जानिए कैसे करें गोपाष्टमी के दिन गौ माता की पूजा

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ठाकुर बांकेबिहारी मंदिर के मुख्य सेवायत श्री अनंत बिहारी गोस्वामी जी ने बताया हिंदू धर्म में गाय को पूजनीय माना जाता है। गाय की पूजा करने से 33 करोड़ देवी देवताओं का आशीर्वाद प्राप्त हो जाता है। जिससे घर में सुख-समृद्धि और खुशहाली आती है गाय माता की पूजा के लिए गोपाष्टमी पर्व विशेष माना गया है। ये पर्व हर साल कार्तिक शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को मनाया जाता है।

उन्होंने आगे बताया की इसी दिन भगवान श्री कृष्ण ने पहली बार गऊ चराई थी भगवान कृष्ण कार्तिक मास के शुक्ल पक्ष की अष्टमी तिथि को गाय को चराने के लिए पहली बार घर से निकले थे। तभी से इस तिथि को गोपाष्टमी के रूप में मनाया जाने लगा। ऐसी भी मान्यता है कि इस दिन भगवान कृष्ण ने गोवर्धन पर्वत को अपनी उंगली पर उठाकर इंद्र देव के प्रकोप से गोप और गोपियों की रक्षा की थी। गोपाष्टमी पर्व ब्रज में काफी धूमधाम से मनाया जाता है। मान्यता है कि इस दिन गाय और उसके बछड़े की पूजा करने से सौभाग्य की प्राप्ति होती है।

गोपाष्टमी पूजा विधि: इस दिन गाय और उसके बछड़े को स्नान कराना चाहिए। फिर उनका श्रृंगार किया जाता है। इस दिन लोग गायों को तरह तरह के आभूषणों से सजाते हैं। इस दिन गाय के सींगों पर चुनरी बांधने की भी परंपरा है। गोपाष्टमी व्रत कथा जरूर सुनें। गायों को भोजन कराएं। गाय के मस्तक पर तिलक लगाएं। हाथ जोड़कर गाय की परिक्रमा करें। गाय माता की आरती उतारें और भोग में उन्हें गुड़ खिलाएँ। इस दिन भगवान कृष्ण की भी पूजा की जाती है। गाय को हरा चारा खिलाएं।

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