VIDEO : निखत को औक़ात बताने वाली मैरी कॉम को कितना जानते हैं आप ?

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रिपोर्ट : कन्हैया कोष्टी

अहमदाबाद 28 दिसंबर, 2019 (युवाPRESS)। भारतीय महिला मुक्केबाज़ और छह बार विश्व चैम्पियन रह चुकीं एमसी मैरी कॉम ने फिर एक बार सिद्ध कर दिया कि वे सुपरमॉम होने के साथ-साथ सुपर मुक्केबाज़ भी हैं। उन्होंने जापान के टोक्यो में आयोजित होने वाले ओलंपिक क्वॉलीफायर मुक़ाबले के लिए धमाकेदार तरीक़े से क्वॉलीफाई किया है। मैरी कॉम ने उन्हें चुनौती देने वाली निखत ज़रीन को औक़ात दिखा दी और उनका टोक्यो ओलंपिक 2020 में जाने का सपना चकनाचूर कर दिया।

वास्तव में भारतीय मुक्केबाज़ संघ (BFI) के अध्यक्ष अजय सिंह ने पिछले दिनों एक सम्मान समारोह में घोषणा कर दी थी कि मैरी कॉम को उनके अंतरराष्ट्रीय स्तर पर अच्छे प्रदर्शन के कारण बिना किसी ट्रायल के ओलंपिक क्वॉलीफायर के लिए चुना जाएगा। बीएफआई अध्यक्ष की इस घोषणा से निखत ज़रीन तिलमिला उठीं और उन्होंने मैरी कॉम को चुनौती देने का अवसर देने की मांग की। मैरी कॉम ने इस चुनौती को स्वीकार कर लिया और आज हुए मुक़ाबले में निखत को 9-1 से हरा कर क्वॉलीफायर मुक़ाबले के लिए अपना मार्ग प्रशस्त कर लिया। टोक्यो ओलंपिक क्वॉलीफायर मुक़ाबले 3 से 14 फरवरी, 2020 के दौरान चीन के वुहान में आयोजित होंगे, जहाँ अब भारत का प्रतिनिधित्व मैरी कॉम करेंगी। निखत का सपना चकनाचूर करने वाली मैरी कॉम अब वुहान में टोक्यो ओलंपिक के लिए क्वॉलीफाई करने का प्रयास करेंगी।

निखत से हाथ तक नहीं मिलाया मैरी कॉम ने

ओलंपिक क्वालीफायर को लेकर निखत ज़रीन और मैरी कॉम का विवाद जगजाहिर है। अब जब फाइनल में मैरी कॉम से निखत को शिकस्त मिली तो उसके बाद रिंग पर भी आपसी तनाव देखने को मिला। दरअसल, मैच के बाद मैरी कॉम ने निखत ज़रीन से हाथ तक नहीं मिलाया। उन्होंने कहा, ‘मैं उनसे क्यों हाथ मिलाऊँ ? वह चाहती हैं कि दूसरे लोग उनका सम्मान करें तो पहले उन्हें सबका सम्मान करना होगा। मुझे ऐसे स्वभाव के लोग पसंद नहीं हैं। रिंग के अंदर अपने पॉइंट प्रूव करो, बाहर नहीं।’

कौन है वह शख्स, जिसने मैरी कॉम को बॉक्सर बनाया ?

मैंगते चंग्नेइजैंग मैरी कॉम (M C MARY KOM) यानी मैरी कॉम को भारत ही नहीं, बल्कि पूरी दुनिया में मैग्निफ़िसेंट मैरी के नाम से भी जाना जाता है। छह बार विश्व बॉक्सिंग चैंपियनशिप का ख़िताब जीतने वाली पहली भारतीय महिला बॉक्सर यानी मैरी कॉम वैसे किसी परिचय की महोताज नहीं। उनके जीवन पर पर एक फिल्म ‘मैरी कॉम’ भी बन चुकी है, जिसमें उनके जीवन-संघर्ष को बड़ी बारीकी से दर्शाया गया है। इसके बाद तो मैरी कॉम के बारे में हर आम आदमी यह जान गया कि कैसे भारत से लगभग कटे हुए रहने वाले पूर्वोत्तर राज्य मणिपुर के एक छोटे से कस्बे कांगाथेई से निकलकर मैरी कॉम आज कामयाबी की बुलंदियों पर विराजमान हैं, परंतु क्या आप जानते हैं कि बुलंदियों के इस शिखर के धरातल पर मैरी कॉम के साथ कौन खड़ा था ? मैरी कॉम को खेल जगत की चोटी पर पहुँचाने में किसका योगदान है ? कौन हैं मैरी कॉम का मार्गदर्शक, जिसने उन्हें मुट्ठियाँ बांध कर देश का नाम रोशन करने की प्रेरणा दी। भारतीय बॉक्सिंग का सबसे बड़ा और ‌सफल नाम मैरी कॉम तो लाखों लोगों की प्रेरणा हैं, परंतु वह कौन है, जो उनकी प्रेरणा है ?

