THE KARGIL GIRL : क्या आप जानते हैं पर्दे के पीछे की असली ‘नायिका’ को, जो हमारे गुजरात में ही रहती हैं ?

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अहमदाबाद 30 अगस्त, 2019 (युवाPRESS)। कारगिल शब्द सुनते ही हमारे जेहन में 1999 में भारत और पाकिस्तान के बीच हुए उस युद्ध के दृश्य उभर आते हैं, जिसमें भारत ने अपने 500 से अधिक जवानों की कुर्बानी दी थी। अभी हाल ही में पूरे देश ने पाकिस्तानी सेना को धूल चटा कर कारगिल युद्ध में पाई गई विजय की 20वीं वर्षगांठ मनाई। कारगिल विजय दिवस पर इस युद्ध में बलिदान देने वाले अनेक जवानों को याद किया गया, परंतु कारगिल युद्ध का एक और पहलू भी है, जो हमसे अनचाहे ही अछूता रह जाता है। यह पहलू यह है कि इस युद्ध में भारतीय सेना में शामिल कई महिला योद्धाओं ने भी दुश्मनों को करारा जवाब दिया था। हमारी वे दिलेर महिला योद्धाएँ, जिन्होंने इस युद्ध में अपनी जान की बाज़ी लगा दी, वे कुछ समय बाद गुमनामी के अंधेरों में खो गईं। उनके शौर्य की सराहना तो खूब की गई, परंतु साल-दर-साल उनकी शौर्य गाथाएँ धुंधलाती गईं।

कारगिल युद्ध की ऐसी एक दमदार योद्धा रही हैं गुंजन सक्सेना, जिनके बारे में एक महीने पहले ही मनाए कारगिल विजय दिवस पर भी किसी को कोई अधिक जानकारी नहीं थी, परंतु एक फिल्म का फर्स्ट लुक क्या रिलीज़ हुआ, गुंजन सक्सेना फिर एक बार सुर्खियों में आ गईं। एक दमदार और बहादुर सिपाही फ्लाइट लेफ्टिनेट गुंजन सक्सेना कारगिल युद्ध में भारत की जीत के बाद तो कुछ महीनों तक सुर्खियों में रही थीं, परंतु प्रश्न यह उठता है कि उसके बाद आख़िर ऐसा क्या हुआ कि एक शौर्य वीर चक्र सम्मानित सिपाही गुंजन अचानक गुमनामी के अँधेरे में कहीं खो गईं। 1999 में देश की प्रसिद्ध पत्रिकाओं के कवरज पेज पर छाने वालीं गुंजन की गूंज क्यों केवल उन चंद पन्नों तक सिमट कर रह गई।

‘द कारगिल गर्ल’ से फिर चर्चा में आईं गुंजन

रीयल गुंजन सक्सेना और द कारगिल गर्ल फिल्म में उनका रोल कर रहीं जाह्नवी कपूर

ख़ैर, यह अब बीते समय की बात है। फिलहाल तो पूरे देश में फिर एक बार गुंजन के शौर्य की चर्चा है, क्योंकि क्योंकि उनके जीवन पर आधारित एक फिल्म “द कारगिल गर्ल” बनने जा रही है, जिसमें अभिनेत्री जाह्नवी कपूर गुंजन की भूमिका निभा रही हैं। द कारगिल गर्ल का फर्स्ट लुक जारी होते ही कारगिल युद्ध से कई पहलुओं से अनजान लोगों ने गुंजन के बारे में जानने की कोशिशें शुरू कर दीं। इसी कोशिश के तहत हम आपको बताने जा रहे हैं जिन्दगी के असली रंगमंच पर यह किरदार निभाने वाली “द कारगिल गर्ल” की असली नायिका गुंजन सक्सेना के बारे में ? द कारगिल गर्ल फिल्म के फर्स्ट लुक को देख कर लोग जाह्नवी कपूर पर तो प्रशंसा के फूल बरसा रहे हैं, परंतु हम उन लोगों की जिज्ञासा शांत करने जा रहे हैं, जो रीयल गुंजन सक्सेना को जानना चाहते हैं। जिनके मन में यह प्रश्न है कि जिस गुंजन ने कारगिल युद्ध में साहस और बहादुरी का परिचय दिया, जिनका पूरा जीवन देश को समर्पित रहा, आज वे कहाँ है और किन हालातों में अपना जीवन बिता रही हैं ?

