्यू बुश ने वर्ष 2001 से 2009 में यहाँ एक कंपाउंड बनवाया, जिसे कैंप एक्स-रे नाम दिया गया था। यहाँ आतंकियों को रखा जाता था। ग्वांतानामो बे में करीब 1800 सैनिक तैनात रहते हैं। एक क़ैदी पर करीब 45 सैनिकों की नियुक्ति रहती है। सैनिकों पर जेल की तीन इमारतों, दो खुफिया हेडक्वार्टर्स, तीन अस्पतालों और कैदियों की मदद के लिए बनाए गए वकीलों के कंपाउंड का जिम्मा रहता है। पहले ग्वांतानामो बे में अमेरिका का नेवी बेस था, लेकिन बाद में इसे हिरासत केंद्र बना दिया गया।

ओसामा बिन लादेन का ड्राइवर भी कैद रह चुका है

ओसामा बिन लादेन का पूर्व खानसामा और ड्राइवर अल इब्राहीम अल क्योसी एक दशक तक इसी जेल में सजा काट चुका है । उसे क्यूबा में अमेरिकी कब्जे वाली ग्वांतानामो जेल में रखा गया था। इस कुख्यात जेल में अधिकतर 2001 में अफगानिस्तान में अमेरिकी हमले के बाद पकड़े गए तालिबान आतंकी और अलकायदा के सदस्य हैं। इब्राहीम ग्वांतानामो जेल का पहला क़ैदी था, जिस पर ओबामा प्रशासन द्वारा नए नियमों के तहत सैन्य न्यायाधिकरण द्वारा मुकदमा चलाया गया था। जुलाई 2010 में की गई प्ली बार्गेन के तहत इब्राहीम ने आतंकी गतिविधियों के लिए साजिश रचने और साजो सामान मुहैया कराने का आरोप स्वीकार लिया था। वह 2002 से ग्वांतानामो जेल में बंद था। यद्यपि फिलहाल उसे रिहा तक दिया गया है।

स्टाफ-कैदियों के लिए काफी सुविधा

ग्वांतानामो बे के स्टाफ के लिए चर्च और सिनेमा की व्यवस्था है। साथ ही उनके लिए डाइनिंग रूम और मानसिक हालत ठीक रखने के लिए केयरटेकर टीम है। स्टाफ के सपोर्ट के लिए हर हफ्ते जज, वकील, पत्रकार आते रहते हैं। वहीं, कैदियों के लिए मांसाहारी भोजन, न्यूज-स्पोर्ट्स चैनल, जिम और प्ले स्टेशन हैं। यहाँ खूँखार क़ैदियों की मानसिक हालत ठीक और शांत रखने के लिए आर्ट्स और हॉर्टी कल्चर क्लासेज़ चलाए जाते हैं, जिसमें कोई भी क़ैदी शामिल हो सकता है। इस बंदी गृह में इस बात का ख्याल रखा जाता है कि किसी भी क़ैदी को कोई परेशानी न हो।

2008 में आखिरी क़ैदी आया

ग्वांतानामो बे के कैप्टन और वकील ब्रायन एल माइजर का कहना है कि जेल को आप अमेरिका के एक छोटे बूटीक की तरह देख सकते हैं। यहाँ पर अलग-अलग समय पर करीब 770 पुरुष युद्ध बंदी रह चुके हैं। 2003 में यहाँ कैदियों की संख्या 677 तक पहुँच गई थी। 2008 में यहाँ आख़िरी बार किसी क़ैदी को लाया गया था। बुश प्रशासन ने यहाँ से 540 क़ैदियों को रिहा कर दिया था। इनमें से ज्यादातर पाकिस्तान, अफगानिस्तान और सऊदी अरब भेजा गया। इसके बाद ओबामा प्रशासन ने 200 क़ैदियों को रिहा किया। भले ही ग्वांतानामो बे में कैदियों को रखना काफी महंगा साबित हो रहा हो, परंतु डिटेंशन सेंटर बंद करने को लेकर अमेरिका में फिलहाल कोई राजनीतिक एकराय नहीं बनी है। 1985 में जर्मनी की स्पेन्दाउ जेल में क़ैद रहे नाज़ी युद्ध के अपराधी रुडोल्फ हेस का वार्षिक खर्च महज़ 1.5 मिलियन यानी करीब 10.7 करोड़ रुपए आया था, वहीं, अत्याधुनिक प्रणाली से लैस मानी जाने वाली अमेरिका की कोलोराडो जेल में 2012 में एक क़ैदी का वार्षिक खर्च 78 हजार डॉलर यानी 56 लाख रुपए आया था। 1985 की स्पेन्दाउ जेल से तुलना करें तो ग्वांतानामो बे में एक क़ैदी के खर्च में 745% की बढ़ोतरी हो चुकी है।

इस देश में नहीं है एक भी क़ैदी

तो वहीं यूरोप का एक देश ऐसा है जहाँ एक भी क़ैदी नहीं बचा है। जेल को बंद तक करने का फैसला ले लिया गया है। इस देश का नाम है नीदरलैंड, जहाँ अपराध कम हो गए हैं, परंतु जेल बंद होने से कई लोगों को परेशानी भी हो रही। दरअसल जेल में करीब 2 हजार लोग काम करते हैं। बंद होने के फैसले से इन लोगों की नौकरी पर खतरा खड़ा हो गया है। दरअसल इस देश में इलेक्ट्रॉनिक एंकल मॉनिटरिंग सिस्टम है। जो कैदियों को पहनाया जाता है। क़ैदियों को सीमा के अंदर रहने के निर्देश दिए जाते हैं। क़ैदियों के पैरों में इसे पहनाया जाता है। क़ैदियों को घर में ही बंधक बना कर रखा जाता है। अगर वो बाहर निकलता है, तो उसकी लोकेशन ट्रेस हो जाती है। ये डिवाइस एक रेडियो फ्रिक्वेंसी सिग्नल भेजता है और पुलिस को इसकी सूचना मिल जाती है। इस सिस्टम से अपराधिक दर कम हो गया है और जेल बंद करने का फैसला लिया है। नीदरलैंड में कई जेलें अब बंद हो चुकी हैं।

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