17 दिसम्बर, 1998 ने बदली मैरी कॉम की दुनिया

आइए हम बताते हैं आपको उस शख्स के बारे में। वह शख्स कोई और नहीं, बल्कि मैरी कॉम के ही राज्य मणिपुर से आने वाले डिंग्को सिंह हैं। इम्फाल पूर्व जिले के सुदूरवर्ती सेकता गाँव में 1 जनवरी, 1979 को जन्मे डिंग्को सिंह खेल खुद भी किसी परिचय का मोहताज नहीं हैं, क्योंकि उन्होंने मात्र 19 साल की आयु में वह कारनामा किया, जिसने करोड़ों भारतीयों का दिल जीत लिया। वह दिन था 17 दिसम्बर, 1998 का और इसी दिन डिंग्को सिंह ने जो उपलब्धि हासिल की, उसने मैरी कॉम को बॉक्सिंग की दुनिया में आने के लिए प्रेरित किया। दरअसल थाईलैण्ड स्थित बैंकॉक में 7 से 17 दिसम्बर, 1998 के दौरान लैंड स्पोर्ट्स कॉम्प्लेक्स में आयोजित बैंटमवेट मुक्केबाजी प्रतियोगिता का फाइनल मैच 17 दिसम्बर, 1998 के दिन खेला गया था और इस मुक़ाबले में डिंग्को सिंह ने उज़्बेकिस्तान के प्रसिद्ध मुक्केबाज तैमूर तुल्याकोव को हरा कर गोल्ड मेडल जीता था। उस मुकाबले में स्वर्ण पदक जीतने के साथ ही डिंग्को सिंह को प्रतियोगिता का सर्वश्रेष्ठ मुक्केबाज भी घोषित किया गया। जब डिंग्को सिंह बैंकॉक में अपने मुक्कों की बरसात करते हुए स्वर्ण पदक हासिल कर रहे थे, तब मैरी कॉम कक्षा 6 की छात्रा थीं और उनकी आयु 15 वर्ष थी। मैरी कॉम डिंग्को के धारदार खेल से इतनी प्रभावित हुईं कि उन्होंने बॉक्सिंग को ही अपना कैरियर बनाने का संकल्प लिया। बॉक्सिंग के लिए उन्होनें स्कूली की पढ़ाई तक छोड़ दी। इसके बाद उन्होंने कभी पीछे मुड़ कर नहीं देखा। बॉक्सिंग के प्रति उनकी लगन और ज़िद ने ही उन्हें आज विश्व चैंपियन बनाया है।

उपलब्धियों और पुरस्कारों से लबरेज़ मैरी कॉम

वैसे तो मैरी कॉम कई प्रतिष्ठित खेल पुरस्कारों से सम्मानित की जा चुकी हैं। वर्ष 2003 में अर्जुन अवॉर्ड, वर्ष 2009 में राजीव गांधी खेल रत्न अवॉर्ड मिल चुके हैं। वर्ष 2006 में उन्हें पद्म श्री और 2013 में पद्म भूषण से सम्मानित किया गया। मैरी एकमात्र महिला बॉक्सर हैं, जिन्होंने पहले वर्ल्ड चैम्पियनशिप में सात पदक जीते हैं। 25 नवंबर 2018 को अपना छठा गोल्ड जीता। चार महीने पहले ही मैरी कॉम को एशिया की सर्वश्रेष्ठ महिला एथलीट चुना गया था। यह उनकी कामयाबी का एक और पड़ाव ही है कि उन्होंने उन्हें ललकारने वाली निखत ज़रीन को पराजित कर दिया, जो उनके समर्पण और कड़ी मेहनत का परिणाम है।

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