नासूर नहीं बनी, निहाल कर गई नोटबंदी : जानिए मोदी का यह साहसिक कदम किस तरह सिद्ध हुआ वरदान ?

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न उद्योग-धंधों को हुआ नुकसान, न रोजगार की स्थिति बिगड़ी, उल्टे आतंकवाद, उग्रवाद, नक्सलवाद और काले धन पर लगा अंकुश

रिपोर्ट : विनीत दुबे

8 नवम्बर-2016 को जब प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी ने नोटबंदी की, तब से ही विपक्षी दल पीएम मोदी और उनकी सरकार पर हमलावर है। विरोधी उन पर आरोप लगा रहे हैं कि नोटबंदी की बदौलत हजारों-लाखों लोगों की नौकरियाँ और रोजगार छिन गया और अर्थ व्यवस्था का भट्ठा बैठ गया, परंतु यह सत्य नहीं है। आँकड़ों को देखने से पता चलता है कि नोटबंदी ने भारतीय अर्थ व्यवस्था को मजबूती दी है। नई नौकरियों के अवसर प्रदान किये हैं और प्रत्यक्ष कर संग्रह में भी बढ़ोतरी हुई है।

आँकड़ों के मुताबिक नोटबंदी से पहले 2014-15 में प्रत्यक्ष कर संग्रह 6.9 लाख करोड़ रुपये था, 2015-16 में 7.4 लाख करोड़ था, जबकि नोटबंदी के बाद इसमें लगातार बढ़ोतरी हुई है और 2016-17 में यह बढ़कर 8.5 लाख करोड़ रुपये तथा 2017-18 में 18 प्रतिशत बढ़कर 10 लाख करोड़ रुपये तक पहुँच गया और हाल ही में सम्पन्न हुए वर्ष 2018-19 के वित्त वर्ष में यह कर संग्रह निर्धारित लक्ष्य को भी पार कर गया और 11.50 लाख करोड़ रुपये के निर्धारित लक्ष्य की तुलना में 12 लाख करोड़ रुपये कर आया। अब सरकार ने 2019-20 में 13.50 लाख करोड़ रुपये प्रत्यक्ष कर जुटाने का लक्ष्य निर्धारित किया है। कॉर्पोरेट आयकर 14 प्रतिशत और व्यक्तिगत आयकर 13 प्रतिशत की दर से बढ़ा। एडवांस टैक्स के अंतर्गत वॉलंटरी टैक्स पेमेंट भी 14 प्रतिशत की गति से बढ़ रहा है।

इसी प्रकार आयकर रिटर्न फाइल करने वालों की संख्या में भी बढ़ोतरी का ट्रेंड चल रहा है। केन्द्रीय प्रत्यक्ष कर बोर्ड (CBDT) के अध्यक्ष सुशील चंद्रा का कहना है कि कर का दायरा बढ़ाने के लिये नोटबंदी का कदम काफी अच्छा सिद्ध हुआ है। जिस साल में नोटबंदी हुई उस साल यानी 2016-17 में आयकर रिटर्न भरने वालों की संख्या 5.48 करोड़ थी, जो वर्ष 2017-18 में बढ़कर 6.87 करोड़ हुई और वर्ष 2018-19 में यह संख्या 50 प्रतिशत बढ़ी है।

यह तो हुई प्रत्यक्ष कर संग्रह की बात। अब अप्रत्यक्ष कर पर नज़र डालें तो 2018-19 में सीमा शुल्क संग्रह अनुमानित 1.12 लाख करोड़ रुपये से बढ़कर 1.30 लाख करोड़ पर पहुँच गया और 2019-20 में यह बढ़कर 1.45 लाख करोड़ तक पहुँचने का अनुमान है।

इतना ही नहीं नोटबंदी ने काले धन पर सर्जिकल स्ट्राइक की और नवंबर-2016 से मार्च-2017 के दौरान 900 करोड़ रुपये का काला धन जब्त किया गया। प्रवर्तन निदेशालय (ED) ने यह काला धन जब्त करने में बड़ी सफलता अर्जित की। नोटबंदी के बाद ईडी ने 1000 फर्जी कंपनियों के विरुद्ध कार्यवाही की। नोटबंदी से व्यक्तिगत और कारोबारी पारदर्शिता आई। 18 लाख ऐसे केसों की पहचान हुई, जिसमें कैश डिपोजिट, रिटर्न फाइलिंग से मेल नहीं खाता था, उन्होंने रिटर्न फाइल नहीं किया था। ऐसे लोगों को ई-मेल तथा एसएमएस भेजे गये, परिणामतः टैक्स कलेक्शन में बढ़ोतरी हुई।

नोटबंदी से पुरानी करेंसी बैंकों में जमा हुई, जिससे अर्थ व्यवस्था को मजबूती मिली। इसी के साथ डिजिटल ट्रांजेक्शन को भी बढ़ावा मिला। नोटबंदी के बाद देश में पहली बार आयकर विभाग ने क्लीन मनी ऑपरेशन चलाया, जिससे 17 लाख से अधिक नागरिकों के खातों की जांच हुई और 3.68 लाख करोड़ रुपये की जांच की गई। 16 हजार करोड़ रुपये से अधिक अघोषित आय का भी पता लगाया गया। 2.26 लाख फर्जी कंपनियों का पंजीकरण रद्द किया गया और 4 लाख 25 हजार से अधिक निदेशकों पर कार्यवाही की गई।

नोटबंदी से आतंकवाद और नक्सलवाद पर भी नकेल कसने में मदद मिली और उनके पास पैसा पहुँचना बंद हो गया। कश्मीर में पत्थरबाजों को पैसा मिलना बंद हो जाने से आर्मी पर पथराव की घटनाओं पर ब्रेक लग गया।

इतना ही नहीं नोटबंदी से पैसा बैंकों में पहुँचने से वित्तीय तरलता भी बढ़ी और वित्तीय शुद्धता से अर्थ व्यवस्था में स्वच्छता और पारदर्शिता आई। इससे फायदा यह हुआ कि कर्ज सस्ता हुआ है और ब्याज दरों में कमी आई है। वित्तीय तरलता बढ़ने से लोन लेने में आसानी हो गई है, जिससे रोजगार के अवसर उपलब्ध हुए हैं।

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