5 साल की उम्र में पायलट बनने की ठानी

गुंजन सक्सेना

गुंजन सक्सेना देशभक्तों के परिवार से आती हैं, जिनका हर एक सदस्य भारत माता के लिए समर्पित है। उनके पिता और भाई सेना के जवान थे। कहीं न कहीं यही कारण था कि बचपन से ही गुंजन के ख़ून में ही देश भक्ति का जज़्बा मौजूद था, जिसने गुंजन को भारतीय वायु सेना (INDIA AIR FORCE) यानी IAF में जाने के लिए प्रेरित किया। जब बालिकाएँ खिलौनों और गुड्डे-गुड्डियों से खेलते हैं, उस उम्र में गुंजन ने अपने परिवार की विरासत को आगे बढ़ाने का संकल्प किया था। जब गुंजन मात्र 5 साल की थीं, कब उन्होंने एक दिन आसमान में उड़ते एक फाइटर जेट को देखा और तभी तय कर लिया कि वह एक दिन फाइटर प्लेन उड़ाएँगी। दिल्ली के हंसराज कॉलेज से स्नातक स्तर की पढ़ाई (ग्रजुएशन) पूरी करने के बाद गुंजन ने सेवा चयन बोर्ड (Services Selection Board) यानी SSB परीक्षा पास की और भारयीय वायुसेना ज्वॉइन की। गुंजन सक्सेना उन 25 ट्रेनी पायलटों में शामिल थीं, जिन्हें 1994 में भारतीय वायुसेना के पहले बैच में शामिल होने का गौरव हासिल हुआ था। उनकी ट्रेनिंग शुरू हो गई।

कारगिल युद्ध छिड़ा और गुंजन ने भरी साहसी उड़ान

श्री विद्या राजन और गुंजन सक्सेना

अब वह प्रतीक्षा करने लगीं उस दिन की, जब उन्हें प्लेन उड़ाने का अवसर मिले। गुंजन की यह प्रतीक्षा 5 वर्ष बाद तब पूरी हुई, जब कारगिल में पाकिस्तानी सेना ने घुसपैठ की और भारत ने उन्हें खदेड़ने के लिए ऑपरेशन विजय शुरू किया। इसी दौरान भारतीय सेना को वायुसेना के विमानों और पायलटों की जरूरत पड़ी, तब वायुसेना ने गुंजन और श्री विद्या को युद्ध क्षेत्र में भेजने का फैसला किया। वायुसेना का आदेश मिलते ही गुंजन ने चीता हेलीकॉप्टर से उड़ान भरी। उनके साथ श्री विद्या राजन भी सवार हुईं। गुंजन ने अपनी जान की परवाह किए बिना अपने चोपर को उन जगहों पर उतारा, जहाँ युद्ध में घायल भारतीय जवान थे। गुंजन ने इन जवानों को अस्पताल पहुँचाने के मिशन को बख़ूबी अंजाम दिया।

एलओसी पर भी उड़ान भरने से नहीं हिचकिचाईं गुंजन

गुंजन सक्सेना

कारगिल युद्ध के दौरान कई ऐसे मौके भी आए, जब गुंजन ने नियंत्रण रेखा (LOC) के बिल्कुल नजदीक से भी उड़ान भरी, ताकि पाकिस्तानी सैनिकों की स्थिति का पता लगाया जा सके। गुंजन और उनकी साथी विद्या को कश्मीर के उस क्षेत्र में भेजा गया, जहाँ पाकिस्तानी सैनिक लगातार भारतीय फौजियों पर रॉकेट लॉन्चर और गोलियों से हमला कर रहे थे। चीता हेलीकॉफ्टर लिए दोनों ने युद्ध के मैदान में जाकर सैकड़ों घायल सैनिकों की मदद की। बिना हथियार के गुंजन पाकिस्तानी फौज का मुकाबला करती रहीं और कई जवानों को सुरक्षित निकालने में कामयाब भी हुईं। इस बहादुरी के लिए गुंजन सक्सेना को शौर्य पुरस्कार से भी नवाज़ा जा चुका है। शौर्य पुरस्कार कई जवानों को मिल चुके हैं, परंतु गुंजन यह पुरस्कार पाने वाली पहली महिला जवान बनीं।

जामनगर में रहती हैं गुंजन

गुजरात के जामनगर में गृहिणी के रूप में रहती हैं गुंजन सक्सेना

शॉर्ट सर्विस कमीशन अधिकारी के रूप में उनका कार्यकाल सात साल के बाद खत्म हो गया, क्योंकि तत्कालीन समय में सेना में महिलाओं को स्थाई कमीशन देने का प्रावधान नहीं था।। कार्यकाल खत्म होने के बाद उन्होंने भारतीय वायु सेना के एमआई-17 हेलिकॉप्‍टर के पायलट से शादी कर ली। 2004 में गुंजन ने एक बेटी को जन्म दिया, जिसका नाम प्रज्ञा है। वर्तमान में 44 वर्षीय गुंजन अपने परिवार के साथ गुजरात के जामनगर में रहती हैं और एक गृहणी के रूप में जीवन बिता रही हैं।

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